Delhi Election: दिल्ली की वो 14 सीट, जहां जीत हार तय करते हैं यूपी-बिहार वाले, पूर्वांचली अब किसका देंगे साथ?
Delhi Election 2025: दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच यूपी-बिहार से जुड़े पूर्वांचल के वोट बैंक को लेकर खींचतान जारी है। आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल भाजपा पर पूर्वांचलियों के वोट कटवाने का आरोप लगा रही तो वहीं भाजपा पूर्वांचलियों के अपमान को लेकर आप पर हमला कर रही है।
भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कहना है कि अरविंद केजरीवाल ने उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों को फर्जी वोटर कहकर अपमान किया है। तो वहीं आप का कहना है कि भाजपा तो पूर्वांचल के लोगों को रोहिंग्या, बांग्लादेशी बताकर वोट कटवाती रहती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि दिल्ली में पूर्वांचलियों की स्थिति कैसी है और वो कितने सीटों पर हार जीत तय करते हैं?

🔴 दिल्ली में पूर्वांचलियों की स्थिति
दिल्ली में पूर्वांचल के वोटर की आबादी लगभग 45 लाख है। दिल्ली में पूर्वांचल के लोग 30 सीटों पर फैले हुए हैं। दिल्ली में 25 प्रतिशत से ज्यादा पूर्वांचली वोटर हैं। ये 20 सीटों पर बड़ा असर रखते हैं, उनमें से 14 सीटों पर ये हार-जीत तय करते हैं।
दिल्ली में लगभग 25% मतदाता ऐसे हैं, जो उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और झारखंड के रहने वाले हैं, और इनका अधिकांश हिस्सा पूर्वांचल से आता है। इस क्षेत्र के मतदाता, विशेष रूप से यूपी और बिहार से, दिल्ली में कई चुनावी समीकरणों को प्रभावित करते हैं। इन मतदाताओं का सबसे बड़ा प्रतिशत उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से (पूर्वांचल) से आता है। इनका वोट बैंक किसी भी पार्टी के लिए अहम है क्योंकि पूर्वांचली समाज के लोग अक्सर एकजुट होकर मतदान करते हैं।
🔴 दिल्ली की वो 14 सीटें, जहां हार और जीत तय करते हैं पूर्वांचली?
दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से 14 सीटें ऐसी हैं, जहां पूर्वांचली मतदाताओं का प्रभाव निर्णायक हो सकता है। ये सीटें मुख्य रूप से उत्तरी और पूर्वी दिल्ली में स्थित हैं, जहां पूर्वांचल के मतदाता बड़ी संख्या में हैं। इन 14 सीटों में कई लोकप्रिय राजनीतिक दलों के लिए चुनौती बनी रहती है, क्योंकि पूर्वांचलियों का वोट बिना किसी पार्टी की ओर पूरी तरह से झुके रहना एक रणनीतिक स्थिति बनाता है। ये 14 सीटें इस प्रकार हैं...
- 1. देवली विधानसभा सीट
- 2. बुराड़ी विधानसभा सीट
- 3. किराड़ी विधानसभा सीट
- 4. संगम विहार विधानसभा सीट
- 5. विकासपुरी विधानसभा सीट
- 6. द्वारका विधानसभा सीट
- 7. पालम विधानसभा सीट
- 8. लक्ष्मीनगर विधानसभा सीट
- 9. मटियाला विधानसभा सीट
- 10. करावलनगर विधानसभा सीट
- 11. सीमापुरी विधानसभा सीट
- 12. रिठाला विधानसभा सीट
- 13. मंगोलपुरी विधानसभा सीट
- 14. बादली विधानसभा सीट
🔴 ये 14 सीट क्यों है जरूरी?
वोट बैंक का आकार: पूर्वांचल के लोग दिल्ली में राजनीतिक रूप से एक बड़ा वोट बैंक बनाते हैं। इनकी एकजुटता कई बार चुनावों के नतीजे को पलट देती है।
आर्थिक और सामाजिक स्थिति: पूर्वांचल के लोग मुख्यतः व्यापारी, मजदूर और सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं। उनकी आर्थिक स्थिति चुनावों में उनकी प्राथमिकताओं को प्रभावित करती है।
पारिवारिक और सामाजिक नेटवर्क: अधिकांश पूर्वांचल के लोग एक-दूसरे से जुड़े होते हैं और उनका सामाजिक नेटवर्क चुनावों में मतदान को प्रभावित करता है।
राजनीतिक रणनीति: विभिन्न दल इस वोट बैंक को अपनी ओर खींचने के लिए विशेष रणनीतियां अपनाते हैं। इन रणनीतियों में भाषा, संस्कृति और स्थानीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना शामिल होता है।
🔴 दिल्ली के पिछले चुनावों में किस तरफ थे पूर्वांचली वोटर?
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2015 की बात करे तो पूर्वांचली प्रभाव वाली सभी 16 सीटों पर 64 प्रतिशत वोट आम आदमी पार्टी को मिले थे। वहीं भाजपा को एक भी सीट नहीं मिला था, जबकि वोट भाजपा को 29 फीसदी वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस का 4 प्रतिशत वोट मिले थे।
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 की बात करें तो दिल्ली में 16 में 14 सीटें और 54.62 प्रतिशत वोट आप को मिले थे। भाजपा के खाते में 2 सीट गई थी और उनका वोच प्रतिशत 39.09 फीसदी था। वहीं कांग्रेस को सिर्फ 2.44 फीसदी वोट मिले थे।
🔴 दिल्ली चुनाव 2025 में पूर्वांचली वोटर किसका देंगे साथ?
दिल्ली चुनाव में इस बार पूर्वांचली वोटर किसका साथ देंगे...ये कहना बहुत मुश्किल है। आप की बात करें तो आप की दिल्ली में जड़ें मजबूत हैं और दिल्ली सरकार की नीतियों को लेकर AAP ने एक बड़ा आधार तैयार किया है। पार्टी ने अपने कार्यकाल में दिल्ली के विभिन्न मुद्दों पर काम किया है, जैसे कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी और सुरक्षा, जो दिल्ली के मतदाताओं को आकर्षित करते हैं। खासतौर पर, AAP ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ा सुधार किया है, जो पूर्वांचलियों के लिए भी एक अहम मुद्दा बन सकता है। लेकिन प्रदूषण, टूटी सड़कें और भ्रष्टाचार का मुद्दा आप पर भारी भी पड़ सकता है।
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी दिल्ली में हमेशा से एक मजबूत राजनीतिक दल रही है। भाजपा के पास केंद्र सरकार की ताकत है और मोदी सरकार की योजनाओं का भी दिल्ली में असर देखा जा सकता है। भाजपा ने हमेशा ही राष्ट्रीय सुरक्षा, हिन्दू पहचान, और विकास के मुद्दों को प्राथमिकता दी है। इन मुद्दों को लेकर भाजपा ने पूर्वांचली मतदाताओं के बीच अपनी पैठ बनाने की कोशिश की है। भाजपा ने हिन्दू पहचान को महत्व दिया है, और यह संदेश दिल्ली में रहने वाले पूर्वांचली समुदाय के एक हिस्से को खासतौर पर आकर्षित कर सकता है।












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