दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नकली दवा फैक्ट्री का किया भंडाफोड़, मास्टर कोऑर्डिनेटर गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बेहद खतरनाक ड्रग सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने दिल्ली से लेकर बिहार तक फैले इस जाल को काटते हुए एक और फर्जी दवा फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। पुलिस की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि किस तरह मोटा मुनाफा कमाने के लिए बाजार में 'नकली मौत' परोसी जा रही थी। आइए जानते हैं इस पूरे मामले में पुलिस की रेड के दौरान क्या चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने इस मामले में बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए मास्टर कोऑर्डिनेटर अरुण (59) को बिहार के गया से दबोच लिया है। पुलिस के मुताबिक, पिछले हफ्ते गिरफ्तार हुए तनिष्क नाम के आरोपी ने पूछताछ में अरुण के नाम का खुलासा किया था। इसके बाद पुलिस की टीम तुरंत गया पहुंची और वहां चल रही मौत की फैक्ट्री का पर्दाफाश किया। इस गिरोह में अब तक कुल 9 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।

Delhi Police: फैक्ट्री में नहीं था कोई केमिस्ट
एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की जांच में जो बात सामने आई, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली है। गया में जिस जगह दवाएं बनाई जा रही थीं, वहां न तो कोई वैध लाइसेंस था और न ही कोई योग्य मैन्युफैक्चरिंग या एनालिटिकल केमिस्ट। ड्रग विभाग की टीम जब मौके पर पहुंची, तो वहां भारी मात्रा में खतरनाक रसायनों का ढेर मिला।
बरामदगी की लिस्ट:
1.19 लाख: नकली जिंक की गोलियां
42 हजार से ज्यादा: नकली एजीथ्रोमाइसिन टैबलेट
27 किलो: पैरासिटामोल पाउडर
444: नकली इंजेक्शन (डिलोना एक्वा)
5 करोड़ का ट्रामाडोल और हेरोइन वाला कनेक्शन
पुलिस ने खुलासा किया है कि आरोपी अरुण फैक्ट्री में तस्करी कर लाए गए ट्रामाडोल पाउडर से गोलियां तैयार करता था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस स्टॉक की कीमत 5 करोड़ रुपये से ज्यादा है। हैरान करने वाली बात यह है कि इन गोलियों का इस्तेमाल नशे के आदी लोग हेरोइन के विकल्प के रूप में कर रहे थे। गिरोह अवैध मेडिकल स्टोर के जरिए इन नकली दवाओं को ऊंचे दामों पर सप्लाई करता था।
हजारों किलोमीटर का सफर तय कर और कई राज्यों में छापेमारी के बाद दिल्ली पुलिस ने इस नेटवर्क की कमर तोड़ दी है। डीसीपी संजीव कुमार यादव ने सख्त लहजे में कहा है कि आम जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस अब इस गिरोह के बाकी सप्लायर्स और अवैध मेडिकल स्टोर्स की पहचान करने में जुटी है।












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