केजरीवाल के नामांकन रद्द की BJP ने क्यों उठाई मांग? कोरोना काल में कैसे बढ़ी 40% संपत्ति! क्या है पूरा विवाद?
Delhi Chunav 2025 Arvind Kejriwal: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार परवेश वर्मा ने नई दिल्ली विधानसभा सीट के लिए दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नामांकन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। जिसमें आय में विसंगतियां, आपराधिक मामलों का खुलासा न करना और मतदाता पंजीकरण संबंधी मुद्दों को उठाया गया है। भाजपा ने अरविंद केजरीवाल के नामांकन को रद्द करने की मांग की गई है।
दिल्ली भाजपा प्रमुख वीरेंद्र सचदेवा ने भी शनिवार (18 जनवरी) को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अरविंद केजरीवाल का नामांकन रद्द करने की मांग की है। वीरेंद्र सचदेवा ने दावा किया कि कोविड-19 महामारी के दौरान वित्त वर्ष 2020-21 में आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल की आय में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। सचदेवा ने केजरीवाल से इस मामले पर जवाब मांगा है कि आखिर वो बताए...कि कोरोना काल में उनकी संपत्ति 40% कैसे बढ़ी?

वीरेंद्र सचदेवा बोले- कोरोना काल कैसे बढ़ी केजरीवाल की संपत्ति? ये सवाल अनसुलझा है
वीरेंद्र सचदेवा ने कहा, "2020-21 में कोविड काल में केजरीवाल की आय में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह सवाल अभी भी अनसुलझा है। हर मुद्दे पर अपनी राय देने वाले केजरीवाल इस मामले पर चुप हो जाते हैं। चूंकि दिल्ली में चुनाव आ चुके हैं, इसलिए उन्हें जवाब देना चाहिए कि पैसा कहां से आया।"
परवेश वर्मा ने गिनाए, केजरीवाल के हलफनामे में क्या-क्या आंकड़े गलत हैं!
शिकायत में परवेश वर्मा ने दावा किया कि अरविंद केजरीवाल ने "वर्ष 2019-20, 2021-22 और 2022-23 के लिए अपने हलफनामे में गलत आय के आंकड़े बताए" क्योंकि आम आदमी पार्टी (आप) के नेता ने दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में गलत वेतन दिखाया है।
शिकायत में कहा गया है कि केजरीवाल के नामांकन में कहा गया है कि दिल्ली के मंत्री (2011 से 2023 तक) के रूप में उनका वास्तविक वेतन 20,000 रुपये प्रति माह और दैनिक भत्ते और अन्य लाभ होने चाहिए थे।
शिकायत में अरविंद केजरीवाल के "नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र के भाग संख्या 52 (सीरियल नंबर 709) में मतदाता पंजीकरण" पर भी सवाल उठाया गया और आरोप लगाया गया कि "उनका वोट गाजियाबाद, कौशांबी सहित कई स्थानों पर है।"
इसके अलावा, परवेश वर्मा ने शिकायत में जिक्र किया है कि अरविंद केजरीवाल नॉर्थ एवेन्यू पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ दर्ज चार एफआईआर का विवरण देने में विफल रहे, जिसके कारण उनका नामांकन खारिज किया जाना चाहिए।
मनीष सिसोदिया के 1.5 करोड़ के लोन पर भी उठे सवाल!
वीरेंद्र सचदेवा ने आप नेता मनीष सिसोदिया पर भी आरोप लगाते हुए दावा किया कि सिसोदिया ने अपने बेटे की पढ़ाई के लिए तीन निजी व्यक्तियों से 1.5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया। वीरेंद्र सचदेवा ने आरोप लगाया, "हम सभी अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए अलग-अलग तरीके से लोन लेते हैं और मनीष सिसोदिया भी यही करते हैं। डेढ़ करोड़ रुपए का लोन है, लेकिन जब डिटेल में देखा तो पता चला कि लोन बैंक ने नहीं, बल्कि अपने खास दोस्तों ने दिया है। यह लोन शराब नीति लागू होने के बाद मिला है। सीएजी की रिपोर्ट कहती है कि शराब घोटाले में 2026 करोड़ रुपए की हेराफेरी हुई है। लोन देने वाले लोगों में से एक उमेश चंद मित्तल ने बिना ब्याज के 86 लाख रुपये दिए। दूसरे व्यक्ति ने करीब 9-10 लाख रुपये दिए और गुनीत अरोड़ा ने 58 लाख रुपये दिए।"
उन्होंने कहा कि यह मामला गंभीर है और इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "यह जांच का विषय है और हम संबंधित विभागों से बात करेंगे। सिसोदिया को यह बताना चाहिए कि यह पैसा कहां से आया। आज तक शीश महल के स्रोत का पता नहीं चल पाया है।"
बांसुरी स्वराज बोलीं- 'मनीष सिसोदिया बताएं, किस 3 व्यक्ति से आपने 1.5 करोड़ लिए'
भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने भी सिसोदिया की आलोचना की और कहा कि उन्हें जनता को बताना चाहिए कि पैसा कहां से आया। उन्होंने कहा, "आपने संवैधानिक पद संभाला है और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री के रूप में काम किया है, इसलिए आप जनता के प्रति जवाबदेह हैं। मैं सिसोदिया जी से पूछना चाहती हूं कि ये तीन व्यक्ति कौन हैं जिनसे आपने 1.5 करोड़ रुपये लिए। मैं जानना चाहती हूं कि क्या आपने यह पैसा तब लिया जब आप शराब नीति लागू करने वाले थे। मैं यह भी पूछना चाहती हूं कि क्या यह लोन वास्तविक है।"
दिल्ली विधानसभा चुनाव 5 फरवरी को एक ही चरण में होंगे और मतों की गिनती 8 फरवरी को होगी। नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 20 जनवरी है। 2020 के विधानसभा चुनाव में AAP ने 70 में से 62 सीटें जीतीं और भाजपा ने आठ सीटें हासिल कीं।












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