Delhi Chunav 2025: चुनाव प्रचार में आखिरकार AAP और केजरीवाल पर क्यों हमलावर रहे राहुल गांधी?
Delhi Chunav 2025: दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान सोमवार शाम को थम गया। इस चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) और बीजेपी (BJP) शुरू से एक-दूसरे के प्रति आक्रामक रहीं। सिर्फ कांग्रेस की ही रणनीति ढुलमुल नजर आई। लेकिन, लगभग बीच जनवरी से राहुल गांधी प्रचार के लिए उतरे तो उन्होंने कई बार न सिर्फ आप पर, बल्कि अरविंद केजरीवाल पर भी हमलावर होने की कोशिश की।
दिल्ली विधानसभा के लिए जब कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ना तय कर लिया तो प्रदेश कांग्रेस के नेताओं में खुशी का ठिकाना नहीं था। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव और नई दिल्ली सीट से पार्टी उम्मीदवार संदीप दीक्षित ने आप और उसके मुखिया के खिलाफ सारी सियासी तलवारें खींच लीं। दिल्ली कांग्रेस से राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता बने अजय माकन ने तो केजरीवाल पर हमला करने में बीजेपी को भी पछाड़ना शुरू कर दिया।

Delhi Chunav 2025: दिल्ली चुनाव में प्रचार के दौरान बार-बार गोल पोस्ट बदलती नजर आई कांग्रेस
लेकिन, अचानक कांग्रेस नेताओं के आम आदमी पार्टी के खिलाफ सुर नरम पड़ने लग गए। संदीप दीक्षित ने अपने स्तर पर अलख जगाए रखने की कोशिश जरूर की, लेकिन माकन के पहले वाले तेवर फिर कभी नहीं दिखाई पड़े। राहुल गांधी ने शुरू में बीजेपी पर ही फोकस किया। फिर क्या हुआ कि अचानक उन्होंने ही आप और केजरीवाल को निशाना बनाना शुरू कर दिया और बदले में आप संयोजक ने भी एक हद तक पलटवार करने की कोशिश की।
Delhi Chunav 2025: कांग्रेस के जनाधार को वापस लाने की मुहिम में राहुल ने आप और केजरीवाल के साथ शुरू की चुनावी दुश्मनी?
असल में कांग्रेस की बाद के दिनों में बदली रणनीति के पीछे एक सोची-समझी उम्मीद छिपी है। इंडियन एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट दी है, जिसके मुताबिक कांग्रेस नेताओं को लगता है कि बीजेपी का अपना एक वोट बैंक है और वह 1998 से लेकर सभी विधानसभा चुनावों में उसका वोट शेयर 32% से लेकर 38% के बीच बरकरार रहा है। लेकिन, कांग्रेस नेता मानकर चलते हैं कि आज आम आदमी पार्टी (AAP) जहां खड़ी है, वह कांग्रेस का ही जनाधार है।
एक कांग्रेस नेता के अनुसार, 'बीजेपी वोट बैंक के बीच हमारी अपील सीमित है। यहां तक कि हम अपने सबसे अच्छे दिन में भी उनके जनाधार में सेंध नहीं लगा सके और वह कायम रहेगा। हमें अपने उस जनाधार को वापस पाना है, जो आप में चला गया है।' कांग्रेस आप के साथ मिलकर नहीं चल सकती, 'अब हमारे केंद्रीय नेतृत्व को यह बात समझ में आ चुकी है।'
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक समय में आकर आप और भाजपा को एक ही साथ रखकर निशाना साधने की कोशिश की और उसे 'दलित और आरक्षण-विरोधी' भी बताया है। उन्होंने यह कहकर भी आप पर हमला किया है कि इसके बड़े नेताओं में समाज के दबे-कुचलों में से कोई नहीं है।
Delhi Chunav 2025: कांग्रेस नेताओं को अपना वोट शेयर दहाई में पहुंचने की दिख रही है उम्मीद
कांग्रेस के एक नेता का कहना है, 'दिल्ली में कांग्रेस और बीजेपी ही एक-दूसरे के पारंपरिक विरोधी हैं। हम दोनों एक-दूसरे की कमजोरियों और ताकत को जानते हैं। हमारी वापसी तभी हो सकती है, जब आप समीकरण से बाहर निकल जाए।'
कांग्रेस नेताओं का दावा है कि पार्टी का आंतरिक सर्वे कहता है कि वे करीब आधा दर्जन सीटों पर कड़ी चुनौती दे रहे हैं, यहां तक कि जीत की भी स्थिति में हैं और पार्टी का वोट शेयर अभी के 4.63% से बढ़कर दहाई अंक तक पहुंच सकता है।
Delhi Chunav 2025: कांग्रेस का टारगेट पूरा हुआ तो बीजेपी की होगी बल्ले-बल्ले?
हालांकि, पार्टी के आंतरिक सर्वे के दावों की मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा और यहां तक कि महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों में भी हवा निकल चुकी है। भाजपा के एक सूत्र ने भी वनइंडिया से बातचीत में कहा है कि उन्हें लगता है कि 'कांग्रेस का वोट शेयर इस चुनाव में बढ़कर 7% तक जा सकता है, अगर इसने दहाई का आंकड़ा पार कर लिया तो बीजेपी को 50 से ज्यादा सीटें मिलेंगी।'
Delhi Chunav 2025: AAP को लेकर कांग्रेस की आगे भी दिख सकती है ढुलमुल रणनीति?
आम आदमी पार्टी (AAP) को लेकर कांग्रेस की नीति शुरू से ढुलमुल रही है। पार्टी नेताओं का एक बड़ा वर्ग मानता है कि अन्ना आंदोलन में आप के कई नेताओं का सक्रिय योगदान था, जिसकी वजह से केंद्र की सत्ता से कांग्रेस की शर्मनाक विदाई हुई। लेकिन, फिर भी इसके केंद्रीय नेतृत्व ने बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के लिए 2013 में अरविंद केजरीवाल की पहली सरकार बनवाई।
इसी तरह से 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले जब बीजेपी के खिलाफ इंडिया ब्लॉक बना तो कांग्रेस और आम आदमी पार्टी फिर से साथ आ गए। लेकिन, पंजाब में जहां दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़े और कांग्रेस को इसका फायदा भी मिला। वहीं, दिल्ली में दोनों ने हाथ मिला लिया, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत सकी।
उस दौरान राहुल गांधी ने यह भी कहा कि वह पहली बार नई दिल्ली लोकसभा सीट पर आप उम्मीदवार को वोट देंगे, वहीं चांदनी चौक सीट पर केजरीवाल कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में वोट डालेंगे। लेकिन, इंडिया ब्लॉक की बैठकों में मंच साझा करने वाले दोनों नेता ने एक भी साझा चुनाव सभा नहीं की। अब 8 फरवरी को ही पता चलेगा कि कांग्रेस नेतृत्व के आधे-अधूरे हौसले से लड़े गए इस चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन पर क्या असर पड़ता है?
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