कांग्रेस को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, टैक्स को लेकर याचिका खारिज, भरने होंगे 105 करोड़ रुपए, क्या है मामला?
दिल्ली हाईकोर्ट ने कांग्रेस की ओर से दायर उस याचिका का खारिज कर दिया है, जिसमें आयकर विभाग की ओर से पार्टी पर लगाए गए 105 करोड़ के टैक्स का विरोध किया गया था। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में आयकर न्यायाधिकरण (Income Tax Appellate Tribunal)के आदेश को लेकर हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा कि कांग्रेस की ओर पेश किए दस्तावेजों में याचिका को स्वीकार करने का कोई आधार नहीं मिला है।
आयकर न्यायाधिकरण (ITAT) ने कांग्रेस के 105 करोड़ के बकाया कर वसूली के लिए पार्टी को नोटिस भेजा था। जिसको लेकर पार्टी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी। कांग्रेस की ये याचिका कुछ टैक्स रिटर्न में विसंगतियों के लिए जुर्माना लगाने के खिलाफ दायार की थी। जिसको अदालत ने बुधवार (13 मार्च) खारिच कर दिया। याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की अगुवाई वाली उच्च न्यायालय की पीठ ने कहा, "हमें दिए गए आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं मिला।"

याचिका को खारिज करने के साथ कोर्ट ने आईटीएटी के आदेश को बरकरार रखते हुए याचिकाकर्ता कांग्रेस पार्टी को नए सिरे से अपीलीय न्यायाधिकरण में जाने की छूट दी है।
क्या है मामला?
इस वर्ष फरवरी में आयकर विभाग ने बकाया टैक्स चुकाने में देरी पर कांग्रेस के चार बैंक खाते पर प्रतिबंध लगा दिया था। आयकर विभाग ने ये एक्शन 2018-19 के लिए 210 करोड़ के बकाया इनकम टैक्स को लेकर की थी। जिसके बाद विभाग ने आयकर न्यायाधिकरण में भी अपील दायर की। आयकर विभाग की अपील पर सुनवाई करते हुए अगर कांग्रेस के खाते फ्रीज कर दिए गए तो पार्टी बिल और वेतन का भुगतान नहीं कर पाएगी।
वहीं कांग्रेस कोषाध्यक्ष अजय माकन ने 21 फरवरी को आरोप लगाया कि मामले में सुनवाई और फैसला लंबित होने तक, आयकर विभाग ने बैंकों को कांग्रेस, आईवाईसी और एनएसयूआई खातों से ₹65 करोड़ से अधिक सरकार को हस्तांतरित करने का आदेश दिया है। आयकर विभाग के अधिकारियों के मुताबिक मामला कर निर्धारण वर्ष (AY) 2018-19 का है। शुरुआत में कांग्रेस पर 103 करोड़ रुपये का टैक्स बकाया था। ब्याज बढ़ने के चलते ये 32 करोड़ रूपए हो गया। 6 जुलाई, 2021 कुल देय कर की राशि 105 करोड़ रुपए हो चुकी है।












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