रामलीला मैदान का इतिहास, तालाब से कैसे बना देश के बड़े आंदोलनों का गवाह, जानिए 10 बड़ी बातें
रामलीला मैदान मुगल काल से लेकर आज के मौजूदा वक्त तक चर्चाओं में रहा है। यहां कई बड़े आंदोलन की नींव रखी गई है। ऐसे में जानिए रामलीला मैदान का इतिहास

Delhi Ramlila Maidan History: दिल्ली का रामलीला मैदान कई ऐतिहासिक राजनीतिक आंदोलन का गवाह रहा है। सरकार के खिलाफ बगावत हो गया फिर देश को नई दिशा देने के लिए उठाया गया कदम रामलीला मैदान से ही लिया गया है। लोकनायक जयप्रकाश नारायण से लेकर अन्ना हजारे के लोकपाल आंदोलन तक का रामलीला गवाह बना है, लेकिन क्या आपको पता है कि आज का रामलीला मैदान किसी जमाने में तालाब हुआ करता था। ऐसे में जानिए देश को बदलने वाले रामलीला मैदान का इतिहास....
रामलीला मैदान की बात आज इसलिए हो रही है, क्योंकि एक बार फिर इस मैदान से आंदोलन की राह बनने जा रही है। किसान महापंचायत के मद्देनजर रामलीला मैदान में किसानों का पहुंचना शुरू हो रहा है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कानूनी गारंटी की मांग के साथ-साथ किसानों की समस्याओं को लेकर किसानों का महापंचायत होने जा रही है। किसानों की महापंचायत से पहले सुरक्षा भी कड़ी कर दी गई है।
कभी तालाब हुआ करता था रामलीला मैदान
किसी जमाने में रामलीला मैदान एक तालाब हुआ करता था, जिसके आसपास बस्ती बसी हुई थी। आज का रामलीला मैदान अजमेरी गेट और तुर्कमान गेट के बीच 10 एकड़ क्षेत्रफल में फैला हुआ है, जिसकी क्षमता के अनुसार उसमें एक लाख लोग खड़े हो सकते हैं।
जानिए कैसे पड़ा रामलीला मैदान नाम
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अजमेरी गेट के पास रामलीला मैदान में 19वीं शताब्दी से रामलीला होती आ रही है। इतिहासकार बताते हैं कि बहादुर शाह जफर ने खुद अपने जुलूस के रास्ते में बदलाव का आदेश दिया था ताकि वो भी रामलीला मैदान देख सके। 1876 तक रामलीला मनाने का रिवाज था। माना जाता है कि रामलीला होने की वजह से इसका जगह का रामलीला पड़ा।

फिर ब्रिटिश सैनिकों के लिए तैयार किया कैंप
बताया जाता है कि साल 1883 के बाद इस मैदान को अंग्रेजों ने अपने लिए तैयार करवाया। 1883 में ब्रिटिश सैनिकों के कैंप के लिए इस्तेमाल करना शुरू किया। हालांकि वक्त के साथ-साथ ब्रिटिश सेना कमजोर हुई और फिर से समय ने करवट ली और फिर से यहां रामलीला का मंचन शुरू हो गया।
कई बड़ी घटनाओं का गवाह बना रामलीला मैदान
- साल 1945 में मोहम्मद अली जिन्ना को इसी मैदान में मौजूद लोगों की भीड़ ने मौलाना की उपाधि दी थी। जिन्ना की इसी सभा के बाद रामलीला मैदान रैली, सभाओं और आंदोलनों की पसंदीदा जगह बन गई।
- आजादी की लड़ाई के दौरान महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल और कई बड़े दूसरे नेताओं ने यहां से लोगों के बीच अलख जगाई थी।
- दिसंबर 1952 में रामलीला मैदान में जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को लेकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने सत्याग्रह किया था।
- भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 1956 और 1957 के बीच रामलीला मैदान से कई बड़ी जनसभाओं को संबोधित किया।
- साल 1965 में भारत पाकिस्तान की जंग में जीत के बाद तत्कालीन पीएम लाल बहादुर शास्त्री ने भी यहां विशाल जनसभा को संबोधित किया था।
- 1972 में की पाकिस्तान से लड़ाई के बाद तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश बनने के बाद पाकिस्तान की हार का जश्न भी यहां से मनाया था।
- 1975 में इमरजेंसी के दौरान लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने भी इसी मैदान से कांग्रेस सरकार के खिलाफ अपनी हुंकार भरी थी।
- कवि रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध पंक्तिंया 'सिंहासन खाली करो कि जनता आती है नारा' भी इसी रामलीला मैदान में गूंजा था।
- साल 2011 में अन्ना आंदोलन का आंदोलन भी यहीं हुआ था।












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