Uttarakhand Flood: जलस्तर में वृद्धि का पता लगाने के लिए रैनी गांव में लगाया गया अलार्म सिस्टम
उत्तरखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर फटने से आई भयानक बाढ़ ने कई गांवों को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया।
देहरादून। उत्तरखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर फटने से आई भयानक बाढ़ ने कई गांवों को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया। विकास की कई परियोजनाएं तबाह हो गईं। इस बाढ़ ने कई जिंदगियों को अपने आगोश में ले लिया। अभी तक 53 लोगों के शव बरामद किये जा चुके हैं जबकि लगभग 150 लोग अभी भी लापता हैं, जिन्हें खोजने का काम लगातार जारी है।

इस प्रकार का हादसा भविष्य में न हो, इसके लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल ने संवेदनशील इलाकों में ऐसे अलार्म सिस्टम लगाने का फैसला किया है जो जलस्तर में होने वाली वृद्धि से पहले ही अलर्ट कर देंगे। इस प्रक्रिया में राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल ने चमोली जिले के रैनी गांव में सोमवार को एक अलार्म सिस्टम लगाया, जो पानी के स्तर में वृद्धि होने से पहले ही लोगों को सूचित कर देगा।
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इस हादसे में जो एक बड़ी बात निकलकर सामने आई वो यह कि जलस्तर में वृद्धि के बारे में अलर्ट करने के लिए कहीं कोई कैमरा या सैंसर नहीं लगाए गए थे, अगर इस तरह के उपकरण लगाए गए होते तो कई लोगों कि जान बचाई जा सकती थी।
हादसे के बाद पर्यावरण कार्यकर्ता और जल विशेषज्ञ हिमांशु ठक्कर ने मीडिया को बताया था कि 'रैनी गांव में, जब बाढ़ का पहला दृश्य देखा गया था, तो लोगों को तुरंत नीचे की ओर चेतावनी देने के लिए एक प्रणाली होनी चाहिए थी। इससे तपोवन और अन्य स्थानों में लोगों की जान बच सकती थी।' उन्होंने संवेदनशील जगहों पर कैमरे लगाने का भी सुझाव दिया था।
इस हादसे में जीवित बचे मनीष कुमार ने कहा कि गड़गड़ाहट और शोर सुनकर वह ऊपर की तरफ भाग गए थे। उन्होंने कहा कि एक उचित अलार्म सिस्टम से अधिक लोगों की जान बचाई जा सकती थी। पिछले 15 सालों से बन रहा तपोवन पावर प्रोजेक्ट इससे पहले तीन बार बाढ़ जैसे हालातों से जूझ चुका था उसके बावजूद भी वहां मजदूरों की सुरक्षा के लिए ऐसे उपकरण नहीं लगाए गए।












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