राहुल गांधी करेंगे सेवाग्राम का शिलान्यास,जानिए छत्तीसगढ़ में सेवाग्राम और गांधी के सियासी मायने
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रायपुर, 02 फरवरी। छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल सरकार बनने के बाद से महात्मा गांधी के नाम पर पक्ष विपक्ष के बीच लगातार राजनीतिक बयानबाजियां देखी जाती रही हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल खुद गांधी बनाम गोडसे का मुद्दा समय - समय पर उठाकर भारतीय जनता पार्टी को निशाने पर लेते रहते हैं। वजह साफ है, भाजपा गांधीजी के विचारों पर चलने के दावे जरूर करती है, लेकिन गांधी जी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को खुलकर खारिज करने से बचती है। ऐसे में यह बात तो एकदम स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस खुद को महात्मा गांधी के अनुयायी के तौर पर पेश करने की कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। यूपी समेत 5 राज्यों में जारी चुनावी समर के बीच कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी छत्तीसगढ़ के नवा-रायपुर में भी वर्धा की तर्ज पर सेवा-ग्राम का शिलान्यास करेंगे। जाहिर है कांग्रेस इसका लाभ 2023 में प्रस्तावित छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में भी लेना चाहेगी।

गांधी के सहारे युवाओं तक पहुंचने की कोशिश
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना है कि छत्तीसगढ़ में गांधीवादी सिद्धांतों और नियमों को लोगों तक पहुंचाने के लिए वर्धा की तर्ज पर नवा रायपुर में गांधी सेवा ग्राम को बनाने का फैसला लिया गया है। उनका कहना है कि नयी पीढ़ी को गांधीवादी विचारधारा से जोड़कर युवाओं की ऊर्जा का सकारात्मक दिशा में उपयोग किया जा सकता है। यह केन्द्र देश भर के युवाओं को गांधी दर्शन से परिचित कराने का माध्यम बनेगा। बघेल का यह भी मानना है कि गांधी जी के विचारों के अनुरूप युवाओं को रोजगार से जुड़ी गतिविधियों से जोड़ते हुए छत्तीसगढ़ में शुरू किए गए राजीव गांधी युवा मितान क्लब के सदस्यों को गांधी सेवा ग्राम से जोड़ने की रणनीति बनाई गई है। साथ ही वह देशभर के युवाओं को भी गांधी सेवा ग्राम का भ्रमण कराना चाहते हैं।

75 एकड़ में बनेगा सेवाग्राम, जहां होगा स्कूल से लेकर ओल्ड एज होम भी
छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से जारी जानकारी के मुताबिक नवा रायपुर में बनने वाले सेवाग्राम में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की कल्पना को साकार करने के लिए सभी प्रकार के कारीगरों के लिए ट्रेनिंग कार्यक्रम चलाया जायेगा। बघेल सरकार कुल 75 एकड़ की जमीन पर सेवाग्राम बनाने जा रही है, इसे ग्रामीण परिवेश के रूप में विकसित किया जाएगा। सेवा ग्राम में गांधी-दर्शन को याद रखने और सीखने का अवसर तो मिलेगा ही, इसके साथ ही स्वतंत्रता आंदोलन की यादों और राष्ट्रीय इतिहास को भी इसके माध्यम से जीवंत रखने का प्रयास किया जायेगा। सेवाग्राम में हर निर्माण ग्रामीण परिवेश के अनुरूप ही किया जायेगा और पूरे क्षेत्र में हरियाली रखी जाएँगी, ताकि लोग योग, ध्यान और आध्यात्म के जरिये गांधी जी के आदर्शों को समझ सकें।
सेवाग्राम में छत्तीसगढ़ की लोक कलाओं को बढ़ावा देने के साथ ही, वहां वृद्धाश्रम और वंचितों के लिए स्कूल, ओल्ड एज होम भी स्थापित किये जायेंगे। सेवा ग्राम को बस्तर, रायगढ़ और अन्य जिलों के बेल मेटल, लौह, टेराकोटा, पत्थर, कपड़े और बांस का उपयोग करके विभिन्न कलात्मक वस्तुओं से सजाया जाएगा। सेवाग्राम एक ऐसा स्थान होगा जहां आने वाले लोग स्थानीय कला और शिल्प, स्थानीय व्यंजनों को बारे में जानने के अलावा अपनी जानकारियों और अनुभवों को शेयर कर सकेंगे। सेवा ग्राम में एक ओपन थियेटर भी होगा, जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इससे पर्यटन के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा।

वर्धा सेवाग्राम की तर्ज पर हो रहा है निर्माण
गौरतलब है कि भूपेश बघेल सरकार की सेवाग्राम परियोजना के पीछे महाराष्ट्र के वर्धा में स्थित सेवाग्राम है, जिसकी स्थापना 1936 में महात्मा गांधी और उनकी पत्नी कस्तूरबा के निवास के रूप की गई थी, ताकि वहां से वह मध्य भारत में स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व कर सकें। दरअसल 1930 में जब महात्मा गांधी ने साबरमती आश्रम से दांडी यात्रा पर निकलने से पहले प्रण लिया था कि जब तक भारत को आजादी नहीं मिल जाती तब तक वह साबरमती आश्रम नहीं लौटेंगे। दांडी यात्रा के दौरान अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार करके यरवदा जेल में बंद कर दिया था, जहां से निकलते ही गांधीजी ने हरिजन यात्रा आरम्भ कर दी थी, इस दौरान समय बीतता गया और आजादी मिली नहीं थी, इसलिए उन्होंने 1936 में सेवाग्राम आश्रम की स्थापना की और 12 साल वहां रहे।

छत्तीसगढ़ की सियासत में गांधी
गांधीजी का छत्तीसगढ़ से भी नाता रहा है। 20 दिसंबर 2020 को महात्मा गांधी पहली बार छत्तीसगढ़ आये थे, तब उन्होंने धमतरी क्षेत्र के एक छोटे से गांव कंडेल में किसानों के साथ मिलकर अंग्रेजों की तरफ से जबरदस्ती थोपे जा रहे नहर अनुबंध के खिलाफ जल नहर सत्याग्रह किया था। गांधी जी की 150 वी जयंती के मौके पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 2019 में कंडेल से लेकर रायपुर तक करीब 70 किलोमीटर लम्बी गाँधी विचार यात्रा निकाली थी।मुख्यमंत्री बनने के बाद शायद ही कोई ऐसा समय रहा हो, जब भूपेश बघेल ने गांधी बनाम गोडसे का मुद्दा उठाकर भाजपा और आरएसएस पर तंज ना कसा हो, इतना ही नहीं बघेल अक्सर सावरकर की वीरता पर भी सवाल उठाकर आरएसएस और भाजपा पर तंज कसते रहे हैं।
इस बीच यह भी जानना जरूरी है कि महात्मा गांधी को मानने के साथ भाजपा कभी गोडसे के खिलाफ खुलकर नहीं बोल पाई है, बल्कि वह हाल ही में रायपुर में आयोजित धर्म संसद में गांधी जी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करके राजद्रोह के आरोप में जेल की सजा काट रहे कालीचरण महाराज की रिहाई की मांग कर रही है। कालीचरण का बचाव करने की वजह से कांग्रेस लगातार भाजपा पर गांधी विरोधी होने के साथ गोडसे समर्थक होने के आरोप लगा रही है। गांधी बनाम गोडसे का मुद्दा एक बार फिर गर्म है, ऐसे में राहुल गांधी का सेवाग्राम का शिलान्यास करना सियासी मायनो में बेहद खास है।
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