Operation Black Forest: सेना का नक्सल नेटवर्क पर कड़ा प्रहार, 21 दिन में लाल आतंक के 214 ठिकाने ध्वस्त
Operation Black Forest: देश में भारतीय सेना दो ऑपरेशन को अंजाम दे रही है एक तरफ पाक आतंकीयों को चुन-चुन कर उनका सफाया कर रही है। वहीं दूसरी ओर लाल आतंक पर कड़ा प्रहार करते हुए उनके गढ़ को ध्वस्त कर रही है।
गृहमंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करने के उद्देश्य से 26 मार्च 2026 की समय-सीमा तय की है। इसी लक्ष्य की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाते हुए सुरक्षा बलों ने देश का अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त अभियान ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट को सफलतापूर्वक अंजाम दे रही है।

यह ऑपरेशन छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा पर स्थित कर्रगुट्टालू हिल (KGH) क्षेत्र में 21 अप्रैल से 11 मई तक चला।
Operation Black Forest: 21 दिनों की निर्णायक लड़ाई
छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा पर स्थित कर्रगुट्टालू हिल्स में 21 अप्रैल से 11 मई तक चला यह अभियान रणनीतिक और सामाजिक रुप से महत्त्वपूर्ण रहा। अधिकारियों के अनुसार, 214 से अधिक ठिकानों को ध्वस्त किया गया, और 12,000 किलो से अधिक राशन सामग्री, भारी मात्रा में विस्फोटक व हथियार जब्त किए गए। यह आँकड़े नहीं, बल्कि उस नेटवर्क की धज्जियाँ हैं जो वर्षों से आदिवासी इलाकों में दहशत और भ्रम का पर्याय बना हुआ था।
इस 21-दिन लंबे ऑपरेशन में कुल 31 नक्सलियों को मार गिराया गया, जिन पर कुल ₹1.72 करोड़ का इनाम घोषित था। अभियान को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और राज्य पुलिस के संयुक्त बलों द्वारा अंजाम दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, यह ऑपरेशन रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम रहा।
Operation Black Forest: घलगाम फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस की महत्वपूर्ण भूमिका
2022 में स्थापित घलगाम फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (FOB) ने इस ऑपरेशन की सफलता में निर्णायक भूमिका निभाई। 199वीं बटालियन के कमांडेंट आनंद ने बताया कि इस क्षेत्र में एक ग्राउंड कैंप बनाकर सूचना और संचार संचालन को नियंत्रित किया गया। उन्होंने कहा,
"नक्सलियों को उनके पारंपरिक 'सुरक्षित ठिकानों' से बाहर खदेड़ा गया है। कर्रगुट्टालू पहाड़ी क्षेत्र में उन्होंने शरण लेने की कोशिश की थी, लेकिन ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट ने उन्हें यहां से भी निष्कासित कर दिया।"
Operation Black Forest: दक्षिण बस्तर के माओवादी कैडर पर कार्रवाई
196वीं बटालियन के कमांडेंट कुमार मनीष ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, "पिछले कुछ महीनों से दक्षिण बस्तर के माओवादी कैडर इस क्षेत्र में छिपे हुए थे। उनके साथ पीएलजीए-1, तेलंगाना स्टेट कमेटी (TSC) और CRC के नक्सली भी यहां सक्रिय थे। इस कारण 21 दिवसीय अभियान जरूरी हो गया था।"
कमांडेंट मनीष ने बताया कि सुरक्षा बलों ने स्थानीय लोगों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने में मदद की है और उनका विश्वास जीतकर नक्सलियों के साथ उनके संबंधों को कमजोर किया है। उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें क्षेत्रीय लोगों को कैंप से जोड़ कर योजनाओं का लाभ दिलाया गया और विश्वास हासिल कर नक्सलियों से दूरी बनाने में सफलता पाई
- 214 ठिकानों का खात्मा, हथियारों और सामग्री की बड़ी बरामदगी
इस ऑपरेशन में 214 नक्सली ठिकानों और बंकरों को नष्ट किया गया। तलाशी के दौरान भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई, जिसमें शामिल हैं:
- 450 IEDs
- 818 BGL गोले
- 899 कोडेक्स बंडल
- हजारों डेटोनेटर और अन्य विस्फोटक सामग्री
- करीब 12,000 किलोग्राम खाद्यान्न
Operation Black Forest: नक्सल नेटवर्क की जड़ें काटने की तैयारी
सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र को सुरक्षा ग्रिड में बांटकर अभियान को अंजाम दिया, जिससे नक्सलियों की आपसी कनेक्टिविटी टूट गई। बचे हुए प्रमुख नक्सली सुरक्षित स्थानों की तलाश में भागने को मजबूर हो गए। ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का प्रतीक बनकर उभरा है। यह अभियान न केवल रणनीतिक सफलता का उदाहरण है, बल्कि यह स्थानीय विकास, विश्वास और राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक नया मील का पत्थर भी साबित हुआ है।












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