महानदी जल विवाद: दो राज्यों की लड़ाई में लटक रही तांदुला- गंगरेल लिंक प्रोजेक्ट, इंतजार में बजट हुआ दोगुना
छत्तीसगढ़ सरकार और उड़ीसा सरकार के बीच महानदी का विवाद अब तक सुलझ नहीं पाया है जबकि इस विवाद को लेकर साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर महानदी के जल बंटवारे पर दोनों राज्यों के हिस्सेदारी की बात कहीं जा रही है
बालोद, 24 अगस्त। छत्तीसगढ़ सरकार और उड़ीसा सरकार के बीच महानदी का विवाद अब तक सुलझ नहीं पाया है जबकि इस विवाद को लेकर साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट तक में याचिका दायर कर महानदी के जल बंटवारे पर दोनों राज्यों के हिस्सेदारी की बात कहीं जा रही है। लेकिन इस विवाद के बीच सबसे बड़ा असर छत्तीसगढ़ के जलसंसाधन विभाग की महती परियोजना पर पड़ रहा है।

क्या है तांदुला-गंगरेल लिंक नहर परियोजना
छत्तीसगढ़ के तीन कृषि प्रधान जिले बालोद, दुर्ग, बेमेतरा के लिए महत्वपूर्ण तांदुला - गंगरेल लिंक नहर परियोजना महानदी विवाद के चलते ठंडे बस्ते पर चली गई है। वर्तमान में धमतरी के गंगरेल डैम के ओवरफ्लो होने पर पानी महानदी में छोड़ा जा रहा है। जिसे बालोद के तांदुला डैम में पानी लाने 56 किमी नहर परियोजना प्रस्तावित है। तीन जिले बालोद, दुर्ग, बेमेतरा की 36 लाख जनसंख्या के आधार पर लिंक नहर परियोजना तैयार की गई थी। इस परियोजना के अनुसार दोनो डैम का पानी मिलाकर किसानों के लिए सिंचाई व आम लोगों के पेयजल के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। तांदुला डैम के पानी को वर्तमान में फिल्टर करने के बाद बालोद शहर के घरों में सप्लाई की जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट में चल रहा विवाद
दरअसल ओडिशा और छत्तीसगढ़ दोनों राज्य सरकार के बीच चल रहा महानदी जल विवाद की वजह से ही लिंक नहर परियोजना भी अटक गई है। अविभाजित मध्यप्रदेश और ओडिशा सरकार के बीच 37 सालों से चल रहा विवाद साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। विवाद का निराकरण करने महानदी वाटर डिस्प्यूट ट्रिब्यूनल (एमडब्ल्यूडीटी) कमेटी का गठन किया गया है। दोनों राज्य सरकार के बीच जल विवाद का निराकरण करने जल संसाधन विभाग सहित अन्य विभागों के सचिवों की 18 सदस्यीय समिति बनाई गई है। सिंचाई विभाग के अनुसार चार साल पहले जल विवाद का यह मामला केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। वर्ष 2018 में विवाद सुलझाने चर्चा का दौर चला।

दरअसल दोनों सरकारों के बीच विवाद का कारण सम्बलपुर में बना हीराकुंड बांध है जिसमें महानदी का पानी कम पहुँच पा पाता है। राज्य बनने के दौरान केंद्र सरकार ने हीराकुंड बांध ओडिशा को दे दिया। जिसमें छत्तीसगढ़ से होकर बहने वाली महानदी का पानी जाता है। ओडिशा सरकार ने छत्तीसगढ़ सरकार से नवंबर से मई के बीच सात माह तक महानदी से पानी छोड़ने की मांग कर रहा है। जबकि गर्मी में छत्तीसगढ़ के अधिकांश जिले जल संकट से जूझते है, जल संकट के बीच डैम से किसानों को रबी फसल के लिए पानी देना मुश्किल हो जाता है। प्रदेश के 22 जिलों के लिए महत्वपूर्ण महानदी में गर्मी में कम पानी रहता है। छत्तीसगढ़ सरकार का तर्क है कि अगर नवम्बर से मई के बीच पानी ओडिशा को दिया जाएगा तो निस्तारी और पेयजल संकट की स्थिति बनेगी। इस लिए नियमानुसार जल की हिस्सेदारी तय होनी चहिए।

दोगुना बढ़ गया प्रोजेक्ट का लागत
छत्तीसगढ़ के दो प्रमुख बांध को जोड़ने वाली लिंक नहर परियोजना 2012-13 और 2018-19 के बजट में शामिल किया गया था। इसके अलावा विभाग द्वारा प्रारंभिक सर्वे का कार्य पूरा कर लिया गया है। साल 2012 में इस परियोजना की लागत 343 करोड़ का अनुमान था। अब इसकी अनुमानित लागत लगभग 600 करोड़ तक पहुंच गई है। यानी विवाद के चलते परियोजना की लागत दुगुनी हो चुकी है।
सभी को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार
जिले के अधिकारियों के अनुसार जब तक मामला सुप्रीम कोर्ट में नही सुलझेगा तब तक यह परियोजना अधर में लटकी रहेगी। यह विवाद कब तक चलेगा कुछ नही कहा जा सकता। सिंचाई विभाग के ईई टीसी वर्मा का कहना है कि कोर्ट में सुनवाई होने व ट्रिब्यूनल अंतिम निर्णय के बाद ही काम को शुरू कराना है। कि नहीं, इस पर फैसला हो पाएगा। फिलहाल शासन स्तर पर संबंधित अफसर फैसले आने का इंतजार कर रहे है।












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