Jashpur: रात भर कुंए में डूबा रहा नन्हा हाथी, वन विभाग ने किया रेस्क्यू , अब झुंड से मिलाने में लगे अधिकारी
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में एक नन्हा हाथी कुएं में गिर गया था। रात भर पानी में डूबे रहने के बाद सुबह वन विभाग की टीम ने उसका सफल रेस्क्यू किया। जिसके बाद अब उसे झुंड से मिलाने की तैयारी की जा रही है।

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में बेबी एलिफेंट का सफल रेस्क्यू आज वन विभाग की टीम ने किया। यह नन्हा हाथी मंगलवार की रात पानी से भरे कुएं में डूबा रहा। जिसे रात में रेस्क्यू नहीं किया जा सका लेकिन सुबह होते ही वन विभाग टीम मौके पर पहुंची। इसके बाद जेसीबी की मदद से हाथी के बच्चे को कुएं से बाहर निकाला गया।

अपने झुंड से बिछड़ गया था नन्हा हाथी
दरअसल जशपुर के पत्थलगांव ब्लाक के कटँगजोर गांव में नन्हा हाथी अपनी झुंड से बिछड़ गया। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में 12 हाथियों का दल घुस आया था। हाथियों के दल ने काफी उत्पात मचाया , घरों और फसलों को बर्बाद किया। जिसके बाद ग्रामीणों ने उन्हें खदेड़ा तो भागने के दौरान बच्चा हाथी कुएं में जा गिरा था। ये सभी हाथी लैलूंगा की ओर से कटंगजोर गांव तक पहुंचे थे।
कुंए में गिरे हाथी को रात में नहीं किया जा सका रेस्क्यू
ग्रामीणों ने बताया कि जब हाथी रात भर गांव में उत्पात मचा रहे थे। इस पर ग्रामीणों ने ढोल पटाखे और मशाल लेकर हाथियों के दल को खदेड़ने लगे। इस दौरान भागते समय हाथी का एक बच्चा कछार गांव स्थित पानी से भरे कुएं में जा गिरा। इसके बाद स्थानीय ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। लेकिन हाथी के बच्चे को रात में नहीं निकाला जा सका, जिसके कारण रात भर बच्चा कुएं में डूबा रहा।
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हाथी के बच्चे को दल से मिलाने का प्रयास
रेस्क्यू टीम ने बताया कि काफी मशक्कत के बाद बच्चे को बाहर निकाला गया, कुएं से बाहर निकलते ही भागने लगा जिसके एक ग्रामीण भी घायल हो गया। रेस्क्यू के बाद अब बिछड़े हाथी को उसके दल से मिलाने की कोशिश की जा रही है नहीं नन्हे हाथी पर वन विभाग नजर बनाए हुए है। वन विभाग के अनुसार दल के बाकी 11 हाथियों का दल रायगढ़ जिले बाकारुमा रेंज की ओर जा चुका है। वहीं कुंए से निकाले गए हाथी के बच्चे को वन विभाग ने लुड़ेग के झंडाघाट की ओर जंगल मे भेजा है।

इससे पहले भी नन्हे हाथी की बचाई थी जान
इसी तरह 13 सितम्बर को एक नन्हा हाथी अपने झुंड से बिछड़ गया था। जिसके बाद वह बीमार हो गया था। जिसे ग्राम समड़मा के पंचायत भवन में रखा गया था। जिसके बाद वन मंत्री मोहम्मद अकबर के निर्देश पर तपकरा रेस्ट हाउस में डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया। वन विभाग ने उसे उसके दल से मिलाने की कोशिश की लेकिन वह अपने दल से नहीं मिल पाया। जिसके बाद उसे बलरामपुर जिले के हाथी संरक्षण केंद्र भेजा गया।












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