CG: आलाकमान ने छीना भूपेश बघेल से पावर? छत्तीसगढ़ में टी एस सिंहदेव की अगुवाई में लड़ेगी अगला चुनाव कांग्रेस
Chhattisgarh Poltics: कांग्रेस पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से किनारा कर सकती है। छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत का बयान राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ लाने वाला है। उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के नेतृत्व में लड़े जाने की बात कही है। इससे न केवल कांग्रेस पार्टी के भीतर की गुटीय राजनीति को एक बार फिर सामने आ गई है, बल्कि भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव के बीच के मतभेदों को फिर हवा मिल गई है।
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के सर्वमान्य नेता और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने अपने बयान में कहा है कि कांग्रेस 2028 में टीएस सिंहदेव की अगुवाई में चुनाव लड़ेगी। यह दर्शाता है कि पार्टी भीतर के नेतृत्व परिवर्तन पर विचार कर रही है। महंत ने यह भी कहा कि सामूहिक नेतृत्व के तहत चुनाव लड़ा जाएगा, जिससे पार्टी एकजुटता का संदेश देने का प्रयास कर रही है। इस बयान से स्पष्ट रूप से यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस पार्टी आगामी चुनावों में टीएस सिंहदेव को एक प्रमुख चेहरे के रूप में प्रस्तुत कर सकती है। सिंहदेव का नाम पहले भी सत्ता संघर्ष के केंद्र में रहा है, और अब यह संभावनाएँ बढ़ रही हैं कि उनका समय आ सकता है।

कांग्रेस क्यों कर रही है बघेल से किनारा
भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस ने पिछले चुनावों में राज्य में जीत हासिल की थी, लेकिन उनके कार्यकाल के दौरान आए कई विवादों और आलोचनाओं ने उनकी स्थिति को कमजोर किया। कांग्रेस पार्टी के भीतर कुछ समय से यह संकेत मिल रहे थे कि बघेल के नेतृत्व में पार्टी को लेकर असंतोष बढ़ रहा है, खासकर उनके द्वारा उठाए गए निर्णयों और सरकार के कामकाज को लेकर। डॉ. महंत का बयान यह साबित करता है कि कांग्रेस पार्टी अब बघेल के नेतृत्व को लेकर कोई निश्चित स्थिति अपनाने में संकोच कर रही है और संभावित नेतृत्व में बदलाव पर विचार कर रही है।
इसके अलावा भूपेश बघेल पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप भी बड़ा कारण है। भूपेश बघेल पर मुख्यमंत्री रहते हुए शराब घोटाले और महादेव एप घोटाले में शामिल होने के आरोप लगे हैं। जिसकी जांच केंद्रीय एजेंसियां कर रही हैं।
सिंहदेव की वापसी के कारण
छत्तीसगढ़ में 2018 में विधानसभा चुनाव हुए थे। इस चुनाव में घोषणा पत्र तैयार करने की जिम्मेदारी टीएस सिंहदेव को सौंपी गई थी। 2018 में कांग्रेस ने राज्य में बंपर जीत दर्ज की थी। इस जीत का श्रेय कांग्रेस के घोषणा पत्र और टीएस सिंहदेव को दिया गया था। हालांकि तब टीएस सिंहदेव राज्य के सीएम नहीं बन पाए थे। कांग्रेस ने तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया था। अब टीएस सिंहदेव को जिम्मेदारी सौंप कर कांग्रेस सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है।
नहीं बने थे सीएम ,लेकिन रहे बरकरार
छत्तीसगढ़ में 2018 में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली थी। उस दौरान भी सीएम की रेस में टीएस सिंहदेव का नाम था। 2018 के विधानसभा चुनाव में टीएस सिंहदेव घोषणा पत्र समिति के प्रमुख थे। उनके ही नेतृत्व में कांग्रेस ने घोषणा पत्र बनाया था। इसके बाद राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी थी। हालांकि कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व ने टीएस सिंहदेव की जगह तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल को राज्य का सीएम चुना था।
कांग्रेस ने साल 2018 में सरकार बनाई थी। उसके बाद से लगातार टीएस सिंह को सीएम बनाने की मांग की जाती रही। बार-बार कहा गया कि आलाकमान ने ढाई-ढाई साल के फार्मूले के तहत भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री बनाया था, लेकिन ढाई साल बाद भी उन्हें नहीं हटाया गया। इसके बाद महाराज के समर्थकों ने उन्हें सीएम बनाने की मांग और भी तेज कर दी, लेकिन आलाकमान इस बात को नजरअंदाज करता रहा।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरणसिंह देव ने किया कटाक्ष
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरणसिंह देव ने प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत के उस बयान पर कटाक्ष किया है, जिसमें महंत ने अगला विधानसभा चुनाव पूर्व उप मुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव के नेतृत्व में लड़ने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि महंत का यह बयान कांग्रेस के भीतर चल रहे सत्ता-संघर्ष और गुटीय घमासान का ही परिचायक है।
किरणसिंह देव ने कहा कि भाजपा इस बात को बार-बार कहती आई है कि कांग्रेस में लड़ाई केवल सत्ता की है। कांग्रेस का इतिहास रहा है कि सत्ता की प्राप्ति के लिए वह कुछ भी कर जाती है। कांग्रेस के लोग 5 साल कुर्सी की लड़ाई में लगे रहे, लूट की लड़ाई में लगे रहे कि कौन ज्यादा लूट सकता है? आज इस बात को महंत ने प्रमाणित भी कर दिया कि जिस प्रकार की खेमेबाजी, गुटबाजी कांग्रेस में नजर आ रही है कि कांग्रेस के लोगों में केवल सत्ता के लिए ही बड़ी लड़ाई चल रही है, जनता की सेवा उनकी प्राथमिकता है ही नहीं। यह केवल लूट करते हैं, लूटे गए जन-धन में अपनी हिस्सेदारी चाहते हैं।
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