छत्तीसगढ़: जान हथेली पर लेकर चले विकास की राह गढ़ने, माओवादियों के गढ़ में घुसकर सड़क बनाएंगे हमारे जवान !
बस्तर, 06 जून। छत्तीसगढ़ बीते दो दशक से नक्सलवाद का दंश झेल रहा है। प्रदेश के कई इलाकों में विकास तो काफी हुआ है,लेकिन माओवादियों के आतंक के चलते बस्तर संभाग के कुछ हिस्सों में आज भी सड़क नहीं पहुंच सकी है,लेकिन अब तस्वीर बदलने लगी है। मिली जानकारी के मुताबिक धुर नक्सल प्रभावित दक्षिण बस्तर के घने जंगलों के बीच से होकर गुजरने वाले कच्चे रास्तों पक्की सड़क बनाने का काम चल रहा है। यहां सड़क बनना खतरों से खाली नहीं है, क्योंकि इलाके में माओवादियों की मौजूदगी हमेशा बानी रहती है।

जवानों को नहीं जाना पड़ेगा तेलंगाना
मिली जानकारी के मुताबिक 10 जून से शुरू से दक्षिण बस्तर में कोंटा से गोलापल्ली तक 42 किमी की सड़क का काम शुरू होने वाला है, जिसपर काम बीते 40 सालों से रुका हुआ है। बताया जा रहा है कि सुरक्षबलों और पुलिस के जवानों को इस इलाके के गोलापल्ली थाने तक पहुंचने के लिए तेलंगाना में भद्राचलम जाकर मरईगुड़ा होते हुए 125 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है।
इस रोड में बन जाने के बाद छत्तीसगढ़ के जवानों को अब तेलंगाना के रास्ते से होते हुए थाने नहीं जाना पड़ेगा। इसके अलावा इस इलाके में पढ़ने वाले गांव शहरों से जुड़ जायेंगे। सीआरपीएफ के डीआईजी योज्ञान सिंह ने बताया कि उनकी टीम जंगलों के अंदर सड़क बनाने पर फोकस है, क्योंकि इनसे विकास के मार्ग खुलेंगे और नक्सली भी बैक फुट पर चले जायेंगे ।

नक्सलियों में गढ़ में बन रही है सड़क
जिस इलाके में सड़क का विस्तार होना है,वह नक्सलियों का गढ़ माना जाता है। इस इलाके मे कई बार सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हो चुकी है। केंद्र सरकार ने साल 2010 में दक्षिण बस्तर के इस इलाके में सड़क निर्माण के लिए फंड जारी कर दिया था। इस दौरान सड़क निर्माण के लिए 17 बार टेंडर किया गया,लेकिन माओवादियों के डर से कोई भी ठेकदार सड़क निर्माण नहीं करवा पाया। मिली जानकारी के मुताबिक इसी बेल्ट में नक्सलियों का शक्ति केंद्र है, नक्सलियों के एक बड़ी बटालियन इसी इलाके से संचालित होती है,क्योंकि छत्तीसगढ़ का बड़ा नक्सल कमांडर हिड़मा इसी क्षेत्र में सक्रिय है।

कच्ची सड़कों पर डाली जा रही मिट्टी,आगे होगा डामरीकरण
पुलिस विभाग के अधिकारी बताते हैं कि कोंटा से गोलापल्ली की दूरी 42 किलोमीटर है। फ़िलहाल यहां 6 किलोमीटर की सड़क बन गई है ,आगे 42 किलोमीटर तक केवल एक थाना और फोर्स का एक कैंप है। सरकार ने इस बार इस सड़क को पूरा करवाने के लिए तीन ठेकेदारों ने काम लिया है। बताया जा रहा है कि इस सड़क के निर्माण में करीब 118 करोड़ की लागत आएगी। वर्तमान में जंगल के बीच कच्ची सड़क पर मिट्टी बिछाने का काम चल रहा है। उसपर शीघ्र ही मुरुम, गिट्टी बिछाकर डामरीकरण शुरू किया जाएगा।

6 हजार हथियारबंद जवानों की निगरानी में बनेगी सड़क
इस सड़क के निर्माण में करीब 6 हजार सशस्त्र जवानों की ड्यूटी लगाई जाएगी, जिनमें बड़ी तादाद में ऐसे सरेंडर नक्सली हैं ,जिन्हे पुलिस विभाग में नौकरी दे दी गई है। इस सड़कनिर्माण से कोंटा, गोलापल्ली, मरईगुड़ा और आसपास के करीब 30 गांवों के 25 हजार लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल पायेगी।
गौरतलब है कि 22 साल पूर्व जब छत्तीसगढ़ बना, उसी समय यहां सड़क बनाने का प्रस्ताव होने के बावजूद काम शुरू नहीं हुआ था ।वर्ष 2005 में सलवा जुडूम आंदोलन शुरू हने के बाद इलाके में लोगों आवाजाही बंद हो गई थी, क्योंकि यह इलाका नक्सलियों का कोर एरिया था।
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