शतरंज ओलंपियाड की मशाल पहुंची छत्तीसगढ़, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किया स्वागत
। भारत में आयोजित हो रहे 44वें शतरंज ओलंपियाड की मशाल का शनिवार को रायपुर पहुंची,जहां मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री पटेल सहित अनेक खेल संघों, खिलाड़ियों, स्कूली बच्चों और जनप्रतिनिधियों ने जोर
रायपुर. 16 जुलाई। भारत में आयोजित हो रहे 44वें शतरंज ओलंपियाड की मशाल का शनिवार को रायपुर पहुंची,जहां मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री उमेश पटेल सहित अनेक खेल संघों, खिलाड़ियों, स्कूली बच्चों और जनप्रतिनिधियों ने जोरदार स्वागत किया। अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित ग्रैंड मास्टर प्रवीण थिप्से भुवनेश्वर से यह मशाल लेकर रायपुर पहुंचे। उन्होंने मुख्यमंत्री को यह मशाल सौंपा। दोनों ने मंच पर शतरंज भी खेला।

शतरंज ओलंपियाड की मशाल का स्वागत और अभिनंदन करते हुए सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि यह बहुत गौरव का विषय है कि वर्ल्ड चेस फेडरेशन ने पहली बार ओलंपिक मशाल की तर्ज पर चेस मशाल रिले की परमिशन दी है। भविष्य में चेस ओलंपियाड का आयोजन भले ही किसी भी मुल्क में हो, उसके मशाल की शुरूआत भारत से ही होगी। रायपुर के साइंस कॉलेज ऑडिटोरियम में आयोजित स्वागत कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम भूपेश ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि इस मर्तबा चेस ओलंपियाड की मेजबानी हमारा देश कर रहा है। मैं तमिलनाडु के सीएम स्टालिन को विशेष तौर पर बधाई देता हूं कि उन्होंने इस गौरवपूर्ण आयोजन की मेजबानी के लिए अपने प्रदेश की ओर से 75 करोड़ रुपए की गारंटी और विश्व स्तरीय अधोसंरचना उपलब्ध कराई है। तमिलनाडु का महाबलीपुरम 188 देशों के दो हजार से ज्यादा खिलाडियों के दांव-पेंच तथा शह-मात के दिमागी कौशल का गवाह बनेगा।
सीएम बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अखिल भारतीय शतरंज महासंघ की पहल पर 22 स्कूलों में शतरंज को बढ़ावा देने का कार्य शुरू किया गया है। बालोद जिला 'चेस इन स्कूल' पायलेट प्रोजेक्ट शुरू करने वाला देश का प्रथम जिला बन गया है। दंतेवाड़ा के आस्था स्कूल में भी शतरंज का प्रशिक्षण शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी स्कूलों में शतरंज खेलने की व्यवस्था हो ताकि बच्चों को बौद्धिक अभ्यास में मदद मिले। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को शुभकामना देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की नई प्रतिभाएं न सिर्फ किरण अग्रवाल के कीर्तिमान को दोहराएं, बल्कि उससे भी आगे बढ़ें। यहां से अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी बड़ी तादाद में निकलें और दुनिया में प्रदेश और देश का नाम रोशन करें। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस आयोजन में हिस्सा ले रहे खिलाड़ियों को देखकर बाकि पालक भी अपने बच्चों को प्रोत्साहित करेंगे कि वह शतरंज तथा अन्य खेलों में रूचि लें।
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