बालोद: तांदुला हुआ लबालब, मनोरम दृश्य देखने पहुंचे रहे पर्यटक, रबी फसल के लिए किसानों की चिंता दूर

दुर्ग संभाग के सबसे बड़े और 110 साल पुराने तांदुला जलाशय अब सेफ्टी वॉल से ओवरफ्लो होने लगा है। जल संसाधन विभाग के अनुसार 1912 से लेकर अब तक 28वीं बार ऐसी सुखद स्थिति बनी।

बालोद, 17 अगस्त। छत्तीसगढ़ में इस साल बारिश ने के सालों के रिकार्ड तोड़ दिए हैं। दुर्ग संभाग में पर मानसून की 80 प्रतिशत बारिश दर्ज की जा चुकी है। जिससे सभी बांध लबालब हो चुके है। दुर्ग संभाग के सबसे बड़े और 110 साल पुराने तांदुला जलाशय अब सेफ्टी वॉल से ओवरफ्लो होने लगा है। जल संसाधन विभाग के अनुसार 1912 से लेकर अब तक 28वीं बार ऐसी सुखद स्थिति बनी। प्राकृतिक रूप से विहंगम तांदुला जलाशय देखने लोगों व पर्यटकों की भीड़ उमड़ पड़ी है।

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चार साल में एक बार दिखता है यह नजारा
दरअसल तांदुला जलाशय को देखने के लिए देशभर से सैलानी पहुंचते हैं। पिछले 48 घंटों से हो रही भारी बारिश के चलते यह जलाशय उफान पर है। यहां के सेफ्टी वॉल से ओवरफ्लो होने लगा है। जिससे देखने में ये बेहद खूबसूरत लग रहा है। इससे पहले 28 अगस्त 2018 को तांदुला जलाशय ओवरफ्लो हुआ था। इस बार बांध में 38.50 फीट पानी भरने के बाद पहली बार ऐसी स्थिति बनी। जिसकी पुष्टि मंगलवार को सिंचाई विभाग ने की है। विभाग के अनुसार इस बार डैम 15 अगस्त को ओवरफ्लो हुआ। हर 4-5 साल में तांदुला डैम छलकता आ रहा है। इसके पहले यह स्थिति 29 अगस्त 2018 को बनी थी। इस लिहाज से 4 साल बाद जलाशय का पानी छलका है। मंगलवार को बांध के रपटा से लगभग डेढ़ फीट पानी ऊपर बह रहा था।

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77 हजार हेक्टेयर रकबे में की जा सकती है सिंचाई
सिंचाई विभाग के अनुसार तांदुला डैम में वर्तमान स्थिति के अनुसार अगले 2 साल तक तीन जिलों के लोगों को पेयजल का संकट नहीं होगा। डैम के पानी को जल आवर्धन योजना के तहत फिल्टर कर दुर्ग, भिलाई, बेमेतरा, बालोद जैसे शहरों में सप्लाई की जाती है। वहीं खरीफ सीजन में 3 जिले में लगभग 77 हजार हेक्टेयर रकबा के सिंचाई के लिए डैम में पानी उपलब्ध है। हर साल गर्मी के दिनों में यहां से निस्तारित तालाबों को भरने के लिए पानी छोड़ा जाता है। फिलहाल उलट से निकल रहा पानी दुर्ग के शिवनाथ नदी में जा रहा है। इसके परिणाम स्वरूप दुर्ग के शहरी इलाके पुलगांव में जलभराव की स्थिति बन रही है।

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दुर्ग संभाग को होती है पेयजल की आपूर्ति
दुर्ग संभाग के लिए तांदुला व खरखरा जलाशय से साल भर पेयजल व सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति की जाती है। इसके सूखने से किसानों की रबी फसल की खेती प्रभावित होती है। इस जलाशय से एशिया से सबसे बड़े इस्पात संयंत्र भिलाई स्टील प्लांट को चलाने पानी सप्लाई की जाती है। इसके साथ ही भिलाई के टाउनशिप के लोग पेयजल के लिए खरखरा व तांदुला बांध पर निर्भर हैं।

tandula dam balod

छत्तीसगढ़ की पहली नदी परियोजना

जल संसाधन विभाग के अनुसार तांदुला जलाशय तांदुला नदी और सूखानाला के संगम पर बालोद जिले में स्थित छत्तीसगढ़ की पहली नदी परियोजना है। इसका निर्माण ब्रिटिश अभियंता एडम स्मिथ के मार्गदर्शन में साल 1905 से 1912 के बीच पूरा हुआ। 1912 में तांदुला जलाशय का निर्माण हुआ। तांदुला बांध की अधिकतम ऊंचाई 24.53 मीटर और लंबाई 2906.43 मीटर है। बांध के दो सहायक बांधों की ऊंचाई 6.61 मीटर और 2.83 मीटर है। वहीं लंबाई 668.42 और 426.70 मीटर है। जलाशय से आस-पास के करीब 23,000 हेक्टेयर कृषि जमीन की सिंचाई की जाती है।

तांदुला जलाशय देखने पर्यटकों की लगी भीड़
जल संसाधन विभाग के ईई टीसी वर्मा ने बताया कि बालोद जिले में अब तक 1028 मिमी औशत बारिश हो चुकी है। तांदुला समेत बालोद के खरखरा बांध फूल हो चुका है, इसके पहले 14 जुलाई को 21 फीट पानी भरने के बाद मटियामोती डैम भी भर चुका है। ये बालोद जिले के लिए अच्छी खबर है। यूं तो साल भर तांदुला जलाशय देखने वालों की भीड़ होती है लेकिन बालोद जिले के तांदुला जलाशय में इस बार पर्यटकों की भी देखी जा रही है, अन्य जिलों के लोग यहां छलकते हुए बांध का विहंगम दृश्य देखने पहुंच रहें है। जिसके चलते जिला प्रशासन व पुलिस विभाग द्वारा यहां बैरिकेटिंग व सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए हैं।

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