पन्ना की राजमाता को मिली जमानत, जेल से बाहर आईं, जुगल किशोर मंदिर में किया था हंगामा
पन्ना के विश्व प्रसिद्ध जुगल किशोर मंदिर में जन्माष्टमी की रात में हंगामा करने, गर्भगृह में घुसकर पंडित से चंवर छीनने व आरती को बुझाने के प्रयास में राजमाता जीतेश्वरी देवी को जेल भेज दिया गया था। उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई हैं। रविवार को वे जेल से बाहर आईं।

पन्ना के श्री जुगल किशोरजी मंदिर में पन्ना के पूर्व राजघराने की राजमाता जीतेश्वरी देवी द्वारा हंगामा किया गया था। इस मामले में मंदिर के मुसद्दी के द्वारा की गई रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर लिया गया था। मामले में राजमाता को गिरफ्तार कर पुलिस ने सीजीएम न्यायालय में पेश किया था जहां से उनकी जमानत निरस्त करते हुए उन्हें जेल भेज दिया गया था। शनिवार देर शाम को डीजे कोर्ट ने उनकी जमानत अर्जी स्वीकार कर जमानत दे दी थी, लेकिन अंधेरा होने के बाद उन्हें जेल से रिहा नहीं किया गया था। वे रविवार को जेल से बाहर आ सकीं।
हम अपने पाठकों को बता दें कि जन्माष्टमी के दिन रात में पन्ना के प्रसिद्ध श्री देव जुगल किशोरजी मंदिर में भगवान के जन्मोत्सव व आरती के कार्यक्रम चल रहे थे। आरती के दौरान पूर्व राजघराने की राजमाता जीतेश्वरी देवी अचानक से उठी और गर्भगृह में पहुंचकर पंडित से चंवर छीनकर डुलाने लगीं। मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित रहता है, जिस कारण पुरोहितों ने विरोध किया। इसी दौरान पुजारी आरती कर रहे थे, जिसे जीतेश्वरी देवी के हंगामे के दौरान बीच में रोकना पड़ा। इतना ही नहीं महारानी जीतेश्वरी देवी ने आरती को बुझाने का प्रयास भी किया, जिसके बाद धक्का मुक्की के दौरान वे जमीन पर गिर गईंं। मौके पर मौजूद श्रद्धालुओं ने विरोध भी किया। पुलिस ने बमुश्किल स्थिति को संभाला और जीतेश्वरी देवी को मंदिर से बाहर किया। बता दें कि उनकी जिद व अड़ियल रवैये के बाद उन्हें महिला पुलिस ने धकियाते हुए बाहर किया था। दूसरी दिन एफआईआर के बाद उन्हें दोबारा मंदिर जाते समय बीच बाजार से गिरफ्तार कर लिया गया था। इसी मामले में कोर्ट ने उन्हें जेल भेज दिया था।
पन्ना के पूर्व नरेश के वंशन का कहना, हमारे साथ अन्याय हुआ
इस मामले में पन्ना राजघराने के पूर्व नरेश छत्रसाल द्वितीय ने एक वीडियो जारी करते हुए कहा है कि हमारे साथ अन्याय हुआ है। लोगों ने एक तरफ कहानी सुनी है। हमारी परंपरा को भंग करने का षड्यंत्र रचा गया है। पहले तो मुझे मंदिर के अंदर जाने के लिए पुलिस प्रशासन ने रोका। फिर मेरी मांसाब को चंबर डुलाते के दौरान मंदिर से घसीटा गया। श्री कृष्ण भगवान के सामने राजमाता, एक नारी को घसीटा गया है। यह बहुत गलत हुआ है। महाराजा छत्रसाल द्वितीय ने कहा कि पहले तो पुलिस प्रशासन ने मुझे मंदिर के अंदर जाने से रोक दिया। इसका जानकारी जैसे ही राजमाता को हुई तो वह मंदिर गई और परंपरा का निर्वहन करने लगी। उन्हें नहीं पता था कि चंबर कैसे डुलाते हैं। मंदिर में कहां जाना होता है, लेकिन मंदिर में पुजारी ने एक नारी को घसीटा गया है। अगर मुझे बाहर पुलिस प्रशासन द्वारा रोका न जाता तो यह सब घटना घटित नहीं होती।












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