क्या टीसीएस में छटनी को रोक पाएंगे पीएम नरेंद्र मोदी?
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रमुख आईटी कंपनी टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (टीसीएस) में हो रही छटनी के खिलाफ कोई कदम उठाएंगे ? कम से कम टीसीएस के पेशेवर उनसे यही चाहते हैं। उनकी चाहत है कि प्रधानमंत्री मोदी मैनेजमेंट पर दबाव बनाए ताकि वह बड़े पैमाने पर पेशेवरों की छटनी के इरादे को टाल दे।

जानकारी मिली है कि टीसीएस मैनजमेंट अपने करीब तीन फीसद पेशेवरों को नौकरी से बाहर करने के मूड में है। टीसीएस में कुल जमा सवा तीन लाख से कुछ कम पेशेवर देश और देश से बाहर काम करते हैं। राजस्व के लिहाज से यह देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी है।
तनाव का माहौल
जानकारों का कहना है कि कंपनी मैनेजमेंट लाभ के बावजूद हजारों पेशेवरों से कह रहा है कि वे इस्तीफा दे दें। राजधानी की पीटीआई बिल्डिंग स्थित टीसीएस के दफ्तर में इन दिनों माहौल बेहद तनावपूर्ण है। इधर काम कर रहे बहुत से पेशेवरों से कहा गया है कि वे इस्तीफा दे दें। उधर, पेशेवरों का कहना है कि कंपनी मैनेजमेंट सीनियर पेशेवरों को हटाकर नए पेशेवरों को रखना चाहती है।
कई शहरों में विरोध
टीसीएस में पेशेवरों को बाहर का रास्ता दिखाए जाने के विरोध में हैदराबाद,चैन्नै,पुणे और कोच्चि में विरोध हो रहा है। इन्हीं पेशेवरों ने मिलकर प्रधानमंत्री मोदी को एक ज्ञापन सौंपा है ताकि उनकी नौकरी बच जाए। इसमें तीन हजार पेशेवरों ने हस्ताक्षर किए हैं।
लेबर कमिश्नर को ज्ञापन
जानकारी के मुताबिक, टीसीएस ने हैदराबाद, बैंगलुरू, नई दिल्ली,पुणे के अपने सैकड़ों पेशेवरों से इस्तीफा दे देने के लिए कहा है। जानकारी के मुताबिक, बैंगलुरू के बहुत से टीसीएस के पेशेवर प्रधानमंत्री को ज्ञापन देने के साथ-साथ लेबर कमिश्नर से भी मिल रहे हैं।
जानकारी मिली है कि टीसीएस जनवरी-मार्च तिमाही के दौरान बड़े पैमाने पर छटनी का इरादा रखती है।












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