जीएसटी पर मचे बवाल पर राज्य सरकारें चुप क्यों?

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस जीएसटी विधेयक के लिये पूरी जोर-आजमाइश कर रहे हैं, उस पर देश के व्यापारी भी उनके साथ खड़े हो गये हैं। वर्तमान में संसद और देश में चल रहे जीएसटी बवाल पर राज्य सरकारों की चुप्पी पर कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने सवाल उठाते हुए कहा है की राज्यों के वित्त मंत्रियों की उच्चाधिकार प्राप्त समिति में जीएसटी के स्वरुप को लेकर हुई सहमति के बिन्दुओं के आधार पर ही केंद्र सरकार द्वारा संसद में जीएसटी विधेयक प्रस्तुत किया गया था।

Narendra Modi

ऐसे समय में जब यह मुद्दा सारे देश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और जीएसटी विधेयक संसद में लंबित है। ऐसे में राज्य सरकारें जिन्होंने इस विधेयक को सहमति दी थी वो चुप क्यों हैं और क्यों नहीं राजनैतिक दलों को इस विधेयक को पारित कराने के लिए तैयार नहीं कर रही। कैट ने इस विषय पर देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आज एक पात्र भेजकर आग्रह किया है की वो अपनी चुप्पी को तोड़ते हुए उन सभी दलों को समर्थन के लिए राजी करें को जीएसटी का विरोध कर रहे हैं।

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी.सी. भरतिया ने कहा की जीएसटी विधेयक को संसद में प्रस्तुत करने से पूर्व एक लम्बे समय तक राज्यों के वित्तमंत्रियों की समिति ने जीएसटी के स्वरुप और अन्य जुड़े विषयों पर गम्भीरतापूर्वक विचार किया और एक सहमति बनायीं गयी, जिसके आधार पर जीएसटी का विधेयक संसद में प्रस्तुत किया गया। इस नाते से मुख्य रूप से राज्य सरकारों का यह दायित्व बनता है की वो सभी राजनैतिक दलों को समर्थन देने के लिए तैयार करें क्योंकि विधेयक उनकी सहमति के आधार पर बना है।

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कैट के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खण्डेलवाल ने कहा की देश के अनेक प्रमुख दलों की सरकारें विभिन्न राज्यों में हैं। यह बहुत ही अजीब बात है की उसी दल की राज्य सरकार तो वित्तमंत्रियों की समिति में बानी सहमति का हिस्सा रही है लेकिन उसी दल का केंद्रीय नेतृत्व समर्थन देने के मामले में उहापोह की हालत में है।

खंडेलवाल के अनुसार वर्तामन स्तिथि में राज्य सरकारों को आगे आकर अपने केंद्रीय नेतृत्व को समर्थन देने के लिए तैयार करना चाहिए। संसद में जीएसटी विधेयक को पारित किया जाए जिससे संविधान में आवश्यक संशोधन हो सकें और जिसके बाद सेंट्रल जीएसटी, इंटीग्रेटेड जीएसटी और राज्य जीएसटी के विधेयक पृथक रूप से पारित होने आवश्यक है और वो समय सही होगा जब इस मुद्दे से सम्बंधित विषयों को इन कानूनों में जोड़कर देश में एक सरलीकृत कर प्रणाली को लागू किया जाए।

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