New or Old Tax Regime: अपनी सैलरी के हिसाब से जानिए कौन सी टैक्स व्यवस्था बेहतर
नई टैक्स व्यवस्था या पुरानी टैक्स व्यवस्था, इन दोनों में से कौन सी बेहतर है, इसको लेकर अक्सर सवाल उठता है। लोगों के अंदर यह कंफ्यूजन हमेशा रहता है कि दोनों में से किसे चुना जाए। आखिर दोनों में से कौन सी व्यवस्था बेहतर है।
दरअसल केंद्र सरकार ने नई टैक्स व्यवस्था को डिफॉल्ट टैक्स सिस्टम बना दिया है। यानि अगर आप खुद से पुरानी टैक्स व्यवस्था नहीं चुनते हैं तो अपने आप नई टैक्स व्यवस्था आपके लिए सेलेक्ट हो जाएगी।

पहले नई टैक्स व्यवस्था वैकल्पिक थी, यानि जब आप खुद से इसका चुनाव करेंगे तभी यह आप पर लागू होगी। इसे 1 अप्रैल 2020 में शुरू किया गया था।
तीन साल तक इसके संचालन के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2023 में बजट घोषणा के दौरान कहा था कि नई टैक्स व्यवस्था उन करदाताओं के लिए डिफॉल्ट टैक्स व्यवस्था बन जाएगी जिन्होंने नए वित्त वर्ष में किसी एक व्यवस्था को नहीं चुना है।
एक सवाल यह उठता है कि आखिर आप कितनी बार टैक्स व्यवस्था में बदलाव कर सकते हैं। कोई भी करदाता सालाना आधार पर अपनी टैक्स नीति में परिवर्तन कर सकता है। लेकिन अगर आप किसी बिजनेस या पेशे से आय हासिल कर रहे हैं और आपने एक बार नई टैक्स रिजीम को चुन लिया है तो दूसरी बार वह वापस पुरानी टैक्स रिजीम को नहीं चुन सकते हैं।
पुरानी टैक्स नीति के फायदे
पुरानी टैक्स नीति का बड़ा फायदा यह है कि यह आपको कई तरह के लाभ देती है। कई तरह के टैक्स में छूट मिलती है। एचआरए, एलटीए, सेक्श 80सी के तहत मिलने वाली छूट, 80 डी के तहत स्वास्थ्य बीमा के तहत मिलने वाली छूट से आप टैक्स बचा सकते हैं। ऐसे में पुरानी कर नीति अलग-अलग तरह के निवेश को बढ़ावा देती है। इसकी मदद से लॉन्ग टर्म में करदाता अच्छा फंड इकट्ठा करते हैं।
नई टैक्स नीति के फायदे
वहीं नई टैक्स नीति की बात करें तो इसमे अलग-अलग तरह की छूट और कटौती नहीं मिलती है। इसमे एक निर्धारित टैक्स देना होता है और आपको अलग-अलग निवेश और बचत की माथापच्ची नहीं करनी होती है। इसमे एनपीएस के तहत कंपनी और कर्मचारी के कंट्रीब्यूशन जैसे विशेष मामलों में छूट मिलती है, बाकी में नहीं मिलती है।
ऐसे में अगर आपकी सैलरी 80 हजार रुपए महीना है तो आपको कितना टैक्स देना होगा और कौन सी टैक्स व्यवस्था आपके लिए बेहतर होगी, आइए समझते हैं इस विशेष उदाहरण से।
अगर सैलरी 80 हजार रुपए महीना है तो एक साल में आपकी कुल आय 9.6 लाख होगी। इसमे पुरानी और नई टैक्स नीति दोनों में स्टैंडर्ड डिडक्शन 50 हजार रुपए का होता है। नई टैक्स नीति के तहत सकल आय 9.10 लाख होगी, इसपर कुल टैक्स रुपए होगा।
पुरानी में कुल टैक्स
जबकि पुरानी टैक्स नीति में चैप्टर VI-A डिडक्शन 1.5 लाख का होगा, जिसके बाद कुल आय 7.60 लाख रुपए होगी, इसपर टैक्स 67080 रुपए होगा। हालांकि इसमे आप 80 सी के तहत टैक्स की बचत कर सकते हैं, इसका विकल्प आपके पास उपलब्ध होगा।
नई में कुल टैक्स
इस गणित के हिसाब से पुरानी टैक्स नीति के तहत आपको हर वर्ष 67080 रुपए टैक्स देना पड़ता है जिसमे बेसिक कर 64500 रुपए है, सेस 4 फीसदी है। वहीं नई टैक्स नीति के तहत कुल टै्स 48360 रुपए है, जिसमे 46500 बैसिक टैक्स और 4 फीसदी सेस यानि 1860 है।
इस लिहाज से 80 हजार रुपए की सैलरी वालों के लिए नई टैक्स नीति ज्यादा फायदेमंद है। आपको बहुत ज्यादा कैल्कुलेशन भी नहीं करना पड़ेगा। हालांकि आप पुरानी टैक्स नीति को भी चुन सकते हैं, यह विकल्प हमेशा खुला है।












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