हिमाचल की बर्फीली वादियों में सब्जियों की बहार

चौधरी ने आगे बताया कि अब यह घाटी सब्जियों की खेती में काफी आगे निकल चुकी है। चौधरी ने कहा, "यहां किसान अब आलू के बीजों और होप के बजाय फूलगोभी, शिमला मिर्च, बंदगोभी, ब्रोकली, मटर और सलाद जैसी सब्जियां उगाने लगे हैं। इन सब्जियों में उन्हें दोगुना मुनाफा मिल रहा है।"
लाहौल स्पिति के जिला मुख्यालय केलांग में नियुक्त चौधरी ने आईएएनएस को बताया कि इस वर्ष घाटी में 44,240 टन सब्जी का उत्पादन होने की संभावना है। पिछले वर्ष यहां 31,360 टन सब्जी का उत्पादन हुआ था।
कृषि विभाग द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, पिछले 10 वर्षो में आलू की खेती का क्षेत्रफल 2000 हेक्टेयर से घटकर 700 हेक्टेयर रह गया है।
इसी तरह यहां के प्रमुख नकदी फसल होप के उत्पादन में भी काफी कमी आई है। चीन, अमेरिका और जर्मनी से कम गुणवत्ता वाले होप की प्रचुर मात्रा में आपूर्ति किए जाने के कारण बीयर बनाने में मुख्य रूप से इस्तेमाल होने वाली फसल होप के उत्पादन में यह कमी आई है। घाटी में वर्तमान समय में 2,200 हेक्टेयर में सब्जियों की खेती की जाती है।
सिसु गांव में सब्जियों की खेती करने वाले ताराचंद ने बताया कि चीनी ब्रोकली और सलाद की खेती का प्रचलन गांव में बहुत बढ़ गया है। उन्होंने बताया, "इस साल दिल्ली और चंडीगढ़ में मांग अधिक होने के कारण ब्रोकली की अच्छी कीमत मिली। गांव में यह 150 से 200 रुपया प्रति किलोग्राम की दर पर बिका।"
पत्तन गांव के भानु बोध ने बताया कि इस वर्ष शिमला मिर्च और बंदगोभी का उत्पादन आलू के मुकाबले कहीं अधिक हुआ। उन्होंने बताया, "बंदगोभी 20 से 25 रुपया प्रति किलोग्राम की दर से बिकी।"
राज्य के कृषि निदेशक जे. सी. राणा ने बताया कि राज्य में 2012-13 में सब्जियों का उत्पादन बढ़कर 13.7 लाख टन हो गया, जबकि 1990-91 में यह सिर्फ 6.5 लाख टन ही था। राणा ने कहा कि सब्जी उत्पादन, फूलों के उत्पादन की ही तरह राज्य की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार बनकर उभरा है, तथा अगले दो वर्षो में राज्य में सब्जी उत्पादन 16 लाख टन को पार कर सकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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