US Debt Ceiling: आसान भाषा में समझिए क्या है अमेरिकी कर्ज संकट, क्यों हो रही इसकी चर्चा
US Debt Ceiling: अमेरिका में कर्ज संकट लगातार गहरा रहा था, जिसकी वजह से डेट सीलिंग बिल को लाया गया। आखिर क्या है यह कर्ज संकट, क्यों इसकी दुनिया में चर्चा हो रही है।

US Debt Sealing: जिस तरह से अमेरिका के सामने कर्ज का संकट खड़ा उस बीच दुनियाभर में आर्थिक संकट का खतरा मंडरा रहा है। अमेरिका के कर्ज की हालत यह हो गई है कि उसके पास सिर्फ 1 जून तक का ही पैसा बचा है जिससे वह अपने खर्च को चला सकता है। हालात इतने बिगड़े कि अमेरिकी राष्ट्रपति को क्वाड की बैठक को ही रद्द कर दिया और वापस अमेरिका आ गए।
क्यों चर्चा में है मुद्दा
पिछले कुछ दिनों से अमेरिकी कर्ज संकट का मसला लगातार चर्चा में है, हर कोई इसकी बात कर रहा है, लेकिन बहुत से लोग ऐसे हैं जिन्हें यह मुद्दा समझ नहीं आ रहा है। हम आपको आसान भाषा में यह समझाने की कोशिश करेंगे कि आखिर अमेरिका का कर्ज संकट है क्या और कैसे यह दुनियाभर के देशों को प्रभावित कर सकता है।
आखिर कैसे खत्म हो गया अमेरिका का पैसा
अमेरिका की अर्थव्यवस्था की बात करें तो यह 23 ट्रिलियन डॉलर की है। इसे ऐसे समझा जा सकता है कि भारत की अर्थव्यवस्था 3 ट्रिलियन डॉलर की है। ऐसे में भारत की अर्थव्यवस्था की तुलना में अमेरिका 8 गुना बड़ा है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर क्यों 23 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था होने के बाद भी अमेरिका के पास कर्ज का संकट है।
अमेरिका पर कर्ज का संकट क्यों मंडरा रहा है तो उसे ऐसे समझते हैं, जो भी सेविंग होती है उससे आय और खर्च को संभालना होता है। लिहाजा जब भी आय कम हो और खर्च अधिक हो तो कर्ज का संकट खड़ा होगा। हो सकता है कि आप लाखों में कमाते हैं, लेकिन अगर आप खर्च करोड़ में करेंगे तो हमेशा कर्ज के तले दबे रहेंगे और आपकी सेविंग खत्म होगी।
आय से अधिक खर्च से बढ़ा कर्ज
किसी भी देश की अर्थव्यवस्था साधारण तरीके से चलती है। अमेरिका राजकोषीय घाटे पर चलता है, यानि अमेरिका की सरकार टैक्स आदि से जितना भी पैसा कमाती है उससे कहीं अधिक खर्च कर देती है। यह अतिरिक्त पैसा लोन के जरिए लिया जाता है और खर्च किया जाता है। सरकार ऐसा इसलिए करती है ताकि अर्थव्यवस्था को संतुलित किया जा सका।
विकास-महंगाई में संतुलन की चुनौती
किसी भी सरकार के सामने विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। जब विकास पर ध्यान दिया जाता है तो महंगाई बढ़ती है और जब महंगाई को नियंत्रित करने की कोशिश की जाती है तो विकास प्रभावित होता है।
अमेरिका की व्यवस्था को समझिए
अमेरिका के वित्त मंत्रालाय को ट्रेजरी डिपार्टमेंट कहते हैं। अमेरिका की संसद को कांग्रेस कहा जाता है, जबकि अमेरिका की राज्यसभा को सेनेट कहा जाता है अमेरिका के सभी नियम कांग्रेस ही बनाती है। वहीं व्हाइट हाउस की बात करें तो यह प्रधानमंत्री कार्यालय की तरह होता है। अमेरिका की सेंट्रल बैंक को फेडरल रिजर्व कहा जाता है।
क्या है डेट सीलिंग संकट
अमेरिका के खर्च की बात करें तो इसका निर्धारण पहले कांग्रेस कर लेती है और इसको लेकर कानून बनाती है कि सेना, मेडिकल, सोशल सिक्योरिटी आदि पर कितना खर्च करना है। वहीं कर्ज की बात करें तो अमेरिका ने इसके लिए डेट सीलिंग का सिस्टम बनाया है। इसके तहत यह तय होता है कि आप एक निश्चित सीमा तक पैसे उधार ले सकते हैं।
किस राष्ट्रपति ने कितना कर्ज लिया
जब डेट सीलिंग की सीमा को आप पार कर जाते हैं तो इसे बढ़ाने के लिए आपको इजाजत लेनी होती है। 1960 से अबतक इस डेट सीलिंग को 78 गुना तक बढ़ाया गया है। अहम बात है कि बराक ओबामा के कार्यकाल में सबसे अधिक कर्ज 7.6 ट्रिलियन डॉलर का लिया गया था। जबकि डोनाल्ड ट्रंप ने 6.7 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज लिया था।
बाइडेन ने लिया खूब कर्ज
जो बाइडेन की बात करें तो उन्होंने अपने कार्यकाल के पहले ही साल में 2.5 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज लिया था। 19 जनवरी 2023 में अमेरिका अपनी डेट सीलिंग की सीमा पर पहुंच गया था। अमेरिका पर कुल 31 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज हो गया था। अमेरिकी सरकार हर रोज 17 बिलियन डॉलर का खर्च अपनी सरकार को चलाने के लिए करती है।
अमेरिका के पास असीमित कर्ज लेने की छूट
चूंकि अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, एक सुपरपॉवर है, अमेरिकी डॉलर दुनिया की रिजर्व करेंसी है। लिहाजा अमेरिका जितना चाहे कर्ज ले सकता है उसे कोई मना नहीं कर सकता है। दुनिया का 80 फीसदी ट्रेड अमेरिकी डॉलर में होता है।
इन देशों को अमेरिका ने दिया कर्ज
बता दें कि अमेरिका के कुल 31 ट्रिलियन डॉलर में से तकरीबन 25 फीसदी पैसे दूसरे देशों को दिए गए हैं, जिसे अमेरिका को इन देशों से वापस लेना है। जनवरी 2023 के आंकड़े के अनुसार जापान के पास 1.1 ट्रिलियन डॉलर, चीन के पास 860 बिलियन डॉलर, भारत के पास 232 बिलियन डॉलर अमेरिका का कर्ज है, जिसे उन्हें वापस करना है।
75 फीसदी कर्ज इन लोगों पर
बाकी के 75 फीसदी कर्ज की बात करें तो कई सरकारी विभाग, अमेरिकी कंपनी और निवेश आदि के पास है, जिसे अमेरिका को इन लोगों से वापस लेना है। अमेरिका ने कभी भी डिफॉल्ट नहीं किया। कई बार डेट सीलिंग खत्म होने के बाद भी अमेरिका ने इसे आगे बढ़ाया।
क्यों कर्ज के तले दबा अमेरिका
कोरोना महामारी के चलते अमेरिका ने एक साल में ही 3 ट्रिलियन डॉलर छाप दिए जोकि भारत की कुल अर्थव्यवस्था के बराबर है। इस पैसे को अमेरिका ने लोगों में बांटा ताकि लोगों को आर्थिक संकट से ना गुजरना पड़े। हालांकि इससे फौरी राहत तो मिली लेकिन लोगों के पास पैसा होने के बाद भी बाजार में सामान की किल्लत का लोगों को सामना करना पड़ा और महंगाई बढ़ने लगी। अमेरिका में लोग टॉयलेट पेपर तक के लिए लड़ने लगे।
सत्ता-विपक्ष में टकरार
अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी सत्ता में है जबकि रिपब्लिक पार्टी विपक्ष में है। डेट सीलिंग को बढ़ाने के लिए अमेरिका को विपक्ष के सहयोग की जरूरत है। रिपब्लिक पार्टी का कहना है कि खर्च कम करो, जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि अगले साल चुनाव है लिहाजा इसे कम नहीं किया जा सकता है।
लेकिन दोनों ही दल यह नहीं चाहते हैं कि वह डिफॉल्ट करें। यही वजह है कांग्रेस ने डेट सीलिंग बिल को पास कर दिया है। इसके पक्ष में कुल 314 वोट डाले गए, जबकि विरोध में 117 वोट। कांग्रेस से पास होने के बाद इसे सीनेट में भेजा जाएगा। जो बाइडेन ने सीनेट से अपील की है कि इसे जल्द से जल्द पास किया जाए और अमेरिका की कर्ज की सीमा को दो साल के लिए बढ़ा दिया जाए।
भारत के लिए सबक
जिस तरह से अमेरिका ने त्वरित मदद के लिए लोगों में पैसे बांटे उसके चलते उसपर कर्ज का संकट बढ़ता गया। लिहाजा भारत को भी इससे सबक लेने की जरूरत है। मुफ्त में चीजें बांटने, सब्सिडी आदि को कम करने की सख्त जरूरत। किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को सब्सिडी, मुफ्त की चीजें बांटकर मजबूत नहीं किया जा सकता है।












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