होम लोन लेने वालों के लिए बुरी खबर! RBI के नए नियमों से बढ़ सकती है आपकी EMI
ऋण के लिए रिजर्व बैंक के नए नियमों से एक बार फिर से बैंक ग्राहकों को बड़ा झटका लग सकता है। बता दें कि आरबीआई (RBI)ने लोन की किस्त यानी ईएमआई (EMI) के बारे में शुक्रवार को नई गाइडलाइन जारी की। इन नए नियमों से ग्राहकों को कुछ राहत तो जरूर मिली लेकिन होम लोन लेने वालों के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है।
बताया जा रहा है कि आरबीआई के नए नियमों के आने के बाद ब्याज दर बढ़ने पर बैंक और फाइनेंस कंपनियां कुछ होम लोन पर EMI बढ़ाने पर मजबूर हो सकती हैं। बैंकिंग एक्सपर्ट्स के मुताबिक, RBI के फैसले से लोन लेने वाले लोगों की संख्या में कमी आ सकती है। नीचे पढ़िए आखिर होम लोन लेने वालों पर कैसे हो सकता है RBI के नए नियमों का असर

दरअसल, आरबीआई ने कहा कि बैंकों और एनबीएफसी (NBFC) सहित अन्य वित्तीय संस्थानों से कहा है कि ब्याज दरें नए सिरे से तय करते समय वे ग्राहकों को ब्याज की फिक्स्ड दर चुनने का मौका दें। यानी कि आप कह सकते हैं कि बैंक अपना एक फिक्स्ड दर तय करेगी जिसमें कि कभी बदलाव नहीं किया जाएगा। लेकिन आरबीआई बीच में अगर नियम में बदलाव करता है तो इससे बैंक को घाटा या फायदा दोनों होने की संभावना है। इस स्थिति में अगर आरबीआई ने बैंक के खिलाफ कोई फैसला लिया तो बैंक को घाटा लग सकता है। इसलिए बैंक सोच समझकर एक फिक्स्ड रेट तय करना पसंद करेगी। साफ साफ शब्दों में कहें तो बैंक अब अपना फायदा देखते हुए ही फिक्स्ड रेट तय करेंगे।
पढ़ें RBI के नए नियमों में क्या है?
- ग्राहकों को फ्लोटिंग से फिक्स इंटेरेस्ट रेट में स्विच करने का मौका मिलेगा
- लोन की मंजूरी के समय बैंकों को अपने ग्राहकों को स्पष्ट तौर पर बताना होगा कि मानक ब्याज दर में बदलाव की स्थिति में ईएमआई या कर्ज की अवधि पर क्या असर पड़ेगा
- बैंकों को ग्राहकों को ये बताना होगा कि लोन को फ्लोटिंग से फिक्स रेट में चेंज करने पर किस तरह के अतिरिक्त शुल्क लगाए जाएंगे। लोन की मंजूरी वाले लेटर में इस बारे में जानकारी देनी होगी।
- लोनधारकों को ईएमआई बढ़ाने, टैन्योर बढ़ाने या दोनों विकल्पों को चुनने या फिर लोन की अवधि के दौरान किसी भी समय, आंशिक या पूर्ण भुगतान करने का विकल्प दिया जाएगा। लोन के प्री-पेमेंट पेनल्टी या फोरक्लोजर चार्जेस मौजूदा निर्देश के अधीन होगा।












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