घरेलू और वैश्विक आर्थिक हालातों के बीच पीएम मोदी की इंडिया इंक से मुलाकात
नई दिल्ली। घरेलू आर्थिक हालात और विश्व की चिंताजनक अर्थव्यवस्था के बीच आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडिया इंक के साथ मुलाकात करेंगे। 40 लोगों के इस समूह में जहां देश के नामी-गिरामी उद्योगपति शामिल होंगे तो वहीं कुछ अर्थशास्त्री भी इस मीटिंग में शामिल रहेंगे। पीएम इस दौरान देश में मौजूद आर्थिक मौकों पर चर्चा कर सकते हैं।

इंडिया इंक का धैर्य दे रहा जवाब
देश की नई सरकार को आए हुए 15 माह हो चुके हैं और अब इंडिया इंक का भरोसा और धैर्य जवाब देने लगा है। एक बड़ा समूह अब मान रहा है कि सरकार की चमक फीकी हो रही है और जो वादे किए गए थे, उन्हें पूरा करने के प्रयास नहीं हो रहे हैं। सोमवार को शेयर बाजार में हुई गिरावट ने चिंता की लकीरों की और गहरा कर दिया है।
अगर आपको याद हो तो वर्ष 2013 में कई तरह के घोटालों के बाद यूपीए सरकार की विश्वसनीयता पर इंडिया इंक ने कई तरह के सवाल खड़े किए थे।
आर्थिक हालात भी कुछ ठीक नहीं थे और उस समय भी इसी तरह से मनमोहन सिंह ने भी एक मीटिंग बुलाई थी। पीएम मोदी की आज की मीटिंग को भी कुछ उस तरह की मीटिंग करार दिया जा रहा है।
कौन-कौन होगा मीटिंग
मीटिंग में वित्त मंत्री अरुण जेटली के अलावा, चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर अरविंद सुब्रहमण्यम भी मौजूद होंगे। सात रेसकोर्स पर होने वाली यह मीटिंग करीब दो घंटे तक चलेगी। प्रधानमंत्री ने 30 जून को भी इंडिया इंक के साथ एक ऐसी ही मीटिंग की थी।
उस समय उन्होंने कर दरों और दूसरे अन्य मुद्दों पर इंडिया इंक के साथ चर्चा की थी। इस मीटिंग में रिलायंस इंडस्ट्री के मुकेश अंबानी, टाटा ग्रुप के साइरस मिस्त्री, केएम बिड़ला और सुनील मित्तल के बीच ही आरबीआई गर्वनर रघुराम राजन, कई टॉप बैंकर्स और अर्थशास्त्री मौजूद रहेंगे।
मीटिंग की कुछ खास बातें
- पीएम मोदी की इंडिया इंक के साथ दो माह में यह दूसरी मुलाकात है।
- दुनिया पर मंदी के खतरे और चीन की खराब अर्थव्यवस्था के बीच मुलाकात।
- मीटिंग में अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर भी चर्चा होगी।
- एजेंडे में दुनिया की हालत के बीच ही भारत में मौजूद मौके हैं।
- इंडिया इंक इस बात को लेकर चिंतित है कि भारत में रिफॉर्म्स की रफ्तार काफी धीमी है।
- पीएम के सामने निवेश और बिजनेस को और सरल बनाने के तरीकों पर भी बात हो सकती है।
- सूत्रों के मुताबिक सरकार की ओर से लैंड बिल और जीएसटी के बारे में इंडिया इंक को बताया जा सकता है।
- सरकार यह संदेश दे सकती है कि आखिर क्यों वह सदन में इसे पास नहीं करा सकी।












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