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Old vs New Tax Regime: ज्‍यादा पैसे बचाने के लिए नई-पुरानी टैक्स रिजीम में कौनसी बेस्‍ट?

Old vs New Tax Regime FY 2025-26: 1 अप्रेल से नए वित्‍तीय वर्ष 2025-26 की शुरआत हो चुकी है। यह वित्‍तीय वर्ष भारत में करदाताओं के लिए ऐतिहासिक है, क्‍योंकि इसमें 1 अप्रैल 2025 से लागू हुई नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) में मिलने वाला है। अगर आप टैक्स देने वालों की लिस्ट में आते हैं, तो आपको इस बदलाव का सीधा फायदा मिलेगा।

वनइंडिया हिंदी से बातचीत में राजस्‍थान के जाने-माने सीए मनीष अग्रवाल कहते हैं कि मोदी सरकार द्वारा पेश की गई नई टैक्‍स प्रणाली एक तरह की क्रांतिकार कदम है, जिससे हम अपनी कमाई को जरूरत के हिसाब से उपभोग कर सकते हैं।
CA मनीष अग्रवाल के अनुसार नई कर प्रणाली हर कीमत में दस लाख से ज्‍यादा कमाने वालों के चुनना सही है। नई कर प्रणाली के कई फायदे हैं। मसलन हम अपना निवेश अपना फायदा देखकर कर सकते हैं। टैक्‍स की दरें किफायती हैं। नई प्रणाली अब डिफॉल्‍ट प्रणाली है।

Old vs New Tax Regime Comparison for FY 2025-26

अब सवाल उठता है कि करदाता के लिए नई और पुरानी कर प्रणाली में से कौनसी बेहतर है? न्‍यूज और ओल्‍ड टैक्‍स रिजीम कौनसी ज्‍यादा फायदेमंद है? आइए समझते हैं कि आयकर का पूरा गणित।

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भारतीय टैक्स व्यवस्था में क्या बदला है?

केंद्र की मोदी सरकार ने बजट 2025 में नई टैक्स व्यवस्था को बेहतर बनाते हुए बड़ा ऐलान किया है:

  • 12 लाख रुपये तक की सालाना आय पर अब कोई इनकम टैक्स नहीं लगेगा। स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹75,000 कर दिया गया है। इसका मतलब: अगर आपकी सैलरी ₹12.75 लाख तक है, तो आपको एक भी रुपया टैक्स नहीं देना पड़ेगा। इससे पहले सिर्फ ₹7 लाख तक की इनकम टैक्स फ्री थी।

आयकरदाता को कैसे मिलेगा फायदा?

पहले अगर आपकी सैलरी ₹10 लाख थी, तो आपको इनकम टैक्स भरना पड़ता था। लेकिन अब अगर आपकी सैलरी ₹12.75 लाख भी है, तो आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा। यानी आपके हाथ में पहले से ज्यादा पैसा बचेगा।

क्या पुरानी टैक्स व्यवस्था अब भी रहेगी?

हाँ! पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) अभी भी मौजूद रहेगी। नई और पुरानी में से कोई भी व्‍यवस्‍था चुनने का विकल्‍प चुना जा सकता है।

कब पुरानी टैक्स व्यवस्था फायदेमंद होगी?

अगर आप LIC, PPF, EPF, होम लोन, मेडिकल इंश्योरेंस, बच्चों की पढ़ाई की फीस आदि में निवेश करते हैं और इन पर टैक्स छूट का फायदा उठाना चाहते हैं।

अगर आपकी आय ₹15 लाख से ज्यादा है और आप बड़े डिडक्शंस (छूट) क्लेम करते हैं, तो पुरानी टैक्स व्यवस्था फायदेमंद हो सकती है।

कौन सा विकल्प चुनें?

  • अगर आपकी सालाना इनकम ₹12.75 लाख तक है, तो नई टैक्स व्यवस्था सबसे अच्छा विकल्प है।
  • अगर आप ज्यादा निवेश और डिडक्शन का लाभ उठाते हैं, तो पुरानी व्यवस्था सोच सकते हैं।
  • नौकरीपेशा लोग हर साल अपनी ITR भरते वक्त दोनों व्यवस्थाओं में बदलाव कर सकते हैं।

टैक्स देने वालों की संख्या में क्या बदलाव आएगा?

  • आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 में 7.54 करोड़ लोगों ने इनकम टैक्स रिटर्न भरा।
  • पहले 5.89 करोड़ लोग ही टैक्स फ्री दायरे में थे, लेकिन अब यह संख्या 6.92 करोड़ तक बढ़ जाएगी।
  • मतलब: अब करीब 92% वेतनभोगी टैक्स नहीं देंगे।

वित्‍तीय वर्ष 2025-26 में अब क्या करें?

  • अगर आपकी सैलरी ₹12.75 लाख या उससे कम है, तो आप नई टैक्स व्यवस्था में शिफ्ट होकर ज्यादा पैसे बचा सकते हैं।
  • अगर आप पुराने टैक्स रिजीम में बड़े डिडक्शंस क्लेम करते हैं, तो एक बार फिर से दोनों व्यवस्थाओं की तुलना करके सही फैसला लें।

पुरानी (Old) और नई (New) कर व्यवस्था के बीच मुख्य अंतर

1. कर स्लैब दरें (Tax Slabs)
पुरानी कर व्यवस्था: इसमें कर स्लैब की दरें अधिक हैं, लेकिन विभिन्न छूट और कटौतियों का लाभ मिलता है।
नई कर व्यवस्था: इसमें कर दरें कम हैं, लेकिन छूट और कटौतियों का लाभ नहीं मिलता है।

आय (₹ में) पुरानी कर व्यवस्था (Old Regime) नई कर व्यवस्था (New Regime)

0 - 2,50,000----------------शून्य (0%)------------- शून्य (0%)
2,50,001 - 5,00,000--------5%------------------- 5%
5,00,001 - 7,50,000-------20%------------------10%
7,50,001 - 10,00,000------20%------------------15%
10,00,001 - 12,50,000----30%------------------20%
12,50,001 - 15,00,000----30%------------------25%
15,00,001 से अधिक----------30%------------------30%

2. कटौतियाँ और छूट (Deductions & Exemptions)

पुरानी कर व्यवस्था:

  • धारा 80C (LIC, EPF, PPF, NSC आदि) के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट।
  • धारा 80D (स्वास्थ्य बीमा) के तहत छूट।
  • HRA (House Rent Allowance), LTA (Leave Travel Allowance) जैसी छूटें उपलब्ध।

नई कर व्यवस्था:

  • कोई छूट और कटौती उपलब्ध नहीं है।
  • स्टैंडर्ड डिडक्शन (₹50,000) और कुछ अन्य लाभ अब इसमें जोड़े गए हैं।

3. उपयुक्तता (Suitability)

  • पुरानी कर व्यवस्था उन लोगों के लिए बेहतर है जो निवेश, बीमा, और अन्य कर बचत योजनाओं में पैसा लगाते हैं।
  • नई कर व्यवस्था उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो कोई कटौती नहीं लेना चाहते और सरल प्रक्रिया पसंद करते हैं।

4. कौन सी बेहतर है?

  • यदि आपकी कटौतियाँ और छूट अधिक हैं, तो पुरानी व्यवस्था आपके लिए बेहतर होगी।
  • यदि आप सरल कर भुगतान चाहते हैं और कटौतियाँ नहीं लेना चाहते, तो नई व्यवस्था बेहतर हो सकती है।

यह भी पढ़ें- Income Tax Department: आयकर विभाग ने जारी किया नोटिस! किराए पर TDS कटौती में मिलेगी छूट

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