ट्विटर पर निर्मला सीतारमण पर बरसे जयराम, GST पर वित्त मंत्री के 14 ट्वीट के बदले 10 प्वाइंटर में पूछा सवाल
नई दिल्ली, 20 जुलाई। रोजमर्रा में इस्तेमाल किए जाने वाले उत्पादों के दाम में बढ़ोत्तरी के केंद्र सरकार के फैसले का कांग्रेस ने विरोध किया है। हालांकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि इन चीजों को अगर पैक करके बेचा जाता है तो इसपर 5 फीसदी की जीएसटी लगाने के लिए सभी राज्य एकमत से सहमत थे। लेकिन वित्त मंत्री के इस बयान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने पलटवार किया है। जयराम रमेश ने कहा कि यह एकमत से लिया गया फैसला नहीं था, बैठक में पश्चिम बंगाल ने इस फैसले का विरोध किया था। यह वर्चुअल बैठक थी और वित्त मंत्री ने व्यक्तिगत तौर पर लोगों से मुलाकात करके बैठक नहीं की।

14 ट्वीट में जीएसटी पर दी सफाई
दरअसल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी काउंसिल की 47वीं बैठक की जानकारी 14 ट्वीट के जरिए विस्तार से दी है और समझाया है कि आखिर क्यों यह फैसला लिया गया है। निर्मला सीतारमण ने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं है जब खाद्य उत्पाद जैसे आटा, दाल आदि टैक्स लिया जा रहा है, पंजाब, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तेलंगाना जीएसटी आने के पहले से ही कर वसूल रहे हैं। अकेले पंजाब ने अनाज पर 2000 करोड़ का वैट वसूला है। लेकिन जीएसटी के तहत सिर्फ रजिस्टर्ड ब्रांड पर ही 5 फीसदी की जीएसटी लगाई गई है। लेकिन इसका गलत इस्तेमाल किया गया और जीएटी कलेक्शन में गिरावट आई। जिसके बाद बड़े ब्रांड ने इसकी शिकायत की यह कर सभी पर एक समान होना चाहिए, टैक्स में चोरी की बात को राज्यों ने भी स्वीकार किया।

वित्त मंत्री ने राज्यों का दिया हवाला
राजस्थान, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, बिहार, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा, गुजरात की फिटमेंट कमेटी ने इसको लेकर कई बैठकें की और नियम का दुरुपयोग होने से रोकने के लिए अपने सुझाव दिए। इसी के बाद जीएसटी काउंसिल ने 47वीं बैठक में यह फैसला लिया, जिसे 18 जुलाई से लागू किया गया है। इन उत्पादों पर तभी जीएसटी वसूला जा सकता है जब इसे पहले से पैक किया गया हो और इसकी लेबलिंग की गई हो। उदाहरण के तौर पर पहले ताल, अनाज, चावल आटा आदि पर 5 फीसदी जीएसटी लगता था अगर वह किसी ब्रांड की पैकंग में है। लेकिन अब अगर पहले से पैक और लेबल किए गए हैं तो उसपर जीएसटी लगेगी।

जयराम रमेश ने समझाया अंतर
वहीं वित्त मंत्री की सफाई पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने 10 प्वाइंटर में ट्वीट के जरिए जवाब दिया है। उन्होंने ट्वीट करके लिखा, ब्रांडेड एंड लेबल्ड, प्री पैकेज्ड एंड लेबेल्ड से बिल्कुल अलग हैं। ब्रांडेड एंड लेबल्ड सिर्फ बड़ी कंपनियों को प्रभावित करता है, जिसे मिडल क्लास या अपर मिडल क्लास खरीदता है। जबकि प्री पैकेज्ड एंड लेबेल्ड छोटे व्यापारियों को प्रभावित करता है, जिनके उत्पाद को गरीब और निचले वर्ग के लोग खरीदते हैं। पश्चिम बंगाल के मंत्री जोकि बैठक में शामिल हए थे उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने हमसे व्यक्तिगत तौर पर मुलाकात नहीं की और वर्चुअल मीटिंग की है। यही नहीं फिटमेंट कमेटी के कीमतों को बढ़ाने के सुझाव का विरोध हुआ था।

क्या गरीब को पैक्ड उत्पाद खरीदने का हक नहीं
जयराम रमेश ने कहा कि आखिर क्यों गरीब ग्राहकों को पैक्ड उत्पाद खरीदने की ताकत मिलनी चाहिए। मोदी सरकार गरीबों की महत्वाकांक्षा को दबा रही है, क्या उसे अच्छे और स्वच्छ पैक उत्पाद खरीदने की हिम्मत नहीं मिलनी चाहिए। ऐसे समय में जब सीपीआई महंगाई 7 फीसदी है, थोक महंगाई दर 15 फीसदी है, बेरोजगारी चरम पर है, रुपया निचले स्तर पर है, इस तरह का फैसला आम लोगों की और गरीबों की मुश्किलों को और भी बढ़ाएगा।












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