मोहनदास पई ने बताया-क्यों कम सैलरी मिलती है आईटी फ्रेशर्स को?
भारत की बड़ी आईटी सर्विस कंपनियां फ्रेशर्स को कम सैलरी पर किस तरह से नौकरी दी जाए, इसके लिए सांठगांठ कर लेती हैं।
नई दिल्ली। भारत की बड़ी आईटी सर्विस कंपनियां फ्रेशर्स को कम सैलरी पर किस तरह से नौकरी दी जाए, इसके लिए सांठगांठ कर लेती हैं। इंट्री लेवल पर सॉफ्टवेयर इंजीनियरर्स की अधिक संख्या को देखते हुए आईटी कंपनियां इस बात का फायदा उठाती हैं और फ्रेशर्स को कम सैलरी देती हैं। यह बात आईटी इंडस्ट्री में काम कर चुके एक टी वी मोहनदास पई ने कही।

समाचार एजेंसी पीटीआई के संग बात करते हुए टी वी मोहनदास पई ने कहा कि यह आईटी कंपनियों की सबसे बड़ी दिक्कत है। उन्होंने कहा कि करीब दो दशक पहले आईटी कंपनियों में काम करने वाले फ्रेशर्स को सिर्फ 2.25 लाख रुपए वार्षिक आय मिलती थी जोकि अब बढ़कर सिर्फ 3.5 लाख रुपए हुआ है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से महंगाई बढ़ी है। उस तुलना में आईटी कंपनियों ने सैलरी नहीं बढ़ाई है। पाई ने वर्ष 1994 से 2006 तक इंफोसिस में बतौर मुख्य वित्तीय अधिकारी के तौर पर काम किया है। उन्होंने साफ तौर पर यह माना कि आईटी कंपनियां आपस में बात करके फेशर्स की सैलरी न बढ़ाने का फैसला करती हैं।
उन्होंने कहा कि आईटी सर्विस इंडस्ट्री के लिए यह बात अच्छी नहीं है। आईटी कंपनियों को इस तरह की नीति का खत्म करना होगा।
मोहनदास पई ने इस समय मनिपाल ग्लोबल एजुकेशनल सर्विसेज और आरिन कैपिटल के चेयरमैन हैं। उन्होंने कहा कि आईटी फ्रेशर्स की सैलरी को बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर आप सैलरी नहीं बढ़ाएंगे तो टैलेंट आपके पास नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि आईटी इंडस्ट्री में काम करने वाले लोग अभी टियर-2 कॉलेजों से आ रहे हैं। जोकि स्मार्ट हैं। पर आईटी इंडस्ट्री को टियर-1 कॉलेज के टैलेंटेड लोगों की जरूरत है।












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