Sensex 3900 और Nifty 1100 अंक टूटा, क्या मंदी आ रही है? जानें शेयर बाजार में गिरावट के 5 बड़े कारण
Market Crash Sensex Nifty Falls: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ के कारण दुनिया भर के शेयर बाजारों में भारी गिरावट आई, जिससे वैश्विक स्तर पर बिकवाली हुई, बाजार पूंजीकरण में खरबों डॉलर का नुकसान हुआ और दलाल स्ट्रीट में लगभग एक साल का सबसे खराब कारोबारी दिन दर्ज किया गया।
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स में 3,000 अंकों से अधिक की गिरावट आई , जबकि निफ्टी में 5% से अधिक की गिरावट आई, जो पूरे एशिया और पश्चिम में भारी गिरावट को दर्शाता है। शेयर बाजार के जानकार नीरव वखारिया का कहना है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरे देशों पर टैक्स (जिसे टैरिफ कहा जाता है) बढ़ा दिए हैं। इसके चलते दुनियाभर के बाजारों में घबराहट फैल गई है। आज शेयर बाजार में जो भारी गिरावट आई है, उसने निवेशकों को बड़ा झटका दिया है। आइए जानते हैं कि आखिर क्या हुआ, क्यों बाजार ऐसे हिला और आगे क्या हो सकता है....

बाजार में इतनी बड़ी गिरावट क्यों?
सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में ज़बरदस्त गिरावट देखी गई। सुबह के कारोबार में ही सेंसेक्स 3,900 से ज्यादा अंक गिर गया और निफ्टी भी 1,100 अंकों से नीचे चला गया। इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ यानी आयात शुल्क को लेकर आए बयान हैं।
ट्रंप के टैरिफ का धमाका
डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया टैरिफ प्लान जारी किया है जिसमें उन्होंने भारत समेत कई देशों पर 10% से 50% तक टैक्स लगाने की बात कही है। इससे वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता फैल गई है। जब बड़े देश आपस में व्यापार के मामले में उलझते हैं, तो उसका असर सीधे शेयर बाजार पर दिखता है।
भारी नुकसान का आंकड़ा
बीएसई यानी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का कुल बाजार पूंजीकरण 19 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा गिर गया। मेटल, आईटी, ऑटो और रियल एस्टेट सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। स्मॉल और मिड-कैप कंपनियों के शेयरों में भी जोरदार गिरावट आई।
ग्लोबल मंदी की आहट
कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआत है। मंदी यानी "economic recession" की आहट दिखने लगी है। अमेरिका, चीन, जापान और यूरोप के बाजार भी भारी गिरावट से जूझ रहे हैं। अगर ये सिलसिला चलता रहा, तो इसका असर लंबे समय तक दिख सकता है।
भारतीय बाजार पर असर क्यों?
भारत की कई आईटी और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां अमेरिका को सेवाएं देती हैं और माल बेचती हैं। अगर अमेरिका टैरिफ बढ़ा देगा तो वहां माल बेचना महंगा पड़ेगा, और कंपनियों को नुकसान होगा। यही डर बाजार में है, इसलिए निवेशक घबरा रहे हैं।
आगे क्या हो सकता है?
जानकारों का कहना है कि अगर अगले 2-3 दिनों में कोई पक्का फैसला या बयान सामने नहीं आया, तो बाजार में गिरावट का यह सिलसिला जारी रह सकता है। हालांकि कुछ विशेषज्ञ यह भी कह रहे हैं कि भारत की स्थिति बाकी देशों की तुलना में थोड़ी बेहतर है, इसलिए लंबी अवधि में हमें घबराने की ज़रूरत नहीं है।
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