H-1B वीजा पर लगी रोक के चलते IT शेयरों में बड़ी गिरावट, TCS को भारी नुकसान
मुंबई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय आईटी पेशेवरों के बीच लोकप्रिय एच-1बी वीजा के साथ ही अन्य विदेश कार्य वीजा जारी करने पर इस साल के अंत तक रोक लगाने की आधिकारिक घोषणा की है। इसका सबसे बड़ा असर भारतीय आईटी कंपनियों पर देखने को मिलेगा। अमेरिका में विदेशी वीजा बैन के चलते शुरुआती कारोबार में आईटी शेयरों पर दबाव देखा जा रहा है। सेंसेक्स पर टीसीएस, इंफोसिस लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं।

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मंगलवार को शेयर बाजार में सबसे खराब ओपनिंग टीसीएस की रही। टीसीएस का शेयर करीब 6 रुपये की गिरावट के साथ 2,022.10 रुपये के स्तर पर खुला। विप्रो का शेयर करीब 2 रुपये की गिरावट के साथ 215.95 रुपये के स्तर पर खुला। इनफोसिस का शेयर करीब 6 रुपये की गिरावट के साथ 698.15 रुपये के स्तर पर खुला। एचसीएल टेक का शेयर करीब 4 रुपये की गिरावट के साथ 565.80 रुपये के स्तर पर खुला। टीसीएस और इंफोसिस का एच-1बी वीजा पर एक्सपोजर 40-50 फीसदी है जबकि विप्रो और एचसीएल टेक का 30-35 फीसदी है।
बता दें कि एच-1बी वीजा भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के बीच काफी लोकप्रिय है। ये एलान करते हुए प्रेसीडेंट ट्रंप ने कहा कि वर्तमान आर्थिक संकट के दौर में अपनी रोजी-रोटी गवां चुके अमेरिकी नागरिकों की सहायता के लिए एच-1बी और दूसरे वीजा को साल के अंत तक के लिए सस्पेंड करना जरूरी हो गया था। मौजूदा वीजाधारकों पर इसका असर नहीं पड़ेगा। विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया कि इस कदम से भारतीय आईटी कंपनियों पर असर पड़ने की संभावना है क्योंकि हर साल जारी होने वाले 85,000 वीजा में से लगभग 70 प्रतिशत भारतीय हैं।
ट्रंप की इस घोषणा की वजह से दुनिया भर के 2.4 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित होंगे। कोरोना महामारी के चलते नौकरियां गंवा चुके लाखों अमेरिकी लोगों की मदद के लिए यह कदम उठाया गया है और इसका सबसे ज्यादा नुकसान भारत के आईटी प्रोफेशनल्स को होगा। अमेरिका में काम करने के लिए एच-1बी वीजा वीजा पाने वाले सबसे ज्यादा आईटी प्रोफेशनल्स भारतीय होते हैं। यह आदेश 24 जून से लागू होगा। इसका असर कई भारतीय प्रोफेशनल्स के साथ ही कई अमेरिकी और भारतीय कंपनियों को प्रभावित करेंगी।












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