अगर दुनिया में आया तेल संकट तो भारत के पास कितने दिन का है पेट्रोल भंडार? सरकार ने बताया
क्या होगा अगर वैश्विक उथल-पुथल के कारण दुनिया में तेल की सप्लाई अचानक रुक जाए? भारत जैसी विशाल और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए यह सवाल बेहद गंभीर है। इसी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) पर राज्यसभा में सोमवार को पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देश के सामने एक बड़ी और राहत भरी तस्वीर पेश की है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संकट की स्थिति में भी भारत के पहिए नहीं थमेंगे। आइए जानतें हैं मंत्री ने क्या कहा और भारत की तैयारी कितनी मजबूत है?

संकट के लिए कितनी है भारत की तैयारी?
राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों (अतिरिक्त प्रश्न) का उत्तर देते हुए तेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी वैश्विक संकट का सामना करने के लिए तैयार है। उन्होंने सदन को बताया कि 'भारत का सामरिक पेट्रोलियम रिजर्व वैश्विक उथल-पुथल से उत्पन्न होने वाली मांग को पूरा करने के लिए 74 दिनों तक चल सकता है।"
इसका सरल मतलब यह है कि अगर कल को पूरी दुनिया में युद्ध छिड़ जाए या किसी वजह से भारत को कच्चा तेल मिलना पूरी तरह बंद हो जाए, तो भारत के पास इतना तेल जमा है कि बिना बाहर से एक बूंद मंगाए भी देश 74 दिनों तक सामान्य रूप से चल सकता है।
मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत जिस रफ्तार से विकास कर रहा है, उसके लिए एक बहुत ही व्यवहार्य और सुरक्षित रिजर्व होना अनिवार्य है, ताकि वैश्विक अस्थिरता की स्थिति में देश की स्थिति नाजुक न हो।
मंत्री पुरी ने जानकारी दी कि भारत के पास पश्चिमी और पूर्वी दोनों तटों पर कई रिफाइनरियां हैं। उन्होंने भंडार की गणना का तरीका समझाते हुए कहा कि आज हम अपने रिजर्व की गणना केवल जमीन के नीचे बनी गुफाओं (Caverns) में ही नहीं, बल्कि अपनी रिफाइनरियों के स्टॉक के आधार पर भी करते हैं।
उन्होंने बताया, "कुल मिलाकर, अगर आप हमारी गुफाओं के रिजर्व और हमारी रिफाइनरियों, हमारे बंदरगाहों पर फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म और हमारे उत्पादों में मौजूद भंडार को देखें, तो यह 74 दिनों का बैठता है।'
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार यह आदर्श रूप से 90 दिन होना चाहिए, जिस पर मंत्री ने कहा कि, 'एक मंत्री के तौर पर मैं 74 दिनों के स्टॉक के साथ सुरक्षित महसूस करता हूं। लेकिन, हम भविष्य में इसे बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं।'
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता
वैश्विक स्तर पर भारत की मजबूत स्थिति को रेखांकित करते हुए हरदीप सिंह पुरी ने कहा, 'आज हम दुनिया के कच्चे तेल के तीसरे सबसे बड़े उपभोक्ता (Consumer) हैं। हमारे पास दुनिया की चौथी सबसे बड़ी रिफाइनिंग क्षमता है और हम पेट्रोलियम उत्पादों के दुनिया के पांचवें सबसे बड़े निर्यातक (Exporter) भी हैं।'
उन्होंने सदन को जानकारी दी कि वर्तमान रिफाइनिंग क्षमता 260 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है, जिसे बढ़ाकर 320 मिलियन मीट्रिक टन करने की योजना पर काम चल रहा है।
सरकार ने 'इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड' (ISPRL) के माध्यम से आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के 3 स्थानों पर 5.33 मिलियन मीट्रिक टन की क्षमता वाले रिजर्व बनाए हैं। मंत्री ने लिखित उत्तर में एक बड़ी उपलब्धि साझा करते हुए बताया, 'अप्रैल/मई 2020 में कच्चे तेल की कम कीमतों का लाभ उठाते हुए, सामरिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) को पूरी क्षमता तक भर लिया गया था, जिससे लगभग ₹5,000 करोड़ की अनुमानित बचत हुई थी।'
पुरी ने बताया कि 2020 के कोविड काल में जब तेल की कीमतें 19.90 डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर पर थीं, तब की गई वह खरीद आज भी बहुत फायदेमंद साबित हो रही है क्योंकि इसकी औसत खरीद लागत वर्तमान कीमतों की तुलना में आधी है। वर्तमान में इन सुरक्षित भंडारों में कुल क्षमता का लगभग 77 प्रतिशत स्टॉक मौजूद है।












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