मोदी सरकार की अनूठी योजना, आपके खाते में डालेगी एकमुश्त रकम, जानिए कैसे?
नई दिल्ली। विधानसभा चुनाव 2018 में 3 मुख्य हिंदी भाषी राज्यों से सत्ता के बाहर होने के बाद अब केंद्र की मोदी सरकारह लोकसभी चुनाव की तैयारियों में जुट गई है। सरकार आगामी लोकसभा चुनाव से पहले लोगों को खुश करने की हर संभव कोशिश में जुट गई है। जो वोटबैंक राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा में बिखर गए अब सरकार उन्हें एकजुट करने की कोशिश में जुट गई है। न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक इन्हीं कोशिशों के मकसद से फरवरी में अंतरिम बजट के दौरान वित्तमंत्री अरुण जेटली एक अनूठी स्कीम की घोषणा कर सकते हैं। इस सरकारी स्कीम के तरह परिवार के प्रत्येक सदस्य के खाते में प्रति माह या एकमुश्क रकम डाल सकती है। इस स्कीम का नाम है यूनिवर्सल बेसिक इनकम यानी UBI...

क्या है UBI
यूबीआई मतलब यूनिवर्सल बेसिक इनकम, एक ऐसी सरकारी स्कीम, जिसके तहत सरकार अपने हर नागरिक को हर महीने एक निश्चित रकम देती है, ताकि देश से गरीबी मिटाने में मदद मिल सके और आय में असमानता को कम किया जा सके। सबसे पहले साल 1967 में मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने गारंटीड इनकम स्कीम तैयार किया था, ताकि आय की असमानता कम किया जा सके। इस स्कीम को दुनिया के किसी भी देश ने इसे वर्किंग-एज जनसंख्या की आय के मुख्य साधन के तौर पर नहीं अपनाया, लेकिन कई देशों में ये स्कीम किसी न किसी रूप में चल रहे हैं। कई देशों में इसे गारंटीड मिनिमम इनकम (जीएमआई) के नाम से भी जाना जाता है। इन देशों में इसे सामाजिक क्लयाण के तौर पर देखा जाता है, ताकि देस के हर नागरिक को जरूरी सुविधाएं मिल सके। साइप्रस, फ्रांस, अमेरिका के कई राज्य, ब्राजील, कनाडा, डेनमार्क, फिनलैंड, जर्मनी, नीदरलैंड, आयरलैंड, लग्जमबर्ग, स्वीडन, स्विटरजरलैंड और यूनाइटेड किंगडम में चलाया जा रहा है।

भारत में चल चुका है पायलट प्रोजेक्ट
आपको बता दें कि भारत में इस स्कीम का पायलट प्रोजेक्ट चलाया जा चुका है। मध्य प्रदेश के इंदौर के 9 गांवों में इस स्कीम के पायलट प्रोजेक्ट को चलाया जा चुका है। साल 2010 से 2016 तक इसे चलाया गया था, जिसमें घर के हर वयस्कों और बच्चों को हर महीने एक निश्चित रकम दी गई। इस स्कीम को यूनिसेफ ने फंड किया और यूनिसेफ की मदद से लोगों के खाते में निश्चित रकम ट्रांसफर की जाती थी। इसके बाद कई सर्वे किए गए कि इस योजना से लोगों की जीवनशैली पर क्या फर्क पड़ा, जिसका मिलाजुला कर अच्छा असर रहा। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार इस स्कीम को लागू कर सकती है।

क्या है मुश्किलें
हालांकि इस योजना को लागू करने में मुश्किलें भी हैं। जैसे स्कीम की वजह से सरकारी खजाने पर आने वाला खर्च। इस स्कीम को तैयार करने लंदन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर के मुताबिक इस स्कीम को लागू करने से देश की जीडीपी का लगभग 4 प्रतिशत खर्च आएगा। इस स्कीम की वजह से सरकार पर खर्च को बोझ दोगुना हो जाएगा। ऐसे में इसे खत्म करने के लिए सब्सिडी खत्म करनी होगी, जो एक बड़ी चुनौती होगी। वहीं बिना काम के लोगों को हर महीने मिलने वाला सरकारी पैसा उन्हें आलसी बना सकती है।
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