अडानी मामले की जांच के लिए बने अलग समिति, सुप्रीम कोर्ट में आई नई याचिका, नियुक्त पैनल में हितों का टकराव
हिंडनबर्ग रिपोर्ट पर अडानी समूह के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति में भी हितों का टकराव है। एक याचिका में नए पैनल की मांग करते हुए यह दावा किया गया है। गौतम अडानी के खिलाफ जांच में हितों के टकराव के इसी तरह के आरोप के कुछ ही दिनों बाद आया है।
वर्तमान में छह सदस्यीय अदालत द्वारा नियुक्त समिति में उद्योगपति ओपी भट्ट, न्यायमूर्ति जेपी देवधर, अनुभवी बैंकर केवी कामथ, इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि और वकील सोमशेखर सुंदरेसन शामिल हैं। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एएम सप्रे करेंगे।

याचिकाकर्ता के मुताबिक ग्रीनको ग्रुप के चेयरमैन ओपी भट्ट, गौतम अडानी के साथ मिलकर काम करते हैं। याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि केवी कामथ एक बैंक धोखाधड़ी मामले का सामना कर रहे थे। सोमशेखरन विभिन्न मंचों पर अडानी के लिए पेश हुए थे। याचिका में कहा गया है कि मौजूदा समिति देश के लोगों में विश्वास जगाने में विफल रहेगी।
याचिकाकर्ता ने शीर्ष अदालत से एक नया विशेषज्ञ पैनल बनाने का भी आग्रह किया, जिसमें वित्त, कानून और शेयर बाजार के क्षेत्रों के सदस्य शामिल हों। सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर 13 अक्टूबर को सुनवाई कर सकता है। पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे में बाजार नियामक सेबी पर अडानी के खिलाफ जांच में हितों के टकराव का आरोप लगाया गया था। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सेबी के एक सदस्य के अडानी समूह के साथ पारिवारिक संबंध हैं।
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