7th Pay Commission: विधानसभा चुनाव के नतीजों से खिले सरकारी कर्मचारियों के चेहरे,अब बढ़ेगी सैलरी

नई दिल्ली। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद देशभर में कर्मचारियों के चेहरे खिल उठे हैं। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत ने कर्मचारियों की उम्मीदें बढ़ा दी है। उन्हें उम्मीद है कि विधानसभा चुनावों से सरकार सीख लेगी और केंद्रीय कर्मचारियों की वाजिब मांगों को बिना देर किए मान लेगी। विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जो हालत हुई है, सरकार लोकसभा चुनाव 2019 में वो रिस्क नहीं उठाना चाहेगी। ऐसे में पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों से सरकार पर उनकी वाजिब मांगों को मानने का दवाब बढ़ेगा।

 चुनावी नतीजों से खिले कर्मचारियों के चेहरे

चुनावी नतीजों से खिले कर्मचारियों के चेहरे

राज्य और केंद्रीय कर्मचारी संगठनों की नजरें भी विधान सभा चुनाव के नतीजों पर टिकी थी। चुनावों में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन के चलते अब केंद्र की मोदी सरकार पर दवाब बढ़ा है। सरकार ने कर्मचारियों की मांगों को पूरा करने में जो देरी की, उसका असर अब दिखा है, लेकिन सरकार लोकसभा चुनाव 2019 में ये खतरा मोल नहीं लेना चाहेगी। ऐसे में कर्मचारी संगठनों को पूरी उम्मीद है कि उनकी मांगें जल्द से जल्द मानी जाएगी और उनकी सैलरी में बढ़ोतरी का तोहफा सरकार जल्द देगी।

 20 करोड़ वोटों पर सरकारी कर्मचारियों का कब्जा

20 करोड़ वोटों पर सरकारी कर्मचारियों का कब्जा

कर्मचारी संगठनों के अनुसार अगर देश भर में सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को जोड़ कर देखा जाए तो लगभग 20 करोड़ वोटों पर सरकारी कर्मचारियों का इफेक्ट पड़ता है। ये असर छोटा नहीं है। ऐसे में सरकार चुनाव परिणामों को ध्यान में रखते हुए आगे आने वाले लोकसभा चुनाव में कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहती है। इंडियन पब्लिक सर्विस इम्पलाइज फेडेशन के महासचिव प्रेम चंद्र के मुताबिक पांच राज्यों के चुनाव परिणामों का असर कर्मचारियों और सरकार के बीच चल रही बातचीत पर पड़ेगा। राजस्थान और मध्य प्रदेश में जहां सरकारी कर्मचारी लंबे वक्त से पुरानी पेंशन स्कीम और सातवें वेतन आयोग के तहत भत्ते दिए जाने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों की नाराजगी का असर चुनाव नतीजों पर दिखा। अब कर्मचारी संगठनों को उम्मीद है कि सरकार अब बिना देर किए उनकी मांगें मानकर 2 साल से रुकी हुई उनकी सैलरी बढ़ोतरी को लागू कर देगी।

 दवाब में सरकार

दवाब में सरकार

नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन के संयोजक व ऑल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन के महासिचव शिव गोपाल मिश्रा के मुताबिक सरकार लोकसभा चुनाव में इतनी बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों के वोटबैंक की अनदेखी नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणामों के बाद उम्मीद है कि केंद्र सरकार जल्द कर्मचारियों की मांगों को पूरा करेगी। आपको बता दें कि उत्तरीय रेलवे मजदूर यूनियन ने पहले ही घोषणा की है कि वो आने वाले लोकसभा चुनाव में उसी राजनीतिक पार्टी का समर्थन करेंगे जो रेल कर्मियों की मांगों को पूरा करेगी। ऐसे में केंद्र सरकार चुनाव में 20 करोड़ वोटबैंक की नाराजगी नहीं झेलना चाहेगी।

 क्या है केंद्रीय और राज्य कर्मचारियों की मांगें

क्या है केंद्रीय और राज्य कर्मचारियों की मांगें

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों से अधिक कर्मचारियों की मांग है कि उनकी न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी की जाए। उनकी मांग है कि न्यूनतम वेतन को 18000 हजार से बढ़ा कर 26000 किया जाए। वहीं फिटमेंट फार्मूला 2.57 से बढ़ा कर 3.7 कर दिया जाए। वहीं पुरानी पेंशन स्कीम को बहाल किए जाने की मांग बढ़ी है। इसके अलावा सुपरवाजरों को ग्रेड पे 4600 से बढ़ा कर 4800 करने की मांग की जा रही है। रनिंग स्टाफ की अलाउंस बढ़ाई जाने की मांग की जा रही है।

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