7th Pay commission: ...तो इसलिए नहीं होगी आपकी सैलरी में बढ़ोतरी,जानिए क्या है वजह

नई दिल्ली। 7th Pay commission के तहत बढ़ी हुई सैलरी का इंतजार कर रहे देशभर के 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लालकिले से उनके लिए बड़ी घोषणा कर सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में भी दावा किया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर केंद्र सरकार 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी का तोहफा देकर अपने लिए बड़ा वोटबैंक सुरक्षित कर सकती है, लेकिन इस पूरे मामले जो बातें हम अब बताने जा रहे हैं उसके बाद न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी की आस लगाए लोगों को झटका लग सकता है।

 न्‍यूनतम वेतन 18000 रुपए से बढ़ाकर 26000 रुपए नहीं होने की वजह

न्‍यूनतम वेतन 18000 रुपए से बढ़ाकर 26000 रुपए नहीं होने की वजह

आपको बता दें कि इस साल सरकार को वेतन से ज्यादा पेंशन का भुगतान करना होगा। कहा जा रहा है कि अगले 3 सालों तक केंद्र सरकार को वेतन भुगतान से ज्यादा पेंशन का भुगतान करना होगा। माना जा रहा सरकार को वेतन के मुकाबले पेंशन भुगतान पर 10,000 करोड़ रुपए अधिक खर्च करने होंगे। ऐसे में सरकार दबाव में है और इस दवाब का असर केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन बढ़ोतरी की मांग पर पड़ेगा। माना जा रहा है कि इस मजबूरी के चलते केंद्रीय कर्मचारियों का न्‍यूनतम वेतन 18000 रुपए से बढ़ाकर 26000 रुपए नहीं किया जा रहा है।

 बढ़ा सरकार का व्यय

बढ़ा सरकार का व्यय

लोकसभा में पेश मध्यावधि व्यय रूपरेखा के मुताबिक आने वाले कुछ सालों तक सरकार को सब्सिडी और ब्याज भुगतान पर अधिक व्यय करना होगा। वित्त मंत्रालय के मुताबिक 2020-21 तक सरकार राजकोषीय घाटे को GDP के 3 प्रतिशत के स्तर पर लाने में कामयाब हो जाएगी। जबकि साल 2019-20 के लिए सरकार ने राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 3.1% और साल 2018-19 के लिए 3.3% रखा है। वहीं व्यय अनुमानित बजट 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक रहने की उम्मीद है। वहीं साल 2019-20 में यह बढ़कर 3.27 लाख करोड़ और 2020-21 में 3.76 करोड़ रुपए होने की उम्मीद है। इसका असर देश के GDP पर पड़ना तय है और ये अगले तीन वित्तीय वर्ष में क्रमश: 7.3%, 7.5% और 7.8% रहने का अनुमान है।

 वेतन खर्च में लगातार बढ़ोतरी

वेतन खर्च में लगातार बढ़ोतरी

सरकार का अनुमान है कि वेतन व्यय में लगातार बढ़ोतरी होगी। पिछले वित्तीय वर्ष में जो 1.50 लाख करोड़ था वो इस वित्तीय वर्ष में 1.58 लाख करोड़ रुपए रहेगा। वहीं 2019-20 में यह बढ़कर 1.66 लाख करोड़ रुपए और बढ़ता रहेगा। अब जरा वेतन व्यय के बाद पेंशन पर होने वाले खर्च पर एक नजर डालें। सरकार को उम्मीद है कि वेतन के मुकाबले पेंशन में होने वाला व्यय वेतन की तुलना में अधिक होगा। जहां चालू वित्त वर्ष में यह 1.68 लाख करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है, जबकि साल 2019-20 में ये 1.79 लाख करोड़ और साल 2020-21 में 1.84 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।

 सब्सिडी में भी बढ़ोतरी

सब्सिडी में भी बढ़ोतरी

इन सबके बाद सरकार पर सब्सिडी का भी भार लगातार बढ़ रहा है। खाद्य सब्सिडी भुगतान पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले इस साल बढ़कर 1.69 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया और इसमें लगातार बढ़ोतरी की उम्मीद है। खाद्य सब्सिडी के अलावा पेट्रोलियम सब्सिडी में बढ़ोतरी हुई। उर्वरक सब्सिडी, रक्षा खर्च जैसे तमाम खर्च का बोझ बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी कर खर्च का बोझ और नहीं बढ़ाना चाहती है। ऐसे में लग रहा है कि सरकार केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम वेतन को 18000 से 26000 रुपए करने की मांग नहीं मानेगी।

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