एक दूसरे को देखकर क्यों आती है उबासी? जानें मिरर न्यूरॉन्स के बारे में...
Yawn when we see each other: लोग अक्सर किसी और को जम्हाई लेते देखकर जम्हाई लेते हैं और आपको जानकर हैरानी होगी कि ये सिर्फ इंसानों ही नहीं बल्कि जानवरों में भी होता है। रिसर्चर्स का मानना है ये किसी को सहानुभूति देने या किसी तरह से समाजिक बंधन से जुड़ी हुई है।
स्टडी से पता चला है कि किसी अजनबी की तुलना में परिवार के सदस्य या दोस्त को जम्हाई लेते देखकर लोगों के जम्हाई लेने की संभावना कुछ ज्यादा होती है। इससे पता चलता है कि रिश्ता जितना करीब होगा, सहानुभूतिपूर्ण प्रतिक्रिया उतनी ही मजबूत होगी। मगर इसके पीछे की एक खास और जरूरी वजह दिमाग में मौजूद मिरर न्यूरॉन्स भी शामिल हैं।

मिरर न्यूरॉन्स वे कोशिकाएं हैं जो तब सक्रिय होती हैं जब कोई इंसान कुछ करता है और दूसरा उसे ऐसा करते हुए देखता है। ये न्यूरॉन्स हमें दूसरों को समझने और उनकी नकल करने में मदद करते हैं।
दिलचस्प बात ये है कि हर किसी को इस तरह करने का अनुभव नहीं होता। कुछ लोग, खास तौर पर ऑटिज्म या सिज़ोफ्रेनिया जैसी कुछ न्यूरोलॉजिकल स्थिति से पीड़ित लोग जम्हाई पर एक ही तरह से प्रतिक्रिया नहीं कर सकते हैं। इसने वैज्ञानिकों को ये बात पता लगाने के लिए प्रेरित किया है कि मस्तिष्क के काम में फर्क सोशल बिहेवियर को किस तरह से प्रभावित करता है।
जम्हाई अपने आप में कई शारीरिक कार्य करती है। ये मस्तिष्क के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करती है और खून में अधिक ऑक्सीजन लाकर तथा परिसंचरण में सुधार करके सतर्कता को बढ़ाती है। जम्हाई लेने के ये लाभ अकसर चर्चा का विषय रहते हैं। मगर इसका सामाजिक पहलू आज भी लोगों को आकर्षित करता है।
निष्कर्ष के तौर पर, संक्रामक जम्हाई शारीरिक जरूरतों और सामाजिक संबंधों का एक जटिल रिलेशन दिखाती है। जैसे-जैसे वैज्ञानिक इस व्यवहार का अध्ययन करना जारी रखते हैं, हम इस बारे में गहरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं कि हमारा मस्तिष्क कैसे काम करता है और हम अपने आस-पास के लोगों से कैसे जुड़ते हैं।












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