Exam में एक प्रश्न से Genius बना 5वीं का छात्र, Answer में लिखी 'दिल की बात', मिले पूरे मार्क
शिक्षा जीवन स्तर को सुधारने के साथ एक उच्च बौद्धिक स्तर भी स्थापित करती है। एक 5वीं के छात्र ने एक प्रश्न का उत्तर देकर इस बात को साबित भी कर दिया।

सामाजिक बुराइयों पर नियंत्रण देश को आगे ले जाने के लिए बेहद अहम है। ऐसा करने से समाज तो जागरूक होता ही है, इसके साथ लोगों के जीवन में भी कई सकारात्म बदलाव आते हैं। लेकिन अक्सर ये मानते हैं कि ऐसी गंभीर बातें सिर्फ केवल वयस्क ही सोचते हैं लेकिन से सिर्फ वहम है। अगर शिक्षा और संस्कार अच्छे मिलें तो ये समझ बच्चों में भी होती है। एक 5वीं क्लास के छात्र ने ये साबिक भी कर दिया है। दरअसल, उसने प्रचीन भारती सामाज में व्याप्त बुराइयों पर सुधार से जुड़े एक प्रश्न का जवाब देकर ना सिर्फ अपने माता पिता का दिल जीता बल्कि अपने टीचर को भी खुश कर दिया।
पाथफाइंडर पब्लिशिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक और सीईओ महेश्वर पेरी ने अपने ट्वीटर पर एक पोस्ट किया। जिसमें उन्होंने अपने बेटे की कक्षा 5 की परीक्षा के पेपर का एक अंश साझा किया, जिसमें उससे स्वतंत्रता-पूर्व युग में सामाजिक बुराइयों के बारे में एक प्रश्न पूछा गया था। प्रश्न में पूछा, "यदि आप स्वतंत्रता-पूर्व युग के एक समाज सुधारक होते, तो उस समय प्रचलित कौन-सी एक सामाजिक बुराई आप भारत को पिछड़े होने से रोकने के लिए मिटाना चाहेंगे? समझाइए क्यों?
जिस पर छात्र ने जवाब दिया, "मैं विधवा पुनर्विवाह अधिनियम शुरू करना पसंद करता। यदि कोई महिला विधवा हो जाती है, तो वे या तो सती हो सकती हैं या सफेद साड़ी पहन सकती हैं, अपने बालों को बांधकर बाहर नहीं जा सकती हैं। यदि ये विधवाएँ पुनर्विवाह कर सकती हैं, उनका जीवन कहीं बेहतर और खुशहाल होता।"
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