Elephant Rescue: हाथी का रेस्क्यू, सेना के इंजीनियर्स ने बनवाया लोहे का स्ट्रक्चर, उठ खड़ा होगा 'मोती'
भारतीय सेना के इंजीनियर्स एनजीओ के साथ 35 वर्षीय हाथी को बचाने का के लिए दिन रात एक कर रहे हैं।

Moti Elephant Rescue: मशहूर हाथी मोती को एक बार फिर से खड़ा करने के लिए एक अभियान के तौर पर कार्य कर रही है। मोता विशेष ध्यान रखा जा रहा है। ये हाथी उत्तराखंड में कमजोरी और चोटों के कारण बेहोश पाया गया था। वाइल्डलाइफ एसओएस की एक मेडिकल टीम 22 जनवरी से हाथी की देखभाल कर रही है।

हिल तक नहीं पार रहा मोती
मोती की हालत ये है कि वो अपने शरीरो हिला तक नहीं पा रहा। ऐसे में भारतीय सेना के इंजीनियर्स एक की टीम मोती के इलाज में मदद कर रही है। उसको फिर से पैरों के बल खड़े करने के लिए 24 घंटे प्रयास जारी हैं। इसके लिए एक विशेष स्ट्रक्चर का निर्माण किया गया है।

भारतीय सेना कर रही मदद
मशहूर हाथी मोती उत्तराखंड के रामपुर जिले में है। पिछले दो हफ्ते से वो उठ नहीं पा रहा है। उसके खराब स्वास्थ्य को देखते हुए मदद के लिए भारतीय सेना और एनजीओ सामने आए। वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह की मदद से भारतीय सेना के साथ काम कर रही है। एनजीओ ने कहा मोती के बचाव के लिए बंगाल सैपर्स बचाव सामने आए। बंगाल इंजीनियर ग्रुप एंड सेंटर रुड़की के भारतीय सेना कर्मियों की एक टीम ने हाथी को बेहतर इलाज का प्रयास कर रही है।

खड़ा करने के लिए 'पुली सिस्टम'
अपने सोशल मीडिया हैंडल पर वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम मोती स्वास्थ्य के बारे में नियमित अपडेट पोस्ट करती रहती है। ताजा अपडेट इंटाग्राम पर कुछ तस्वीरों के साथ किया गया। पोस्ट के साथ लिखा गया, "भारतीय सेना साइट पर है और मोती को अपने पैरों पर खड़ा करने में मदद करने के लिए एक स्ट्रक्चर का निर्माण किया गया है। आगे लिखा गया कि मोती के विशाल शरीर का वजन उसके क्षतिग्रस्त आंतरिक अंगों पर महत्वपूर्ण दबाव बनाता है, चाहे वह लेटा हो या उठाया जा रहा हो। मोती को खड़े होने में मदद करने के लिए हम कई तरह के हार्नेस और पुली सिस्टम का प्रयोग किया जाएगा"।

मोती की स्पेशल केयर
एसओएस ने कहा कि आज का हमारा एक प्रयास विफल रहा। हालांकि एक बार मोती खड़ा किया गया लेकिन अब मोती थक चुका है। वो विश्राम कर रहा है। मोती के आराम को बेहतर बनाने के लिए रात दिन प्रयास किए जा रहे हैं। उसे खाने और दवाओं का विशेष ध्यान रहा जा रहा है। खाने में मोती तरल पदार्थ दिए जा रहे हैं। उम्मीद है कि रात भर का आराम करने के बाद मोती सुबह एक बार फिर से खड़ा होने के लिए तैयार हो जाएगा।
Recommended Video













Click it and Unblock the Notifications