Navratri 2022: दुर्गा पूजा के साथ मिट्टी को 'जहर' से बचाने का संदेश! अनोखी तस्वीरों का करिए दीदार
नई दिल्ली, 02 अक्टूबर। नवरात्रि के 9 दिनों में जगह- जगह सजे दुर्गा पंडाल शाम ढलते ही एक अलग ही शोभा बनते हैं। कोलकाता की दुर्गा पूजा की बात ही कुछ अलग है। यहां अब एक अनोखा दुर्गा पंडाल इन दिनों सुर्खियों में छाया है। दरअसल, इस दुर्गा पंडाल में आने वाले मां दुर्गा के भक्तों को देवी की तस्वीरों के दर्शन के साथ मिट्टी में बदले केमिकल और उससे होने वाली नुकसान के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है।

बोस लेन कोलकाता की दुर्गा पूजा
कोलकाता में ये दुर्गा पूजा बोस लेन दुर्गा पूजा कमेटी की ओर से आयोजित की जाती है। कोलकाता में सजे भव्य पंडालों में बोस लेन का दुर्गा पूजा पंडाल अपनी खास विशेषता का कारण आकर्षण का केंद्र बन रहा है। दरअसल, इसे एक खास थीम के आधार पर सजाया गया है। जिसका उद्देश्य मृदा संरक्षण से प्रति लोगों को शिक्षित और जागरूक करना है।

पंडाल की थीम है 'मां'
इस खास पंडाल को वास्तुकार अदिति चक्रवर्ती ने बनाया है। पंडाल को मिट्टी के विभिन्न रंगों से सजाया गया है। इसकी थीम है 'माँ'। इस खास पंडाल के जरिए ये दिखाने का प्रयास किया गया है कि मिट्टी और मां का एक दूसरे के साथ चोली दामन वाला संबंध है। मिट्टी का मानव जीवन गहरा नाता है। सोवाबाजार या श्यामबाजार मेट्रो रेल स्टेशन से कोलकाता के इस दुर्गा पूजा पंडाल तक पैदल चलकर पहुंचा जा सकता है।

मिट्टी से मिलता है भोजन- दुर्गा पूजा समिति
इस पूजा समिति के शीर्ष आयोजकों में से एक सौमेन दत्ता ने कहा, "मिट्टी की खेती की जाती है, भोजन का उत्पादन होता है। पेड़ मिट्टी में उगते हैं। हमें उन पेड़ों से ऑक्सीजन मिलती है। हम मिट्टी में रहते हैं। मिट्टी से हमारा संबंध बहुत गहरा है। इसलिए हम लोगों को एक खास संदेश देने के लिए धरती को मां के रूप में पेश कर रहे हैं।"

दुर्गा पूजा के इतिहास में अनोखा पंडाल
कोलकाता बोस लेन दुर्गा पूजा पंडाल मिट्टी से निकले प्राकृतिक रंगों से सजा है। ये रंग झारखंड के लोधासुली स्थित मल्लारपुर में गोबिंदपुर गांव की मिट्टी ने निकले हैं। यहां की मिट्टी को तराशने के बाद इसमें से एक नीला रंग निकलता है। यह काशी बोस लेन पूजा मंडप में इसका प्रयोग किया गया है। दुर्गा पूजा समिति के सदस्यों का दावा है कि दुर्गा पूजा के इतिहास में इस तरह की यह पहली पहल है जब किसी मंडप को मिट्टी से निकले प्राकृतिक रंग से सजाया गया हो।

मंडप के जरिए मृदा संरक्षण का संदेश
मंडप में प्रवेश करते ही मिट्टी के विभिन्न रंग दिखाई देते हैं। मंडप में वाद्य यंत्रों को सजाया गया है। आयोजकों का दावा है कि पंडाल के निर्माण में सभी तरह की ईको फ्रेंडली सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। मूर्ति की सजावट रंगीन मिट्टी का उपयोग करती है। आयोजक सौमेन ने यह भी कहा, "पेड़ ही नहीं हमें मिट्टी को भी संरक्षित रखने की आवश्यकता है।"












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