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जब गरीबों के लिए रात 11 बजे खुला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा,जानिए मामला

देश में आज भी लोगों की न्यायप्रणाली के प्रति लोगों की उम्मीद क्यों बरकरार रहे हैं, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में इसका ताजा उदाहरण देखने मिला है,जब अदालत ने देर रात करीब 11 बजे ग्रामीणों की सुनवाई के लिए अपना दरवाजा खोल दिया।

बिलासपुर, 05 जुलाई। देश में आज भी लोगों की न्यायप्रणाली के प्रति लोगों की उम्मीद क्यों बरकरार रहे हैं , छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में इसका ताजा उदाहरण देखने मिला है,जब अदालत ने देर रात करीब 11 बजे गरीब ग्रामीणों की सुनवाई के लिए अपना दरवाजा खोल दिया। मिली जानकारी के मुताबिक छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बागबहरा इलाके में रहने वाले कुछ लोगों घरों को तोड़ने से जुड़ा हुआ है। इन लोगों पर सरकरी जमीन पर कब्ज़ा करने का आरोप है।

रात 11 बजे खुले अदालत के दरवाजे

रात 11 बजे खुले अदालत के दरवाजे

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के लालपुर में गुरुवार को बीते 75 सालों से सरकारी जमीन पर रह रहे परिवारों पर आफत आन पड़ी, जब उनके मकानों को तोड़ने के लिए सरकारी अमला पहुंच गया। सरकारी कार्रवाई से हड़बड़ये ग्रामीणों ने अदालत की शरण में जाने का फैसला लिया और कल शाम करीब 7.30 बजे अदालत में याचिका दायर कर त्वरित सुनवाई करने का आग्रह किया। ग्रामीणों की समस्या को गंभीर मानते हुए जस्टिस पी.सैम कोशी की एकल पीठ ने रात 11 बजे मामले की सुनवाई करते हुए प्रशासन की कार्रवाई पर रोक लगा दी।

अदालत की दखल से मिली बड़ी राहत

अदालत की दखल से मिली बड़ी राहत

मिली जानकारी के मुताबिक गुरुवार की देर शाम महासमुंद के ग्रामीण फूलदास कोसरिया और योगेश की ओर से वकील नैय्यर, शांतम अवस्थी, प्रांजल शुक्ला, फैज काजी और अभिषेक बंजारे ने हाईकोर्ट पहुंचे थे। वकीलों ने रजिस्ट्री के अफसरों को बताया कि महासमुंद जिले के कुछ गांववालों की याचिका पर फ़ौरन सुनवाई की जरूरत है। रजिस्ट्री के अधिकारियों इसपर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अरूप कुमार गोस्वामी को बताई,जिसके बाद उन्होंने निर्देश केबाद जस्टिस पी.सैम कोशी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए याचिका मंजूर करते हुए रात 10.45 बजे सुनवाई की।

आज़ादी के पहले से रह रहे हैं ग्रामीण, चलने वाला था बुलडोजर

आज़ादी के पहले से रह रहे हैं ग्रामीण, चलने वाला था बुलडोजर

इस मामले में सुनवाई के दौरान तथ्य पेश किया गया कि करीब 75 सालों से यानी आजादी के पहले से ग्रामीण सरकारी जमीन पर काबिज हैं। इसके लिए उनसे वर्ष 1982 से कर भी लिया जा रहा है। इसके बाद भी प्रशासन ने नोटिस देकर केवल 24 घंटे का वक़्त देकर कब्जा खाली करने का आदेश जारी कर दिया। अदालत को बताया गया कि प्रशासन का अमला ग्रामीणों को घर से बेदखल करने के लिए गुरुवार की शाम 5.30 बजे मौके पर पहुंच गया था ।

 अगली सुनवाई की तारीख तय

अगली सुनवाई की तारीख तय

फरियादियों की तरफ से अदालत को बताया गया कि 8 जुलाई और CMO ने 12 जुलाई को टैक्स चुकाने के बाद भी तहसीलदार ने नोटिस जारी कर दिया था । इसमें उन्हें 24 घंटे में कब्जा छोड़ने करने के निर्देश दिए गए थे । इसके पश्चात भी ग्रामीणों ने कब्ज़ा नहीं छोड़ा, तब प्रशासन के अमले ने ग्रामीणों पर दबाव बनाना शुरू किया।

इसके बाद उन्हें न्याय के लिए रात्रि के समय में अदालत अर्जेंट सुनवाई के लिए गुहार लगानी पड़ी। जस्टिस पीसैम कोशी ने शुरुआती सुनवाई के बाद प्रशासन की कार्रवाई को रोकते हुए 10 अगस्त को अगली सुनवाई की तारीख दी हैं।इस घटना को लेकर ग्रामीणों में उम्मीद जागी है कि अगली सुनवाई में भी प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ सफलता मिल सकती है,हालाकि देखना होगा कि इस प्रकरण में आगे क्या फैसला होता है।

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