डूब रहे थे 4 बच्चे, उफनती नदी में कूदा भिखारी,बचा ली जान
रविवार को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर इंसानियत की मिसाल पेश करती खबर सामने आई,जहां बारिश की वजह से लबालब होकर बाह रही अरपा नदी की धार में फंसकर डूब रहे 4 बच्चों की जान एक अधेड़ भिखारी ने बचा ली।
बिलासपुर, 25 जुलाई। रविवार को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर इंसानियत की मिसाल पेश करती खबर सामने आई,जहां बारिश की वजह से लबालब होकर बाह रही अरपा नदी की धार में फंसकर डूब रहे 4 बच्चों की जान एक अधेड़ भिखारी ने बचा ली। यह घटना इसलिए भी चर्चा में हैं,क्योंकि जब बच्चे डूब रहे थे,उस समय वहां अच्छी खासी भीड़ उपस्थित थी,लेकिन किसी ने बच्चो की जान बचाने का प्रयास नहीं किया।

मछली पकड़ रहे थे बच्चे
मिली जानकारी के मुताबिक रविवार दोपहर को तालापारा इलाके के रहने वाले 4 किशोर आकाश दिवाकर (15 वर्ष ), इरफान (16 वर्ष ), आर्यन (11वर्ष ) और आशुतोष पटले (11 वर्ष ) खेलते हुए गोंडपारा में नदी के किनारे चले गए और मछली पकड़ने लगे। नदी का बहाव बेहद तेज था,इस कारण बच्चे नदी की तेज धार की चपेट में आसानी से आ गए। नदी के इस पॉइंट को रिवर व्यू के नाम से भी जाना जाता है,इसलिए रविवार के दिन अच्छी खासी तादाद में लोग वहां मौजूद थे,लेकिन किसी ने भी बच्चो की जान बचाने के लिए कोशिश नहीं की।

बच्चों की नहीं की भीड़ में मदद, देवदूत बनकर पहुंचा भिखारी
बच्चो को डूबता देख मौजूद भीड़ घटना के मोबाइल वीडियो और तस्वीर बनाने में जुटी थी,लेकिन कोई भी बच्चों को बचाकर लाने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पा रहा था। तभी वहां एक अधेड़ उम्र के रमेश कुमार सूर्यवंशी गुजर रहे थे, जो रतनपुर क्षेत्र के परसौड़ी परसदा में रहने वाले हैं। बच्चो को डूबता देखकर
उन्होंने बिना देरी किये उफनती नदी में छलांग लगा दी और 20 फीट गहराई में जाकर रस्सी के सहारे बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल ले आये। पूरी घटना की जानकारी मिलने पर वहां पुलिस भी पहुंची और बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया ।

जान बचाने वाले को भी है मदद की जरूरत,हैं बेहद निर्धन
बताया जा रहा है कि बच्चों की जान बचाने वाले रमेश कुमार सूर्यवंशी बेहद गरीब हैं और भीख मांगकर गुजारा करते हैं। बहरहाल उनकी बहादुरी की हर कोई तरफ कर रहा है। बच्चों को नदी से बाहर निकालने के बाद रमेश ने बच्चो को मौके पर पहुंची पुलिस को सौंप दिया,जहा संजीवनी 108 एम्बुलेंस से की बच्चों को अस्पताल भेजा गया। बच्चो अब स्वस्थ हैं ,इलाज के बाद उन्हें उनके परिजनों को सौंप दिया गया है ।
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