कौन हैं बिहार की बेटी कमला प्रसाद-बिसेसर? त्रिनिदाद में गूंजा ‘बक्सर की माटी’ का नाम, PM ने दिया खास तोहफा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने त्रिनिदाद और टोबैगो में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए एक खास भावनात्मक लम्हा साझा किया। उन्होंने वहां की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर को 'बिहार की बेटी' कहकर पुकारा और बताया कि उनके पूर्वज बिहार के बक्सर से थे। ये सुनकर वहां मौजूद भारतीय मूल के लोगों के चेहरे गर्व से चमक उठे।
पीएम मोदी ने न सिर्फ इस रिश्ते को दिल से महसूस कराया, बल्कि एक बड़ा तोहफा भी दिया। अब वहां के 6वीं पीढ़ी के भारतीय मूल के लोगों को OCI कार्ड मिलेगा।

बक्सर से थे प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर के पूर्वज
पीएम मोदी ने कहा कि भारत और प्रवासी भारतीय सिर्फ खून या उपनाम से नहीं, बल्कि 'अपनापन' से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि कमला बिसेसर के पूर्वज बक्सर (बिहार) से थे, और वो खुद भी वहां जा चुकी हैं। लोग उन्हें 'बिहार की बेटी' मानते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार की विरासत न केवल भारत की, बल्कि पूरे विश्व की धरोहर है।
कौन हैं कमला बिसेसर?
कमला बिसेसर कई ऐतिहासिक उपलब्धियों वाली लीड़र हैं। वह त्रिनिदाद और टोबैगो की वर्तमान प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने अप्रैल 2025 के आकस्मिक चुनाव में बड़ी जीत दर्ज कर 1 मई को दोबारा पदभार संभाला। यह उनका दूसरा कार्यकाल है, इससे पहले वे 2010 से 2015 तक देश की पहली महिला प्रधानमंत्री रह चुकी हैं।
वे सिर्फ प्रधानमंत्री ही नहीं, बल्कि देश की पहली महिला अटॉर्नी जनरल, विपक्ष की नेता और राष्ट्रमंडल देशों की पहली महिला अध्यक्ष भी बनीं। वे 2010 से यूनाइटेड नेशनल कांग्रेस (UNC) की नेता हैं और 1995 से सिपरिया क्षेत्र की सांसद हैं।
कमला का राजनीतिक सफर ऐतिहासिक रहा है। वे भारतीय मूल की पहली महिला हैं जो भारत और दक्षिण एशिया के बाहर किसी देश की प्रधानमंत्री बनीं। अप्रैल 2025 में उन्होंने UNC गठबंधन के साथ 41 में से 26 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की। उन्होंने अपराध नियंत्रण, सरकारी कर्मचारियों की पेंशन-सैलरी में सुधार और सरकारी तेल कंपनी पेट्रोट्रिन को दोबारा खड़ा करने का संकल्प लिया है। उनके नेतृत्व में त्रिनिदाद और टोबैगो की राजनीति में नारी शक्ति का नया दौर शुरू हुआ है।
संस्कृतिक रिश्तों की गर्मजोशी
पीएम मोदी ने बताया कि कैसे पटना, बनारस, दिल्ली और कोलकाता जैसे शहरों के नाम वहां की सड़कों पर भी मिलते हैं। उन्होंने कहा कि त्रिनिदाद में नवरात्रि, महाशिवरात्रि और जन्माष्टमी को पूरे उत्साह से मनाया जाता है और 'चौताल' और 'बैठक गाना' जैसी भारतीय परंपराएं आज भी जीवित हैं।
भारतीय मूल की आबादी और नई घोषणा
त्रिनिदाद और टोबैगो की करीब 40% आबादी भारतीय मूल की है। भारत सरकार के अनुसार, वहां 556,800 लोग भारतीय मूल के हैं, जिनमें से केवल 1,800 एनआरआई हैं, बाकी वहीं के नागरिक हैं जिनके पूर्वज 1845 से 1917 के बीच गिरमिटिया मजदूर बनकर वहां गए थे। पीएम मोदी ने घोषणा की कि अब छठी पीढ़ी तक के भारतीय मूल के लोगों को भी OCI कार्ड मिलेगा, जिससे वे भारत में आसानी से रह और काम कर सकेंगे।
प्रधानमंत्री का भव्य स्वागत
त्रिनिदाद और टोबैगो पहुंचने पर पीएम मोदी को 38 मंत्रियों और 4 सांसदों के साथ देश की प्रधानमंत्री कमला बिसेसर ने हवाई अड्डे पर स्वागत किया। पियार्को इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Piarco International Airport) पर उन्हें Guard of Honour भी दिया गया।
क्या त्रिनिदाद और टोबैगो अलग-अलग देश हैं?
नहीं, यह एक देश है जो दो बड़े द्वीपों (islands) से मिलकर बना है:
- त्रिनिदाद (Trinidad)- बड़ा द्वीप है, यही देश की मुख्य भूमि (Mainland) है।
- टोबैगो (Tobago)- छोटा द्वीप है, जो त्रिनिदाद के उत्तर-पूर्व में स्थित है।
दोनों द्वीप मिलकर एक संयुक्त देश (Republic of Trinidad and Tobago) बनाते हैं।
इतिहास में क्या हुआ था?
- पहले ये दोनों द्वीप अलग-अलग कॉलोनी (British colonies) हुआ करते थे।
- बाद में 1962 में इन्हें मिलाकर एक स्वतंत्र देश बना दिया गया।
- तब से इसका आधिकारिक नाम- Republic of Trinidad and Tobago (त्रिनिदाद और टोबैगो गणराज्य) है।
लोग इसे कैसे बोलते हैं?
आम बोलचाल में लोग इसे बस 'त्रिनिदाद' कह देते हैं, क्योंकि यह बड़ा द्वीप है और राजधानी Port of Spain यहीं है। लेकिन पूरा नाम- त्रिनिदाद और टोबैगो है, क्योंकि दोनों द्वीप मिलकर एक ही देश बनाते हैं।












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