Tejashwi 2025 Leadership की बात पर क्या बोले ? बौखलाई भाजपा बोली- नीतीश तेजस्वी को धोखा दे रहे
तेजस्वी 2025 में नेतृत्व के सवाल पर सधी हुई प्रतिक्रिया देते दिखे। BJP ने कहा कि नीतीश तेजस्वी यादव के धोखा दे रहे हैं। जदयू का कहना है कि 70 साल के नीतीश पहले भी युवा लीडरशिप की बात कह चुके हैं।

Tejashwi 2025 Leadership की बात सुर्खियों में है। नीतीश कुमार की पहचान मुख्यमंत्री के अलावा 70 वर्षीय जद (यू) सुप्रीमो के रूप में भी है। वेटरन राजनेता की फेहरिश्त में शुमार नीतीश कुमार ने खुद को पीएम पद का उम्मीदवार मानने से इनकार कर दिया। हालांकि, बिहार की कमान तेजस्वी के हाथों सौंपे जाने का संकेत देते हुए नीतीश ने कहा, 2025 में बिहार का चुनाव तेजस्वी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। इस पर तेजस्वी यादव संयमित बयान देते दिखे। उन्होंने कहा, पहली चुनौती 2024 में बीजेपी को सत्ता से बेदखल करना है। नीतीश की सहयोगी रही भाजपा ने भी इस पर रोचक ढंग से रिएक्ट किया है।
क्या बोले CM नीतीश
मंगलवार को विधायकों के साथ बैठक के दौरान नीतीश ने एक बार फिर खुद को लोकसभा चुनाव 2024 में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में मानने की संभावनाओं को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि "एकजुट विपक्ष" ही 2024 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा को हरा सकता है।
मुख्यमंत्री ने तेजस्वी की ओर इशारा किया
विधायकों के साथ बैठक में नीतीश क्या बोले, इस पर सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के विधायक दल के नेता महबूब आलम ने बताया, "मुख्यमंत्री जी ने तेजस्वी जी की ओर इशारा किया और कहा कि वह भविष्य के नेता हैं, जिनके नेतृत्व में राज्य में 2025 के विधानसभा चुनाव लड़े जाएंगे।" बता दें कि महबूब नीतीश सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं।
तेजस्वी नीतीश के बयान पर क्या बोले ?
Bihar Election Tejashwi के नेतृत्व में लड़ने की बात सुर्खियों में आते ही जब पत्रकारों ने टिप्पणी के लिए तेजस्वी यादव से संपर्क किया तो उन्होंने विशेष संयम दिखाया। उन्होंने कहा, "वर्तमान में, हम एक साथ सरकार चला रहे हैं। हमें अपने सामने प्रमुख चुनौती पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।" तेजस्वी ने कहा कि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले 2024 के लोकसभा चुनाव बड़ी चुनौती है।
'तेजस्वी रिमोट कंट्रोल से काम कर रहे'
इस बीच, भाजपा नीतीश कुमार और राजद के बीच एक खाई बनाने की कोशिश करती दिखी। अगस्त 2022 की सियासी उथल-पुथल के बाद बीजेपी को सत्ता गंवानी पड़ी थी। करीब चार महीनों के बाद नीतीश के 'तेजस्वी की लीडरशिप' वाले कमेंट पर बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री नितिन नबीन ने कहा, "अगर नीतीश कुमार किसी को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहते हैं, तो उन्हें वास्तव में सत्ता सौंपने का नैतिक साहस दिखाना चाहिए। वह ऐसा नहीं कर पाएंगे क्योंकि इससे जद (यू) में विद्रोह होगा। नितिन नबीन का दावा है कि जदयू के लोग पहले से ही परेशान हैं क्योंकि 'तेजस्वी रिमोट कंट्रोल से शो चला रहे हैं।'
BJP का दावा- नीतीश तेजस्वी को धोखा दे रहे
भाजपा के एक अन्य पूर्व मंत्री जिबेश कुमार ने जीतन राम मांझी के मुख्यमंत्री बनने की घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा, नीतीश कुमार ने पहले मांझी को सीएम बनाया फिर बिना किसी कारण के उनका निष्कासन हुआ। जिबेश कुमार ने जोर देकर कहा, "नीतीश कुमार ऐसे व्यक्ति हैं जो सत्ता के बिना नहीं रह सकते। उन्होंने चुनौती भरे अंदाज में कहा, नीतीश तेजस्वी को धोखा दे रहे हैं। चाहें तो वे यह बात लिख कर देने को तैयार हैं।
भविष्य तेजस्वी जी और उनके जैसे युवाओं का
विजय कुमार चौधरी नीतीश कुमार के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक हैं। बिहार सरकार में कई प्रमुख विभागों संभाल रहे विजय कुमार ने नीतीश की घोषणा पर कहा, मुख्यमंत्री जी काफी समय से कह रहे हैं कि भविष्य तेजस्वी जी और उनके जैसे युवाओं का है। उन्होंने कल नालंदा में ऐसा कहा था, जहां मैं भी मौजूद था। उन्होंने आज से उस बात को दोहराया।
नीतीश तेजस्वी को समर्थन देंगे
चौधरी ने यह भी कहा कि विधायकों की बैठक में नीतीश ने फिर से स्पष्ट कर दिया है कि वह प्रधानमंत्री पद की दौड़ में नहीं हैं, लेकिन उन्हें अभी भी लगता है कि अगर विपक्ष एकजुट होता है तो भाजपा को 2024 में हराया जा सकता है। इसलिए वह उस दिशा में काम करना जारी रखेंगे।" बता दें कि नीतीश कुमार ने अपने गृह जिला- नालंदा एक दंत चिकित्सालय का उद्घाटन करने के मौके पर तेजस्वी यादव को समर्थन देने की बात कही थी।
बिहार की नाटकीय सियासत
गौरतलब है कि राजद संस्थापक लालू प्रसाद के छोटे बेटे तेजस्वी यादव को 2020 के विधानसभा चुनावों में प्रभावशाली प्रदर्शन का श्रेय दिया जाता है। भले ही तेजस्वी बहुमत के आंकड़े से दूर रहे, लेकिन 'महागठबंधन' का नेतृत्व कर रहे तेजस्वी की कड़ी चुनौती के सामने एनडीए (जदयू+भाजपा+अन्य) मुश्किल से जीत हासिल कर सका था। फिलहाल, RJD 79 सीटों के साथ विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी है। 2020 के विस चुनाव के बाद नीतीश सीएम तो बने लेकिन उन्होंने अगस्त 2022 में भाजपा का साथ छोड़कर तेजस्वी से हाथ मिलाया और बिहार की सियासत में नाटकीय मोड़ आ गया। फिलहाल, 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में नंबर गेम की बात करें तो इस मामले में बिहार सरकार के पक्ष में आश्वस्त करने वाले आंकड़े हैं। नीतीश का दावा है कि उनके साथ 165 विधायक हैं। भाजपा के 77 विधायकों के साथ विपक्ष में 78 विधायक हैं। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) का एक MLA भी नीतीश के खिलाफ है।












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