Single Plastic Alternate: मक्के के छिलके से युवक बना रहा कप प्लेट और झोला, बच्चों को भी दे रहे ट्रेनिंग
Single Plastic Alternate: 26 वर्षीय मोहम्मद नाज़ को कई कंपनियों से नौकरी के ऑफर भी मिले लेकिन वह कुछ नया करने के जुनून में गांव वापस आए। सिंगल प्लास्टिक के इस्तेमाल बैन होने के बाद उन्होंने प्लास्टिक का प्राकृतिक...
Single Plastic Alternate: देश भर में सिंगल प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगने के बाद दुकानदार और ग्राहकों को सामान ले जाने में काफी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। सभी लोग सिंगल प्लास्टिक पर रोक के बाद इसका अलटरनेट तलाशने में जुट गए हैं। इसी परेशानियों को देखते हुए बिहार के लाल ने सिंगल यूज प्लास्टिक का अलटरनेट तैयार कर लिया है। दरअसल मोहम्मद नाज़ मक्के के छिलके से कप प्लेट और झोला सहित कई उत्पाद बना रहे हैं।

सिंगल प्लास्टिक बैन होने के बाद अनोखा प्रयोग
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से ताल्लुक रखने वाले मोहम्मद नाज ने सिंगल प्लास्टिक बैन होने के बाद अनोखा प्रयोग किया और वह इसमें कामयाब भी हुए। आपको बता दें कि नांज़ मक्के के छिलके से कप, प्लेट, पत्तल, कटोरा जैसे उत्पाद तैयार कर रहे हैं। ग़ौरतलब है कि नाज़ इस प्रयोग की ट्रेनिंग कई स्कूलों में जाकर बच्चों को भी दे रहे हैं ताकि आने वाले दिनों लोग पूरी तरह से प्लास्टिक से दूरी बनाते हुए पर्यावरण भी संरक्षित कर सकें। मुजफ्फरपुर जिले के मुरारपुर गांव (तुर्की ब्लॉक क्षेत्र) निवासी मोहम्मद नाज ने के प्रयोग की काफी सराहना हो रही है।

वाटरप्रूफ कप, प्लेट आदि बनाने में सिर्फ 50 पैसे की लागत
26 वर्षीय मोहम्मद नाज़ को कई कंपनियों से नौकरी के ऑफर भी मिले लेकिन वह कुछ नया करने के जुनून में गांव वापस आए। सिंगल प्लास्टिक के इस्तेमाल बैन होने के बाद उन्होंने प्लास्टिक का प्राकृतिक अलटरनेट बनाने का सोचा। इसी सोच के साथ उन्होंने बांस के पत्तों से कप, प्लेट इत्यादि बनाने की सोची लेकिन कामयाबी नहीं मिली। फिर उन्होंने मक्के के छिलके से कप, प्लेट बनाने का प्रयोग किया और कामयाब हो गए। ग़ौरतलब है कि वाटरप्रूफ कप, प्लेट आदि बनाने में सिर्फ 50 पैसे की लागत आती है।

सिंगल प्लास्टिक का अलटरनेट है मक्के का छिलका
मोहम्मद नाज़ ने इस अनोखे काम को करने से पहले काफी रिसर्च किया, फिर उन्होंने कई तरह के प्रयोग किए। उसके बाद आखिर में उन्होंने सिंगल प्लास्टिक का अलटरनेट निकालते हुए मक्के के छिलके से कप, प्लेट, पत्तल, कटोरी और झोला समेत कई ज़रूरी चीज़ें बना रहे हैं। वहीं जानकारों की मानें तो सिंगल प्लास्टिक के अलटरनेट के तौर पर मक्के का छिलका ज्यादा बेहतर ऑप्शन है। यह काफी किफ़ायती और पर्यावरण के एतबार से भी सुरक्षित है।

पूरे देश में हो रही नाज के प्रयोग की सराहना
मोहम्मद नाज़ के प्रयोग के बारे में तो आपको जानकारी मिल गई, अब उनकी शिक्षा के बारे में भी आपको हम जानकारी देने जा रहे हैं। इंटर मुकम्मल करने बाद नाज ने आगे की पढ़ाई के लिए हैदराबाद का रुख किया। 2014 में जवाहर लाल नेहरू टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से बीटेक और 2016 में एमटेक किया की डिग्री हासिल, इसके साथ ही वहीं उन्होंने बतौर लेक्चरर छह महीने काम भी किया। कई कंपनियों से जॉब ऑफर मिला लेकिन कुछ अलग करने का जुनून उन्हें गांव की तरफ खींच लाया और आज उनके अनोखे प्रयोग की पूरे देश में चर्चा हो रही है।
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