Sim Box Cyber Fraud: अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का पर्दाफाश, मुख्य सरगना समेत 6 गिरफ्तार, करोड़ों की संपत्ति ज़ब्त
Sim Box Cyber Fraud: भारत में साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच आर्थिक अपराध इकाई (Economic Offences Unit - EOU) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सिम बॉक्स साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। इस गिरोह का मुख्य सरगना 21 वर्षीय हर्षित कुमार है, जिसे सुपौल जिले के गौसपुर से दबोचा गया।
अब तक की जांच में सामने आया है कि यह गिरोह भारत सहित 13 देशों में फैले नेटवर्क के जरिए एक संगठित ठगी का संचालन कर रहा था। EOU की विशेष टीम द्वारा गठित SIT (विशेष जांच दल) ने एक साथ 22 ठिकानों पर रेड मारते हुए इस नेटवर्क से जुड़े 6 सदस्यों को गिरफ्तार किया।

अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट में मुख्य रूप से शामिल हैं:
हर्षित कुमार (मुख्य सरगना)
मोहम्मद सुल्तान (CSC संचालक)
चार पॉइंट ऑफ सेल संचालक
सुमित शाह (सिम सप्लायर, पश्चिम बंगाल, बीरभूम)
कैसे काम करता था यह गिरोह?
इस साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का संचालन अत्याधुनिक तकनीकों और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के माध्यम से किया जा रहा था। गिरोह हर दिन 10,000 से ज्यादा फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल करता था। ये कॉल्स भारतीय उपभोक्ताओं को विदेशी नंबरों से की जाती थीं, ताकि लोगों को भ्रमित कर वित्तीय धोखाधड़ी की जा सके।
समानांतर टेली-कम्युनिकेशन एक्सचेंज:
केंद्रीय दूरसंचार मंत्रालय ने पुष्टि की है कि इस फर्जी समानांतर नेटवर्क के ज़रिए सिर्फ दो हफ्तों में 2.5 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। वहीं जनवरी 2025 से अब तक कुल नुकसान 60 करोड़ रुपए के पार जा चुका है। हर्षित और उसके सहयोगी लेन-देन के लिए क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग करते थे। हर्षित के पास 30-35 बैंक अकाउंट मिले हैं।
मोतिहारी स्थित एक अकाउंट में 2.50 करोड़ रुपये जमा, खाता फ्रीज़ कर दिया गया है। कुल चल-अचल संपत्ति 12-14 करोड़ रुपये के अनुमानित है। जांच में सामने आया है कि हर्षित थाईलैंड, वियतनाम, कंबोडिया, चीन, यूएई, जर्मनी, यूके सहित दर्जनभर देशों की यात्रा कर चुका है।
विदेशों से मंगाया उपकरण, 1000 फर्जी सिम की आपूर्ति
वियतनाम और चीन से 8 सिम बॉक्स उपकरण मंगवाए गए। टेलीग्राम ग्रुप और सोशल मीडिया के माध्यम से विदेशी साइबर अपराधियों से जुड़े हुए थे। झारखंड से फर्जी सिम कार्ड मंगवाए जाते थे। सिंडिकेट द्वारा झारखंड (पाकुड़) से बड़ी संख्या में फर्जी सिम मंगवाए गए। मार्च से अब तक करीब 1000 फर्जी सिम की आपूर्ति की गई थी। टेलीकॉम डिस्ट्रीब्यूटर की मिलीभगत से बायोमेट्रिक धोखाधड़ी कर सिम जारी हुए थे।
EOU की छापेमारी के दौरान जब्त की गई सामग्री:
8 सिम बॉक्स डिवाइस
सैकड़ों सिम कार्ड (उपयोगी व अनुपयोगी)
कई बैंकों के पासबुक, एटीएम, क्रेडिट कार्ड
संवेदनशील दस्तावेज और टेली-कम्युनिकेशन उपकरण
जल्द CBI और IB की भी जांच
EOU के एडीजी नैयर हसनैन खान के मुताबिक, चूंकि यह मामला बहु-राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय है, इसलिए CBI (केंद्रीय जांच ब्यूरो) और IB (इंटेलिजेंस ब्यूरो) की विशेष टीमें भी इस जांच में शामिल होंगी। उन्होंने कहा कि: "यह साइबर फ्रॉड गिरोह अत्यंत पेशेवर ढंग से काम करता था। इनकी अवैध संपत्तियों को जल्द जब्त किया जाएगा और अन्य दोषियों को भी गिरफ्तार किया जाएगा।"
जांच जारी, और बड़े खुलासे संभव
EOU की प्रारंभिक जांच से यह स्पष्ट है कि यह गिरोह एक अंतरराष्ट्रीय साइबर माफिया का हिस्सा है। आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। वित्तीय लेन-देन, सिम कार्ड नेटवर्क, और डिजिटल ट्रेसिंग की गहराई से जांच हो रही है।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि डिजिटल सुरक्षा सिर्फ एक तकनीकी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा बन चुकी है। भारत में टेली-कॉम, डिजिटल पेमेंट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के बीच सिनर्जी और सख्त मॉनिटरिंग की ज़रूरत है।












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