बिहार: स्वास्थ्य व्यवस्था की फिर खुली पोल, महिला ने गेट के सामने सड़क पर ही दिया बच्ची को जन्म
सरिता कुमारी ने सदर अस्पताल के गेट के सामने ही सड़क पर बच्ची को जन्म दिया। वहीं महिला के पति सोनू कुमार ने बताया कि वह दिहाड़ी मजदूर है। उसकी पत्नी प्रेगनेंट थी औऱ 9 महीने पूरे हो चुके थे।
नालंदा, 17 अगस्त 2022। बिहार में सरकारें बदल रही हैं लेकिन व्यवस्था में बदलाव नज़र नहीं आ रहा है। आए दिन शिक्षा और स्वास्थ व्यवस्था के दावों की पोल खुल रही है। बिहार शरीफ सदर अस्पताल से एक और स्वास्थ्य के कुव्यस्था का वीडियो सामने आया है। अस्पताल में प्रसव के लिए महिला पहुंची लेकिन उसे प्रसव कक्ष में भर्ती नहीं होने के कारण प्रसव पीड़ा से कड़ाहते हुए महिला ने अस्पताल के गेट पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। मीडिया कर्मियों की पहले के बाद जच्चा और बच्चा को प्रसूति कक्ष में अस्पताल में तैनात आशा ने भर्ती कराया।
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सदर अस्पताल के कुव्यवस्था की खुली पोल
सोहसराय थाना क्षेत्र के बसार बीघा मोहल्ला निवासी सरिता कुमारी को मंगलवार की देर शाम प्रसव पीड़ा हुआ। सोनू कुमार अपनी 21 वर्षीय पत्नी को ग्रामीणों की मदद से डिलीवरी कराने के लिए सदर अस्पताल लेकर गया। ग्रामीण सोनू की पत्नी को अस्पताल के गेट पर ही छोड़ कर चले गए। जिसके बाद सोनू अपनी सास को लाने चला गया इतने ही देर में महिला को प्रसव पीड़ा हुआ और अस्पताल के सामने ही डिलेवरी हो गई।

महिला ने सड़क पर बच्ची को दिया जन्म
सरिता कुमारी ने सदर अस्पताल के गेट के सामने ही सड़क पर बच्ची को जन्म दिया। वहीं महिला के पति सोनू कुमार ने बताया कि वह दिहाड़ी मजदूर है। उसकी पत्नी प्रेगनेंट थी औऱ 9 महीने पूरे हो चुके थे। जब वह मज़दूरी कर के घर लौटा तो देखा कि उसकी पत्नी को दर्द हो रहा है। पत्नी ने सोनू से कहा कि उसे अस्पताल लेकर चले। जिसके बाद वह स्थानीय लोगों की मदद से पत्नी को अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन मोहल्ले के लोग उसकी पत्नी को अस्पताल के गेट पर ही छोड़ कर वापस चले गए।

मीडिया कर्मियों ने की सोनू की मदद
सोनू ने सोचा कि अपनी सासा को ले आए तो पत्नी की तीमारदारी हो जाएगी, इसलिए वह सास को बुलाने चला गया। जितनी देर में वह लौट कर आता, उतने ही समय में उसकी पत्नी ने अस्पताल गेट के सामने ही बच्ची को जन्म दे दिया। जब वह पहुंचा तो देखा कि वहां मौजूद लोग तमाशा देख रहे हैं। किसी ने भी कोई मदद नहीं की। मीडिया कर्मियों की नज़र जब पड़ी तो उन्होंने पहल की। जिसके बाद आशा कर्मी ने जच्चा और बच्चा को प्रसव वार्ड में भर्ती कराया। महिला की यह तस्वीर वाकई में बिहार के लचर स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलने वाली है। यह पहला मामला नहीं है बिहार के कई ज़िलों से ऐसी दिलदहला देने वाली खबर अकसर देखने को मिलती है, लेकिन हालात सुधारने के नाम पर सिर्फ़ बयानबाज़ी के अलावा कुछ भी नहीं होता है।
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