Bihar: SIR ड्राफ्ट पर दावा-आपत्ति के 15 दिन पूरे, 28,370 दावे-आपत्तियां, कितने लाख नए मतदाताओं ने दिया आवेदन?
Bihar Politics: बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) की प्रक्रिया जारी है। ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद दावा-आपत्ति दर्ज कराने की 15 दिन की समय-सीमा पूरी हो चुकी है। इस अवधि में बड़ी संख्या में दावे और नए मतदाताओं के आवेदन प्राप्त हुए हैं।
कितने दावे और आपत्तियाँ मिलीं?
चुनाव आयोग के अनुसार, इस अवधि में कुल 28,370 दावे और आपत्तियाँ दर्ज की गई हैं। इनमें से अब तक 857 मामलों का निपटारा किया जा चुका है।

आयोग ने साफ किया है कि दावा-आपत्ति दर्ज कराने के बाद संबंधित ईआरओ (Electoral Registration Officer) या एईआरओ (Assistant Electoral Registration Officer) को सभी दस्तावेजों की जांच और सत्यापन करना होगा। नियमों के मुताबिक, किसी भी दावे या आपत्ति पर 7 दिनों के भीतर फैसला देना अनिवार्य है।
नए मतदाताओं के आवेदन
इस प्रक्रिया के दौरान 1,03,703 नए मतदाता पंजीकरण के लिए आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 6 आवेदन बीएलए (Booth Level Agent) के जरिए मिले हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि युवा और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं में उत्साह बना हुआ है।
राजनीतिक दलों ने क्यों नहीं दी आपत्ति?
गौर करने वाली बात यह है कि ड्राफ्ट सूची पर दावा-आपत्ति दर्ज कराने की पूरी अवधि में किसी भी राजनीतिक दल की ओर से कोई औपचारिक आपत्ति दर्ज नहीं की गई। यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है क्योंकि विपक्ष लगातार मतदाता सूची में अनियमितताओं का आरोप लगाता रहा है।
नाम हटाने की प्रक्रिया पर आयोग का बयान
चुनाव आयोग ने अपने बयान में दोहराया कि 1 अगस्त, 2025 को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची से सीधे किसी भी नाम को नहीं हटाया जा सकता। यदि नाम हटाना आवश्यक हो तो ईआरओ/एईआरओ जांच करेंगे और संबंधित व्यक्ति को निष्पक्ष अवसर देने के बाद ही आदेश जारी करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले की निगरानी कर रहा है। शीर्ष अदालत ने हाल ही में चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि मतदाता सूची से हटाए गए 65 लाख नामों की पूरी जानकारी जिला निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर प्रकाशित की जाए। साथ ही, नाम हटाने के कारणों को भी सार्वजनिक करने का आदेश दिया गया है।
आगे क्या होने वाला है?
अदालत ने आयोग से कहा है कि इस सूचना का प्रचार-प्रसार अखबार, रेडियो, टीवी और सोशल मीडिया के माध्यम से भी किया जाए। 1 अगस्त को ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद घर-घर सत्यापन के आधार पर दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया चल रही है। अब इनके निपटारे के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी, जो बिहार विधानसभा चुनाव के लिए आधार बनेगी।












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