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Parbatta Election 2025: परबत्ता सीट पर 'साम्राज्य' की परीक्षा! जातीय गणित से संभावित उम्मीदवारों तक, हर पहलू

Parbatta Assembly Constituency Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 नजदीक है, और जैसे-जैसे राजनीतिक तापमान बढ़ रहा है, राज्य की हॉट सीटों में से एक बन चुकी है परबत्ता विधानसभा क्षेत्र (Parbatta Constituency)। यह सीट इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यहां से बिहार बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी का कनेक्शन जुड़ चुका है। वर्तमान में जेडीयू (JDU) नेता डॉ. संजीव कुमार परबत्ता से विधायक हैं।

2020 चुनाव में जेडीयू के डॉ. संजीव कुमार ने राजद के दिगंबर प्रसाद तिवारी को सिर्फ 951 वोटों से हराया था। RJD के लिए यह सीट जीतना प्रतिष्ठा की लड़ाई बन सकता है, क्योंकि वह लगातार दो बार हार चुकी है, वो भी मामूली अंतर से। जेडीयू अगर यहां से फिर जीतती है, तो यह नीतीश कुमार की नीतियों पर जनता की मोहर मानी जाएगी। तो आइए जानते हैं परबत्ता सीट का इतिहास, जातीय समीकरण और इस बार कौन-कौन यहां अपना 'सियासी भाग्य' आजमा सकता है।

Parbatta Assembly Election 2025

परबत्ता विधानसभा सीट के बारे में जानकारी?

परबत्ता विधानसभा क्षेत्र खगड़िया जिले में आता है और यह खगड़िया लोकसभा सीट के तहत आता है। खगड़िया में कुल छह विधानसभा क्षेत्र है, इनमें अलौली, खगड़िया, बेलदौर और परबत्ता। इसके अलावा दो अन्य सीटें-सिमरी बख्तियारपुर (सहरसा जिला) और हसनपुर (समस्तीपुर जिला) भी शामिल हैं। यानी यह लोकसभा क्षेत्र तीन अलग-अलग जिलों में फैला हुआ है।

परबत्ता विधानसभा सीट 1951-52 में हुए पहले बिहार विधानसभा चुनाव से ही अस्तित्व में है। यह सीट न केवल ऐतिहासिक है, बल्कि हर चुनाव में यहां का जातीय संतुलन और राजनीतिक समीकरण पूरे राज्य की राजनीति को प्रभावित करता रहा है। यहां पर कई बार दल-बदल, गठबंधन और व्यक्तिगत लोकप्रियता ने हार-जीत का फैसला किया है।

परबत्ता सीट पर जातीय समीकरण: कौन किस पर भारी?

परबत्ता में ओबीसी, अति पिछड़ा और दलित वोटर्स की संख्या सबसे अधिक है। साथ ही, सवर्ण (ब्राह्मण, राजपूत), यादव, कुर्मी और मुस्लिम समुदाय की भी निर्णायक भूमिका रहती है।

कोइरी-धानुक वोट यहां एक प्रमुख कारक है, जो सम्राट चौधरी के पक्ष में जा सकता है। यादव और मुस्लिम वोट, पारंपरिक रूप से RJD के समर्थन में माना जाता है। अति पिछड़ा वर्ग का रुझान इस बार चुनावी समीकरणों को उलट भी सकता है।

परबत्ता चुनाव 2025 में कौन हो सकते हैं उम्मीदवार?

🟧 NDA (BJP/JDU) से संभावित चेहरा: डॉ. संजीव कुमार (JDU) - वर्तमान विधायक, सरकार में अच्छा अनुभव

🟥 RJD से संभावित दावेदार: नई चेहरे की तलाश जारी है, लेकिन डॉ. संजीव के खिलाफ मजबूत लोकल सोशल इंजीनियरिंग पर फोकस रहेगा। मुस्लिम-यादव समीकरण को साधने वाले प्रत्याशी की तलाश जारी है।

परबत्ता विधानसभा सीट और सम्राट चौधरी का कनेक्शन

साल 2000 में परबत्ता सीट राकेश कुमार (सम्राट चौधरी) ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद इस सीट पर लगातार हुए तीन चुनाव में सम्राट चौधरी हार गए थे। 2010 के विधानसभा चुनाव में राजद की टिकट पर सम्राट चौधरी ने जदयू के रामानंद प्रसाद सिंह को हराया था। ये वही सम्राट चौधरी हैं, जो इस वक्त बिहार में भाजपा का चेहरा हैं और राज्य के उप मुख्यमंत्री हैं।

परबत्ता विधानसभा सीट: चुनावी इतिहास (1952-2020)

📅 1952
वोटिंग: 26 मार्च

कुल वोटर: 42,797 | मतदान: 24,617

विजेता: कुमार त्रिबेनी कुमार (सोशलिस्ट पार्टी)

हारने वाले: लखन लाल मिश्रा (कांग्रेस)

अंतर: 858 वोट

📅 1957
विजेता: लक्ष्मी देवी (कांग्रेस)

हारने वाले: रामस्वरूप प्रसाद सिंह (निर्दलीय)

अंतर: 13,596 वोट | वोट शेयर: 54.79%

📅 1962
विजेता: लक्ष्मी देवी (कांग्रेस)

हारने वाले: सतीश प्रसाद सिंह (स्वतंत्र पार्टी)

अंतर: 4,735 वोट

📅 1964 (उपचुनाव)

  • विजेता: एस.सी. मिश्रा (कांग्रेस)
  • हारने वाले: सतीश प्रसाद सिंह

📅 1967

  • विजेता: सतीश प्रसाद सिंह (संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी)
  • हारने वाले: एल.एल. मिश्रा (निर्दलीय)
  • अंतर: 13,860 वोट
  • कांग्रेस तीसरे स्थान पर

📅 1969

  • विजेता: जगदंब प्रसाद मंडल (कांग्रेस)
  • हारने वाले: सतीश प्रसाद सिंह (शोषित दल)
  • अंतर: 4,274 वोट

📅 1972

  • विजेता: शिवाकांत मिश्रा (कांग्रेस)
  • हारने वाले: बालकृष्ण आज़ाद (निर्दलीय)
  • अंतर: 1,924 वोट
  • जगदंब प्रसाद मंडल चौथे स्थान पर, जमानत जब्त

📅 1977

  • विजेता: नईम अख्तर (निर्दलीय)
  • हारने वाले: सच्चिदानंद दास (कांग्रेस)
  • अंतर: 12,655 वोट
  • सतीश प्रसाद सिंह तीसरे स्थान पर

📅 1980

  • विजेता: रामचंद्र मिश्रा (कांग्रेस)
  • हारने वाले: नईम अख्तर (जनता पार्टी सेक्युलर)
  • अंतर: 24,844 वोट

📅 1985

  • विजेता: रामचंद्र मिश्रा (कांग्रेस)
  • हारने वाले: सुरेंद्र सिंह (लोक दल)
  • अंतर: 7,701 वोट

📅 1990

  • विजेता: विद्यासागर निषाद (जनता दल)
  • हारने वाले: परमानंद चौधरी (निर्दलीय)
  • अंतर: 4,038 वोट

📅 1995

  • विजेता: विद्यासागर निषाद (जनता दल)
  • हारने वाले: परमानंद चौधरी (कांग्रेस)
  • अंतर: 12,887 वोट

📅 2000

  • विजेता: राकेश कुमार उर्फ सम्राट चौधरी (राजद)
  • हारने वाले: रामानंद प्रसाद सिंह (निर्दलीय)
  • अंतर: 12,777 वोट

📅 2004 (उपचुनाव)

  • विजेता: रामानंद प्रसाद सिंह (जदयू)
  • हारने वाले: राकेश कुमार (राजद)
  • अंतर: 11,134 वोट

📅 2005 (फरवरी)

  • विजेता: रामानंद प्रसाद सिंह (जदयू)
  • हारने वाले: राकेश कुमार (राजद)
  • अंतर: 1,918 वोट

📅 2005 (अक्टूबर)

  • विजेता: रामानंद प्रसाद सिंह (जदयू)
  • हारने वाले: राकेश कुमार (निर्दलीय)

📅 2010

  • विजेता: राकेश कुमार उर्फ सम्राट चौधरी (राजद)
  • हारने वाले: रामानंद प्रसाद सिंह (जदयू)
  • अंतर: 808 वोट
  • वोट: सम्राट (60,428), रामानंद (59,620)

📅 2015

  • विजेता: रामानंद प्रसाद सिंह (जदयू)
  • हारने वाले: रामानुज चौधरी (भाजपा)
  • अंतर: 28,924 वोट

📅 2020

  • विजेता: डॉ. संजीव कुमार (जदयू)
  • हारने वाले: दिगंबर प्रसाद तिवारी (राजद)
  • अंतर: 951 वोट
  • वोट: संजीव (77,226), दिगंबर (76,275)
  • संजीव कुमार: रामानंद प्रसाद सिंह के बेटे
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