नीतीश कुमार इस्तीफा देकर कब लेंगे CM पद की शपथ? मंत्रिमंडल में कौन-कौन शामिल, पढ़ें हर एक डिटेल
Nitish Kumar Resigns New CM Ka Shapath Grahan Kab Hai: बिहार विधानसभा चुनाव में NDA की बड़ी जीत के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी अंतिम कैबिनेट बैठक की, जिसमें मौजूदा विधानसभा को भंग करने का प्रस्ताव पारित हुआ। इसके तुरंत बाद वे राजभवन पहुंचे और राज्यपाल से मुलाकात की। हालांकि उन्होंने अभी अपना इस्तीफा नहीं सौंपा है। नीतीश कुमार जल्द ही नई सरकार बनाने का दावा भी पेश करेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक नीतीश कुमार 19 नवंबर को इस्तीफा देंगे।
अब पूरे बिहार की निगाहें 20 नवंबर पर टिकी हैं, जब नीतीश कुमार एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। यह उनका 10वां कार्यकाल होगा, जो उन्हें देश के सबसे लंबे समय तक काम करने वाले मुख्यमंत्रियों की सूची में और ऊपर ले जाएगा।

🟡 20 नवंबर को गांधी मैदान में होगा भव्य शपथ ग्रहण
सरकार गठन की तैयारी पटना के गांधी मैदान में जोरों पर है। मंच से लेकर सुरक्षा व्यवस्था तक हर स्तर पर काम तेज कर दिया गया है। जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे, जिससे कार्यक्रम का महत्व और बढ़ गया है। शपथ ग्रहण समारोह में NDA शक्ति प्रदर्शन करेगी।
मंत्रियों की संख्या को लेकर कई कयास हैं। बताया जा रहा है कि भाजपा और जदयू को लगभग बराबर प्रतिनिधित्व मिलेगा। दोनों दलों से 16-16 मंत्री शामिल हो सकते हैं। लोजपा (रामविलास) से 2, जबकि हम और रालोमो से 1-1 मंत्री बनाए जाने की संभावना है।
🟡 JDU और BJP की बैठकों का दौर, विधायक पटना में जुटे
नई सरकार के लिए विधायकों के स्तर पर भी हलचल जारी है। जदयू ने अपने सभी नवनिर्वाचित विधायकों को रविवार तक पटना पहुंचने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद से होटल और सरकारी अतिथि गृहों में विधायकों की चहल-पहल बढ़ गई। दूसरी ओर भाजपा विधायक दल की बैठक मंगलवार (18 नवंबर) को होने वाली है, जिसमें मंत्री पदों पर अंतिम राय बन सकती है।
🟡 36 मंत्रियों वाली कैबिनेट बन सकती है
संविधान के मुताबिक बिहार में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इसी आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार की कैबिनेट का आकार बड़ा होगा। सूत्रों के मुताबिक-
- जदयू: मुख्यमंत्री सहित 16 मंत्री
- भाजपा: 2 उप मुख्यमंत्री सहित 16 मंत्री
- लोजपा (आर): 2 मंत्री, जिनमें से एक को डिप्टी CM बनाए जाने की चर्चा
- हम और रालोमो: 1-1 मंत्री
कुछ सूत्रों का दावा है कि शपथ ग्रहण के दिन सिर्फ मुख्यमंत्री शपथ ले सकते हैं, जबकि दूसरी जानकारी यह कहती है कि नीतीश के साथ 2 डिप्टी सीएम और लगभग 20 मंत्री भी शपथ ले सकते हैं। अंतिम फैसला कार्यक्रम से कुछ घंटे पहले स्पष्ट हो सकता है।
🟡 किन-किन नेताओं को बनाया जा सकता है मंत्री?
- विजय चौधरी (JDU)
- बिजेंद्र यादव (JDU)
- श्रवण कुमार (JDU)
- अशोक चौधरी (JDU)
- लेसी सिंह (JDU)
- जमा खान (JDU)
- मदन सहनी (JDU)
- जयंत राज (JDU)
- महेश्वर हजारी (JDU)
- संतोष निराला (JDU)
- सम्राट चौधरी (BJP)
- नितिन नवीन (BJP)
- मंगल पांडेय (BJP)
- रामकृपाल यादव (BJP)
- रजनीश कुमार (BJP)
- संतोष मांझी (HAM)
- स्नेहलता कुशवाहा (RLSP)
- राजू तिवारी (LJP(R)
- संजय पासवान (LJP(R)
🟡 22 नवंबर से पहले हर हाल में नई सरकार
मौजूदा सरकार का कार्यकाल 22 नवंबर को खत्म हो रहा है, इसलिए उससे पहले नई सरकार बनना जरूरी है। चुनाव आयोग ने सभी विजयी उम्मीदवारों की सूची राजभवन को सौंप दी है और अब आचार संहिता भी समाप्त हो चुकी है। ऐसे में सरकार गठन की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है।
बिहार की राजनीति एक बार फिर नए मोड़ पर खड़ी है। नई सरकार के मंत्री कौन होंगे और NDA में किसकी कितनी हिस्सेदारी होगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। 20 नवंबर को होने वाला शपथ ग्रहण समारोह कई राजनीतिक समीकरणों को साफ कर देगा।
🟡 पटना के गांधी मैदान में 17 से 20 नवंबर आम लोगों की एंट्री बंद, क्या है तैयारियां?
पटना के गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियाँ तेजी से चल रही हैं और इसी वजह से प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ा दिया है। मैदान में 17 से 20 नवंबर तक आम लोगों की एंट्री पूरी तरह बंद कर दी गई है।
इस दौरान तीन-स्तरीय सुरक्षा घेरे की व्यवस्था की जाएगी। मैदान और आसपास के इलाकों में लगभग 500 सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे, जिनमें केंद्रीय बलों के जवान भी शामिल होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कई राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और एनडीए के शीर्ष नेता इस समारोह में भाग लेने वाले हैं, इसलिए सुरक्षा एजेंसियां विशेष सतर्कता बरत रही हैं।
🟡 NDA को मिला जबरदस्त बहुमत, महागठबंधन बुरी तरह पिछड़ा
हाल में आए चुनाव परिणामों ने बिहार की राजनीति का पूरा समीकरण बदल दिया। एनडीए ने अप्रत्याशित रूप से शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 202 सीटों पर जीत हासिल की। यह जीत इतनी बड़ी थी कि एनडीए के कई वरिष्ठ नेता भी इतने बड़े बहुमत की कल्पना नहीं कर पाए थे। एग्जिट पोल भी 200 पार जाने का अनुमान नहीं लगा पाए थे, लेकिन जनता ने अपना फैसला बेहद स्पष्ट कर दिया।

दूसरी ओर महागठबंधन पूरी तरह बिखर गया और सिर्फ 35 सीटों पर सिमटकर रह गया। राजद का पारंपरिक 'MY' (मुस्लिम-यादव) समीकरण भी इस बार कारगर साबित नहीं हुआ। खासकर सीमांचल के मुस्लिम मतदाताओं ने इस चुनाव में राजद से अधिक भरोसा AIMIM पर जताया।
'जनसुराज' अभियान की भी हवा निकल गई। इसके ज्यादातर उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। चुनाव नतीजों का अंदाज़ा 2010 के विधानसभा चुनाव की तरह लगा, फर्क सिर्फ इतना है कि तब जदयू सबसे बड़ी पार्टी थी, जिसने 115 सीटें जीती थीं और भाजपा 91 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर थी। मगर इस बार समीकरण उलटे हो गए-भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और जदयू उसके बाद नंबर दो पर रही।

इस बार जदयू और भाजपा बराबर सीटों (101-101) पर चुनाव मैदान में उतरी थीं। चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टियों ने भी उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर दिखाया। कुल मिलाकर, बिहार के इस चुनाव ने कई पुराने राजनीतिक समीकरण बदल दिए और एनडीए को रिकॉर्ड बहुमत दिलाकर नई राजनीतिक तस्वीर खड़ी कर दी।












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