बिहारः नीतीश सरकार का अहम फैसला, नहीं बढ़ेगा पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल
पटना। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में सीएम नीतीश कुमार ने अहम फैसला लिया है। उन्होंने यह तय किया है कि 15 जून को प्रदेश के करीब ढाई लाख पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म हो जाने दिया जाएगा। हालांकि गांवों को चलाने की जिम्मेदारी पूरी तरह अधिकारियों को नहीं होगी। बल्कि परामर्श समितियां बनेंगी, जो गांवों की सरकार चलाएंगी। सीएम नीतीश कुमार ने मंगलवार की दोपहर में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये कैबिनेट बैठक की। इस मीटिंग में उन्होंने 19 प्रस्तावों को मंजूरी दी। इनमें मुख्यमंत्री तीव्र बीज विस्तार योजना, एकीकृत बीज ग्राम योजना, मिनीकिट योजन और बीज वितरण कार्यक्रम के तहत किसानों को अनुदान दिए जाने की स्वीकृति कैबिनेट ने दी।

राज्य छठे वित्त आयोग के तहत ग्राम पंचायतों को 656 करोड जारी किए जाने की भी स्वीकृति दी गई। इसके अलावा कोरोना से अनाथ हुए बच्चों को हर माह 1500 देने के लिए योजना की शुरुआत की स्वीकृति मिली। बिहार में विपक्ष और यहां तक कि सरकार में शामिल पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी, भाजपा सांसद रामकृपाल यादव सहित कई नेता पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने की मांग कर रहे थे लेकिन बिहार में ऐसा कोई प्रावधान न होने की वजह से माना जा रहा था कि सरकार अधिकारियों को प्रशासक नियुक्त कर सकती है।
इसके उलट कैबिनेट ने बीच का रास्ता निकालते हुए परामर्श समितियों के गठन को मंजूरी दी। इस फैसले के तहत ग्राम पंचायतों और ग्राम कचहरियों में परामर्शी समिति का गठन किया जाएगा। नीतीश सरकार इसके लिए पंचायती राज अधिनियम 2006 में संशोधन करेगी। बताया जा रहा कि अधिनियम की धारा 14, 39, 66 और 92 में संशोधन कर जनप्रतिनिधियों को अधिकार दिए जाएंगे। परामर्श समितियों में जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ कुछ अधिकारियों को भी जिम्मेदारी दी जाएगी।












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