Kidney Case Update: महिला को ज़िंदा रखने के लिए किडनी ट्रांसप्लांट ज़रूरी, डायलिसिस से गुज़ारा मुश्किल
पीएमसीएच और एसकेएमसीएच की रिपोर्ट में यह साफ हो गया कि महिला कि दोनो किडनी नहीं है। फिल्हाल महिला को डायलिसिस पर ही ज़िंदा है। सिविल सर्जन की मानें तो बिना किडनी के मरीज ज्यादा दिनों तक जिंदा नहीं रह सकता है।
मुजफ्फरपुर, 17 सिंतबर 2022। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के किडनी कांड मामले में अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। एस के झा (मानवाधिकार अधिवक्ता) महिला के यूट्रस का ऑपरेशन के नाम किडनी निकालने के मामले में मानवाधिकार आयोग में याचिका दायर की है। इसके साथ ही उन्होंने मांग की है कि आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए। आपको बता दें कि 3 सितंबर को महिला का ऑपरेशन शुभकांत क्लिनिक (बरियारपुर) में हुआ था। अनऑथराइज्ड डॉक्टर पवन कुमार ने ऑपरेशन किया था जिसके बाद लगातार महिला की तबियत बिगड़ती जा रही है। फिल्हाल महिला डायलिसिस पर ज़िंदा है। उसके किडनी ट्रांसप्लांट की सख्त ज़रूरत है।

PMCH और SKMCH की रिपोर्ट में खुलासा
पीएमसीएच और एसकेएमसीएच की रिपोर्ट में यह साफ हो गया कि महिला कि दोनो किडनी नहीं है। फिल्हाल महिला को डायलिसिस पर ही ज़िंदा है। सिविल सर्जन की मानें तो बिना किडनी के मरीज ज्यादा दिनों तक जिंदा नहीं रह सकता है। डायलिसिस कुछ वक्त के लिए ही होता है। महिला को किडनी ट्रांसप्लांट की ज़रूरत है। किडनी ट्रांसप्लांट के लिए कई जांच और बहुत सी प्रक्रिया है। सबसे ज़रूरी बात यह है कि किडनी डोनर मिले या अगर उसके परिवार से कोई कोई किडनी डोनेट के लिए तैयार हो तो आईजीआईएमएस इस पर गौर करेगा। आईजीआईएमएस में दोबारा से महिला की जांच होगी औऱ फिर रिपोर्ट के मुताबिक इलाज किया जाएगा।

युट्रस के ऑपरेशन के नाम पर किडनी निकाली
मानवाधिका अधिवक्ता एसके झा ने कहा की युट्रस के ऑपरेशन के नाम पर किडनी निकाल लेना बहुंत ही गंभीर मामला है। इसकी निपस्पक्षता से उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों को सख्त से सख़्त सज़ा दी जाए। पीड़ित महिला की मानें तो डॉक्टर ने पेट में गोला होने की बात कही थी, आपरेशन के लिए 30 हज़ार रुपये भी लिए थे। ऑपरेशन में डॉक्टर ने किडनी ही निकाल ली। झोलाछाप डॉक्टर पवन ने गर्भाशय में ट्यूमर के नाम पर 3 सिंतबर को ऑपरेशन किया था।

क्लिनिक संचालक पर लगा गंभीर आरोप
ऑपरेशन के बाद से ही महिला की तबियत बिगड़ने लगी थी। जब परिजनों ने एसकेएससीएच में जांच कराया तो किडनी नहीं होने की बात सामने आई। इस मामले में प्राथमिकि दर्ज होने के बाद जब जांच की गई तो क्लिनिक अनऑथराइज्ड था, जिसमे सरकारी मानदंडों का ख्याल नहीं रखा गया था। पीड़ित के परिजनों ने आरोप लगाते हुए कहा कि क्लिनिक संचालक पवन कुमार और ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों ने किडनी निकाला है। वहीं बरियारपुर थाने में इस मामले में शिकायत दर्ज की गई। जिसके बाद नर्सिंग होम संचालक के खिलाफ ह्यूमन पार्ट्स ट्रांसप्लांट एक्ट और एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

बेहतर इलाज के लिए नहीं है पैसे
सुनीता की हालत नाजुक बनी हुई है,ग्रामीणों ने बताया कि महिला के परिजनों के पास बेहतर इलाज के लिए पैसे भी नहीं हैं। प्रशासन की तरफ से भी किसी प्रकार की मदद नहीं मिली है। डॉक्टर सतीश कुमार की मानें तो देर शाम महिला को आईसीयू में भर्ती करवाया गया, लेकिन बालत नाजुक होने की वजह से उसे पटना रेफर किया गया, लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने का हवाला देकर परिजन मरीज को पटना नहीं ले जाना चाह रहे हैं। स्थानीय लोगों द्वारा चंदा कर महिला का इलाज कराया जा रहा है। मरीज की हालत बिगड़ते जा रही है। शरीर में सूजन होने की वजह से महिला शौच भी नहीं कर पा रही है और कुछ खा भी नहीं पा रही है।

मामले की जांच में जुटी पुलिस
महिला की किडनी निकालने वाले नीजि अस्पताल में की जांच करने एसएसपी जयकांत पहुंचे। अस्पताल का नज़ारा देख कर नज़ारा देखकर वह भी दंग रह गए। क्लिनिक में छापेमारी के दौरान पुलिस की टीम ने पाया कि वहां नर्सिंग होम जैसी कोई सुविधा वहां नहीं थी। चौकी पर लिटाकर मरीज़ों का ऑपेरशन किया जाता था। शुभकान्त क्लीनिक की जांच करने एसएसपी जयंतकांत के साथ सकरा और बरियापुर पुलिस भी पहुंची थी। पुलिस की टीम जब पहुंची तो क्लिनिक के मेन गेट पर ताला बंद पाया। फिर एसएसपी ने नर्सिंग होम के पीछे देखा तो वहां एक लकड़ी का दरवाजा था। उस दरवाजे से पुलिस की टीम अंदर दाखिल हुई। वहां पर बरामद मेडिकल इक्विपमेंट, मेडिकल इंस्ट्रूमेंट्स, दवाई समेत अन्य सामानों को जब्त किया गया।
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