Motivational Story: बुज़ुर्ग को रोते देख पसीजा दिल, बचाई उनकी बेटी की जान, फिर बने 'रक्तवीर'
Motivational Story, Koshi Ke Raktveer: बिहार के युवा विभिन्न क्षेत्रों में देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं, वहीं समाज सेवा में भी बिहार के युवा कम नहीं है। आज हम आपको एक ऐसे युवा के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने दूसरे की परेशानी को अपना समझते हुए मुहिम की शुरुआत की और आज की तारीख में उन्हें लोग रक्तवीर की संज्ञा दे रहे हैं।
बिहार के सुपौल ज़िला के रहने वाले 28 वर्षीय अविनाश कुमार (लोलप ठाकुर) अभी तक 1 हज़ार 100 लोगों की रक्तदान के ज़रिए जान बचा चुके हैं। अब वह युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। अपने काम के लिए उन्हें विभिन्न संगठनों ने कई अवार्ड से नवाज़ा भी है।

वन इंडिया हिंदी से बात करते हुए अविनाश कुमार (लोलप ठाकुर) ने बताया कि अभी तक उनकी संस्था की तरफ़ से 330 लीटर रक्तदान किया जा चुका है। अविनाश से जब पूछा गया कि आपको रक्तदान संस्था बनाने का आइडिया कैसे आया, तो उन्होंने बताया उनका दोस्त का सड़क हादसे का शिकार हो गया था।
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अपने दोस्त को देखने के लिए वह अस्पताल गए थे, जब लौट रहे थे तो देखा कि अस्पताल के बरामदे पर एक बुज़ुर्ग बेतहाशा रो रहे थे। उन्हें रोते हुए देख, रहा नहीं गया। बुज़ुर्ग से पूछा की बाबा आप क्यों रो रहे हैं। इस पर उन्होंने बताया कि उनकी बेटी गर्भवती है, और उसे खून की ज़रूरत है।
बाबा को अपनी बेटी का ब्लड ग्रुप तक पता नहीं था, फिर उन्हें लेकर डॉक्टर के पास गया और उनकी बच्ची के ब्लड ग्रुप की जानकारी ली तो पता चला कि ब्लड ग्रुप A+ है। मेरे भी ब्लड ग्रुप A+ था, मैंने उनकी बच्ची के लिए रक्तदान किया। इसके बाद जच्चा और बच्चा दोनों की जान बच गई।
इसके बाद ही मैंने सोच कि इस तरह कई लोग परेशान होते होंगे, तो क्यों ना कुछ ऐसा किया जाए जिससे हम समाज के लोगों की जान बचा सके। अपने साथियों से इस बात विचार विमर्श किया और फिर रक्तवीर संस्था की शुरुआत की। धीरे-धीरे लोगों की मदद पहुंचाते गए और आज लोगों का हम लोगों को बेशुमार प्यार मिल रहा है।
अविनाश कुमार के पहल से 'रक्तवीर संस्था' की शुरुआत हुई। आज की तारीख में किसी को भी रक्त की ज़रूरत होती है तो वह बिना कोई झिझक के रक्तवीर संस्था पहुंच जाते हैं। किसी भी ब्लड ग्रुप के खून की ज़रूरत क्यो ना हो संस्था के लोग मुफ्त में उपलब्ध करवा देते हैं। धीरे-धीरे प्रदेश के हर ज़िले से लोग इस संस्था से जुड़ रहे हैं। सभी लोगों के सहयोग से यह काम चल रहा है।
आपको बता दें कि कोशी रक्तवीर सेवा संगठन सिमराही सुपौल की स्थापना साल 2019 में हुई थी। सुपौल के रहने वाले लोलप ठाकुर ने इसकी शुरुआत की थी। संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि वह लोग हमेश रक्तदान के लिए तैयार रहते हैं। इसके अलावा भी सभी गरीबों जरूरतमंदों की मदद करने की कोशिश करते हैं।
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